Wednesday, Oct 05, 2022
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undeclared emergency in country nominal president not save constitution: yashwant sinha

गुजरात में सिन्हा बोले- देश में अघोषित आपातकाल, नाममात्र का राष्ट्रपति संविधान नहीं बचाएगा

  • Updated on 7/8/2022

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी दलों के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने शुक्रवार को कहा कि संवैधानिक मूल्य (वैल्यू) और लोकतांत्रिक संस्थाएं देश में खतरे का सामना कर रही हैं तथा नाममात्र का (रबर स्टैम्प) राष्ट्रपति संविधान को बचाने की कभी कोशिश नहीं करेगा। सिन्हा, 18 जुलाई को होने जा रहे राष्ट्रपति चुनाव से पहले गुजरात में कांग्रेस विधायकों का समर्थन मांगने के लिए यहां आए थे।    

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 पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस चुनाव में उनके और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के बीच मुकाबला सिर्फ इस बारे में नहीं है कि अगला राष्ट्रपति कौन बनेगा। सिन्हा ने कहा, ‘‘यह लड़ाई अब एक कहीं अधिक बड़ी लड़ाई में तब्दील हो गई है। यह इस बारे में है कि क्या वह व्यक्ति राष्ट्रपति बनने के बाद संविधान बचाने के लिए अपने अधिकारों का उपयोग करेगा/करेगी। और यह स्पष्ट है कि नाममात्र का राष्ट्रपति ऐसा करने की कभी कोशिश नहीं करेगा।’’

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    उन्होंने कहा, ‘‘आज, संवैधानिक मूल्य और प्रेस सहित लोकतांत्रिक संस्थाएं खतरे में हैं। देश में वर्तमान में अघोषित आपातकाल है। लाल कृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी ने (1975 से 1977 के बीच) आपातकाल के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी तथा इसके लिए वे जेल भी गये थे। आज उनकी ही पार्टी (भाजपा) ने देश में आपातकाल थोप दिया है। यह विडंबना ही है।’’ उन्होंने भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नुपुर शर्मा का समर्थन करने को लेकर हाल में दो लोगों की हत्या किये जाने की घटनाओं पर नहीं बोलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी आलोचना की।

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     सिन्हा ने आरोप लगाया, ‘‘दो हत्याएं हुईं। मेरे सहित हर किसी ने इसकी ङ्क्षनदा की। लेकिन ना तो प्रधानमंत्री और ना ही गृह मंत्री (अमित शाह) ने एक शब्द बोला। वे चुप हैं क्योंकि वे वोट पाने के लिए इस तरह के मुद्दों को ज्वलंत बनाये रखना चाहते हैं।’’ उन्होंने दावा किया कि एक आदिवासी (मुर्मू) के देश के शीर्ष संवैधानिक पद हासिल करने से भारत में जनजातीय समुदायों के जीवन में बदलाव नहीं आएगा।

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     उन्होंने कहा, ‘‘यह मायने नहीं रखता है कि कौन किस जाति या धर्म से आता है। सिर्फ यह बात मायने रखती है कि कौन व्यक्ति किस विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है और यह लड़ाई विभिन्न विचारधाराओं के बीच है। हालांकि, वह छह साल झारखंड की राज्यपाल रही थीं लेकिन इससे वहां आदिवासियों के जीवन में बदलाव नहीं आया।’’   

मुर्मू का समर्थन क्यों करें, यशवंत सिन्हा हमारे उम्मीदवार : तृणमूल सांसद 
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें और उनकी पार्टी के अन्य सांसदों को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बंगाल इकाई के नेतृत्व से एक पत्र मिला है, जिसमें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के लिए समर्थन मांगा गया है। रॉय ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी के सांसद और विधायक संयुक्त गैर-भाजपा उम्मीदवार यशवंत सिन्हा के पक्ष में मतदान करेंगे। राष्ट्रपति चुनाव के लिए समर्थन जुटाने के वास्ते राज्यों का दौरा कर रही मुर्मू का शनिवार को पश्चिम बंगाल के भाजपा सांसदों और विधायकों से मिलने के लिए कोलकाता जाने का कार्यक्रम है। 

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रॉय ने कहा, च्च्हमें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के हस्ताक्षर वाला एक पत्र मिला है, जिसमें तृणमूल सांसदों से राष्ट्रपति चुनाव में राजग प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू को वोट देने की अपील की गई है। उन्होंने दावा किया है कि मुर्मू की जीत तय है और लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मानदंडों को मजबूत करने के लिए हम सभी को उन्हें वोट देना चाहिए।’’ हालांकि, तृणमूल सांसद ने मुर्मू का समर्थन करने की किसी भी संभावना से इनकार किया। 

उन्होंने सवाल किया, 'जब विपक्षी दलों ने मिलकर यशवंत सिन्हा को मैदान में उतारा है तो हम राजग उम्मीदवार का समर्थन क्यों करें? हम सिन्हा के पक्ष में मतदान करेंगे।’’ पिछले महीने मजूमदार और अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर उनसे 18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में मुर्मू का समर्थन करने का आग्रह किया था।      बंगाल भाजपा ने जून में घोषणा की थी कि वह सभी तृणमूल सांसदों और विधायकों को पत्र लिखकर राजग उम्मीदवार के लिए समर्थन मांगेगी। पिछले हफ्ते ममता ने कहा था कि अगर भाजपा ने ओडिशा की आदिवासी नेता मुर्मू को चुनाव मैदान में उतारने से पहले विपक्षी दलों के साथ चर्चा की होती तो वह आम सहमति की उम्मीदवार बन सकती थीं। 

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