Wednesday, Dec 08, 2021
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uddhav thackeray big statement about nrc the law will not apply in maharashtra

NRC पर उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान, कहा- महाराष्ट्र में नहीं होने देंगे लागू

  • Updated on 2/2/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री और शिवसेना (shivsena) प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने एनआरसी (NRC) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वे महाराष्ट्र में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को लागू नहीं करेंगे।

शिवसेना के मुखपत्र सामना (Saamana) में अपने साक्षात्कार में उद्धव ठाकरे ने कहा है, नागरिकता संशोधन अधिनियम नागरिकता को छीनने के बारे में नहीं है, यह देने के बारे में है। अगर एनआरसी लागू किया गया, तो हिंदुओं और मुसलमानों दोनों के लिए नागरिकता साबित करना मुश्किल होगा। मैं ऐसा नहीं होने दूंगा।

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नागरिकता संशोधन बिल पर मोदी सरकार का समर्थन
दरअसल इससे पहले लोकसभा में शिवसेना ने नागरिकता संशोधन बिल पर मोदी सरकार का समर्थन किया था। हालांकि जब नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा से पारित होकर राज्यसभा पहुंचा, तो शिवसेना ने सदन से वाक आउट किया था।

इसके बाद संसद के दोनों सदनों से नागरिकता संशोधन बिल पारित हो गया था और राष्ट्रपति की मंजूरी से कानून बन गया था। नागरिकता संशोधन अधिनियम को सरकारी गजट में भी प्रकाशित किया जा चुका है।

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विरोध प्रदर्शन के बीच सीएम का बयान
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का यह ताजा बयान उस समय सामने आया है, जब नागरिकता संशोधन अधिनियम और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के खिलाफ दिल्ली के शाहीन बाग समेत देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम मुसलमानों के खिलाफ है और धर्म के आधार पर भेदभाव करता है।

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शाहीन बाग प्रदर्शन
हाल ही में केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार सीएए और प्रस्तावित एनआरसी के खिलाफ शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रहीं महिला प्रदर्शनकारियों से बात करने के लिए तैयार है। कानून मंत्री ने ट्वीट कर कहा, सरकार शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से बात करने के लिए तैयार है, यह बातचीत संरचनात्मक रूप में होनी चाहिए। नरेंद्र मोदी की सरकार उनसे संवाद करने और सीएए के खिलाफ उनके सभी संदेह दूर करने के लिए तैयार है।

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विरोध कर रहे हैं तो अच्छी बात
रविशंकर प्रसाद ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि ‘अगर आप विरोध कर रहे हैं तो अच्छी बात है, लेकिन आपके लोगों का जब हम कोई स्वर सुनते हैं वो कहते हैं कि सीएए (CAA) जबतक वापस नहीं होगा तो बात नहीं होगी। अगर ये चाहते हैं कि सरकार का कोई प्रतिनिधि बात करे तो एक स्ट्रक्चर तरीका होना चाहिए। अगर आप कहिएगा कि वहीं पर आकर बात करिए, तो कैसे होगा’।

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सरकार का पक्ष सुनना चाहती है सुप्रीम कोर्ट
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस मामले पर पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि केन्द्र सरकार का पक्ष सुने बगैर कोई आदेश नहीं देगा। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे (Sharad Arvind Bobde) की पीठ ने इस कानून को चुनौती देने वाली 143 याचिकाओं पर केन्द्र को नोटिस जारी किया। इसके साथ सभी उच्च न्यायालयों को इस मामले पर फैसला होने तक सीएए को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई से रोक लगा रखी हैं।

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क्या है नागरिकता संशोधन कानून
नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए के मुताबिक 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और उन्हें भारत कि नागरिकता (Citizenship) दे दी जाएगी। 10 जनवरी से ये कानून देश में प्रभावी हो चुका है।

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