Friday, May 27, 2022
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पंजाब चुनाव में बेरोजगारी है सबसे बड़ा मुद्दा: भगवंत मान

  • Updated on 1/21/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के कन्वीनर अरविंद केजरीवाल पंजाब में भी अपनी पार्टी की सरकार बनाने के लिए पूरी तरह से सक्रिय हैं। चुनाव की घोषणा चाहे अभी हुई हो मगर उनके लगातार पंजाब दौरे बीते कुछ महीनों से जारी हैं। पिछली बार जनता में बनी हवा चुनाव के मौके पर पार्टी भुना नहीं पाई थी लेकिन इस बार वह ऐसी कोई गुंजाइश नहीं छोडऩा चाहते। सी.एम. चेहरे के तौर पर उन्होंने भगवंत मान की हाल ही में घोषणा की। इसके बाद पंजाब केसरी (जालंधर), नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार के मंच पर आए भगवंत मान से विभिन्न राजनीतिक और ताजा मसलों पर बात की बलवंत तक्षक और श्रमित चौधरी ने :-

मुख्यमंत्री पद के चेहरे का ऐलान बहुत ही बड़ी बात है। आप पंजाब को पहले से जानते हो। चुनावों से पहले सी.एम. चेहरे के लिए आपका ऐलान बड़ी बात है, कैसे देखते हैं?
बहुत बड़ी जिम्मेदारी मिली है, ऐसे ऐलान के बाद बहुत बोझ आ जाता है, हौसला भी परमात्मा से मिलता है, लोगों का प्यार मिलता है। मैं अरविंद केजरीवाल का आभारी हूं कि उन्होंने एक आम आदमी पर भरोसा जताया है। मैं पिछले सात सालों से गलियों में घूम रहा हूं। मुझे पता है कि किस गली-मोहल्ले की क्या समस्या है। किस इलाके के लिए पहले क्या करना है, पूरा रोडमैप तैयार कर दिया है।

क्या आपको उम्मीद थी कि पार्टी की रायशुमारी में लोग आपके पक्ष में वोट देंगे?
मैंने ही केजरीवाल को सुझाव दिया था कि सी.एम. चेहरे का चयन जनता से पूछ कर करें। आमतौर पर पार्टी प्रधान के कमरे से सी.एम. चेहरे का उम्मीदवार थोपा जाता है। जनता से पूछने के बाद ही यह ऐलान किया गया है। यह वही जनता है जिसने साढ़े 17 साल की उम्र में मुझे भगवंत मान बना दिया था। 93.3 प्रतिशत लोगों ने वोट देकर मेरा मान बढ़ा दिया, मेरी तो पंजाब के लिए जान भी हाजिर है। 

पंजाब के सबसे बड़े ज्वलंत मुद्दे क्या हैं?
बेरोजगारी पंजाब का सबसे बड़ा मुद्दा है। डिग्री लेकर भी नौकरी नहीं मिल रही और वे दुखी होकर विदेश जा रहे हैं। अगर लोगों को नौकरी मिल जाए तो वह नशा नहीं करेंगे, किसी को मारेंगे नहीं बल्कि काम करेंगे। पंजाब को ऐसे हालात की जरूरत है जहां पंजाबियों को नौकरी बांटने वाले बनाना है, नौकरी मांगने वाले नहीं। जब पंजाब में आप की सरकार बनेगी तो कहीं लाठीचार्ज नहीं होगा, लोगों को पानी की टंकी पर चढऩे की जरूरत नहीं होगी, वह धरना नहीं देंगे, वाटर कैनन नहीं चलाने होंगे, उन्हें आत्महत्या की जरूरत नहीं पड़ेगी।

पंजाब के पिछले चुनावों और इस बार के चुनावों में क्या फर्क नजर आ रहा है? पिछला चुनाव तीन कार्नर था, अब मल्टीकार्नर कहा जा रहा है?
मैं इसे मल्टीकार्नर नहीं मानता। भाजपा ने जो कृषि कानून बनाए, उन्होंने किसानों को पीड़ित किया। उस अन्नदाता को मवाली, गुंडे, माओवादी, नक्सलवादी कहा गया। ये वही लोग थे, जिनके बेटे देश के बार्डर की रक्षा कर रहे हैं। जो कैप्टन साहिब हैं वो दूसरे कोने में, उन्होंने लोगों का दिल बहुत तोड़ा है। उन्होंने पार्टी का नाम पंजाब लोक कांग्रेस रख दिया, उससे क्या होगा? ढींडसा परिवार से भी लोग खुश नहीं। एक पार्टी तो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बन कर चल रही है। सुखबीर बादल कभी कहते हैं भगवंत मान को सी.एम. चेहरा बनाओ, जब आम आदमी पार्टी ऐलान करती है तो कहते हैं कि ऐलान हिंदी में क्यों किया, पंजाबी में क्यों नहीं किया?

पंजाब में ड्रग को कितना बड़ा मुद्दा मानते हैं आप?
पंजाब से नशे की कमर मैं सिर्फ चार हफ्ते में तोड़ दूंगा। कानूनी कार्रवाई भी करेंगे। नशे के किंगपिन को भी पकड़ेंगे। इनकी सरकार को तो कार्रवाई रोकने के लिए चार डी.जी.पी. बदलने पड़े। एक दिखावे की एफ.आई.आर. करने से क्या होगा। राजा वडिंग को देखे, पहले बसें पकड़ी जाती हैं, फिर चार दिन वही बसें सड़कों पर दौड़ती मिलती हैं।

आपने 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने, 18 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को 1,000 रुपए देने की बात कही है लेकिन पंजाब तो पहले ही तीन लाख करोड़ रुपए के कर्ज में है?
सोचें कि तीन लाख करोड़ कहां खर्च हुए? पिछले कई सालों से पंजाब में कोई नया सरकारी स्कूल, अस्पताल या सड़कें तो बनी नहीं। जो बनी भी हैं, वो प्राइवेट कंपनियों ने बनाई हैं। हां, कुछ लोगों ने पंजाब में महल, सात सितारा होटल जरूर बनाए, अपनी बसों की संख्या भी बढ़ाई। शॉपिंग कांप्लैक्स भी बने लेकिन अब पंजाब में जनता के लिए काम करेंगे। केजरीवाल सरकार ने अपने कार्यकाल में एक रुपए का कर्ज नहीं लिया। हम भी कर्ज नहीं लेंगे और जनता के लिए काम करेंगे।

चुनावों से पहले नेता जब नोमिनेशन करते हैं तो उनकी संपत्ति अगले चुनावों में बढ़ती जाती है परंतु आपकी घट क्यों गई?
मैंने पहले वर्ष 2012 में चुनाव लड़ा। कलाकारी से जो पैसा कमाया, वो उसमें बताया। उस पैसे को चुनाव प्रचार पर खर्च किया। फिर वर्ष 2014 में चुनाव लड़ा तो पहले से कमाई कम हो गई। इसी तरह से वर्ष 2017 और फिर साल 2019 में पैसा प्रचार पर लगता रहा और मेरी संपत्ति घट गई क्योंकि नेता बनने के बाद मैं कलाकारी से जुड़े काम नहीं कर सका। अब वर्ष 2022 में संपत्ति पहले से भी कम हो गई है। मैं पैसे का पीर नहीं हूं। जीत-जीत कर संपत्ति घटा ली।

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