Monday, Nov 29, 2021
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तीन चुनौतियां बेरोजगारी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व आर्थिक प्रगति की धीमी दर : सिसोदिया

  • Updated on 10/22/2021

नई दिल्ली। टीम डिजिटल। इस समय देश के सामने सबसे बड़ी तीन चुनौतियां हैं जिनसे निपटना सबसे बड़ी देशभक्ति होगी। ये चुनौतियां हैं बेरोजगारी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा न मिलना और आर्थिक प्रगति की धीमी दर। देश की इन चुनौतियों से निपटने का ख्वाब हर एक युवा को उसी तरह पालना चाहिए जैसे हमारे देशभक्तों ने देश को आजाद करवाने के लिए ख्वाब पाला ही नहीं बल्कि प्रत्येक चुनौतियों से भी निपटे थे। उक्त बातें उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (एनएसयूटी) में शहीद असफाकउल्लाह खान की 121वीं जयंती पर वल्र्ड क्लास स्किल सेंटर, शहीद असफाकउल्लाह खान फिटनेस पार्क, आर्ट स्टूडियो और 400 हाई परफोर्मिंग कंप्यूटर सेंटर के उद्घाटन के दौरान कहीं।
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असफाकउल्लाह खान ने 27 साल में दिया देश के लिए बलिदान
सिसोदिया ने कहा कि आज 21 साल की जिस उम्र में युवा अपने करियर के बारे में सोच रहे होते है उस उम्र में शहीद असफाकउल्लाह खान ने देश को अंग्रेजों से मुक्त करवाने को सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखा व आजादी के आंदोलन में शामिल हो गए और मात्र 27 साल की उम्र में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार देश में मौजूद इन चुनौतियों से निपटने के लिए देशभक्ति, हैप्पीनेस व एंटरप्रेन्योरशिप पाठ्यक्रमों की मदद से दिल्ली के सरकारी स्कूलों में देशभक्त बच्चे तैयार कर रही है। देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए केजरीवाल सरकार के ‘देश के मेंटर’ प्रोग्राम में भी युवा बढ़-चढ़ कर भाग ले रहे है। 1 सप्ताह के भीतर 12000 से अधिक युवा इस  मेंटरशिप कार्यक्रम का हिस्सा बने है। हर युवा दिल्ली के स्कूलों के 5 बच्चों को मेंटर करेगा। 
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बेंचमार्क तैयार करने की जरूरत
सिसोदिया ने कहा कि कुछ बच्चों को शानदार शिक्षा मिल रही है लेकिन बहुत से बच्चों को नहीं, इसलिए हमें एक न्यूनतम बेंचमार्क तैयार करने की जरूरत है। हमें सुनिश्चित करना है कि देश में शत-प्रतिशत बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन मिले। देश में बेरोजगारी चरर्मोत्कर्ष पर है पोस्ट ग्रेजुएट व पीएचडी धारक 10वीं पात्रता वाली नौकरियों के लिए आवेदन कर रहे हैं इस समस्या को दूर करना होगा। वहीं उन्होंने 40-50 साल से किताबों से पढाए जाने पर विरोध दर्ज करवाते हुए कहा कि भारत एक विकासशील देश है, हमें मिलकर ये परिभाषा बदलनी होगी।
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मिनटों में पहुंच रही है सूचनाएं
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव के आवश्यकताओं पर चर्चा करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि आज टेक्नोलॉजी तेजी के साथ बदल रही है। पहले जिन सूचनाओं को पहुंचने में 1-2 साल का समय लगता था अब वे सूचनाएं मिनटों में एक जगह से दूसरी जगह तक पहुँच जाती है। इसलिए हमें अपने शिक्षा संस्थानों में ऐसे पाठ्यक्रम तैयार करने की जरुरत है जो तेज़ी से बदलती दुनिया और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हो। सिसोदिया ने कहा कि ये बेहद जरुरी है कि स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद हमारे बच्चे एंटरप्रेन्योर माइंडसेट के साथ बाहर निकले और जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब प्रोवाइडर बनें।

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