Friday, Sep 25, 2020

Live Updates: Unlock 4- Day 25

Last Updated: Fri Sep 25 2020 08:59 AM

corona virus

Total Cases

5,816,103

Recovered

4,752,991

Deaths

92,371

  • INDIA7,843,243
  • MAHARASTRA1,282,963
  • ANDHRA PRADESH654,385
  • TAMIL NADU563,691
  • KARNATAKA548,557
  • UTTAR PRADESH374,277
  • ARUNACHAL PRADESH325,396
  • NEW DELHI260,623
  • WEST BENGAL237,869
  • ODISHA196,888
  • BIHAR180,788
  • TELANGANA179,246
  • ASSAM165,582
  • KERALA154,458
  • GUJARAT128,949
  • RAJASTHAN122,720
  • HARYANA118,554
  • MADHYA PRADESH113,057
  • PUNJAB103,464
  • CHHATTISGARH93,351
  • JHARKHAND75,089
  • CHANDIGARH70,777
  • JAMMU & KASHMIR67,510
  • UTTARAKHAND43,720
  • GOA29,879
  • PUDUCHERRY24,227
  • TRIPURA23,786
  • HIMACHAL PRADESH13,049
  • MANIPUR9,376
  • NAGALAND5,671
  • MEGHALAYA4,961
  • LADAKH3,933
  • ANDAMAN AND NICOBAR ISLANDS3,712
  • DADRA AND NAGAR HAVELI2,965
  • SIKKIM2,548
  • MIZORAM1,713
  • DAMAN AND DIU1,381
Central Helpline Number for CoronaVirus:+91-11-23978046 | Helpline Email Id: ncov2019 @gov.in, ncov219 @gmail.com
uniform civil code came into discussion after raising sc questions, know what are the provisions

SC के सवाल उठाने पर फिर चर्चा में आया यूनिफॉर्म सिविल कोड, जानें क्या हैं प्रावधान

  • Updated on 9/14/2019

नई दिल्ली/ प्रियंका शर्मा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गोवा में एक केस की सुनवाई के दौरान यूनिफॉर्म सिविल कोड या समान आचार संहिता के मुद्दे को एक बार फिर हवा दे दी है। सर्वोच्च अदालत ने यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने वाले गोवा का उदाहरण देते हुए सरकार को कहा, कि 63 साल बीतने के बाद भी इस पर कोई गंभीर विचार नहीं किया गया।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की पीठ ने गोवा के एक विवादित संपत्ति केस की सुनवाई के दौरान सामान नगरिक आचार संहिता का जिक्र किया। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 44 पर गंभीर न होने पर सरकार की असफलता बताई। कोर्ट ने कहा हिंदू लॉ को 1956 में बनाया गया, लेकिन इसके 63 साल बीत जाने के बाद भी पूरे देश में समान नागरिक अचार संहिता को लागू करने पर ध्यान नहीं दिया गया। 

देश में लगभग सभी मामलों को लेकर कानून है, लेकिन अभी भी शादी, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मुद्दों पर फैसला पर्सनल लॉ के अनुसार किया जाता है। ऐसे में तीन तलाक जैसे मुद्दे पर किया गया फैसला ऐतिहासिक है। बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पहले से ही यूनिफोर्म सिविल कोड के पक्ष में है और सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह से इसका जिक्र कर दिया है, इस मुद्दे के एक बार फिर चर्चा में आने की उम्मीद है। 


क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड

संविधान के भाग-4 में अनुच्छेद 44 में राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत में यूनिफॉर्म सिविल कोड की बात की गई है। संविधान कहता है कि सरकार इस बारे में विचार विमर्श करे, लेकिन सरकार इसके लिए बाध्य नहीं है। संविधान के अनुसार देश के लगभाग सभी मामलों में यूनिफॉर्म कानून लागू होता है, लेकिन शादी, तलाक और उत्ताराधिकार जैसे मुद्दों में पर्सनल लॉ के हिसाब से फैसला लिया जाता है।

भारत में गोवा एक ऐसा राज्य है जहां यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है। देखा जाए तो अधिकतर विकसित देशों में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है, लेकिन भारत में पिछले कई दशकों से ये मुद्दा बहस का विषय रहा है। 

कब- कब उठी यूनिफॉर्म सिविल कोड की मांग
सुप्रीम कोर्ट में, कई मुद्दों में सुनवाई के दौरान यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने की बात को उठाया गया। जैसे शाह बानो के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विवादित विचारधाराओं से अलग एक कॉमन सिविल कोड होने से राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा मिलेगा। वहीं एक और सरला मुद्गल केस में कोर्ट ने कहा था कि जब 80 फीसदी लोग को पर्सनल लॉ के दायरे में लाया गया है तो सभी नागरिकों के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड न बनाने की कोई बात नहीं रह जाती।

सभी के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ
हिंदू, मुस्लिम और ईसाई के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ है। जैसे मुस्लिम पर्सनल लॉ में 3 बार तलाक कहने से तलाक दिया जा सकता था जिसे अब कानूनी रूप से नकार दिया गया है। इसमें पहले नियम के तहत निकाह के वक्त मेहर की रकम तय की जाती है। तलाक के बाद मुस्लिम पुरुष तुरंत शादी कर सकता है लेकिन महिला को 4 महीने 10 दिन तक तक इंतजार करना होता है। वहीं हिंदू मैरिज ऐक्ट के तहत हिंदू जोड़े शादी के 12 महीने बाद तलाक की अर्जी आपसी सहमति से दाखिल कर सकते हैं। अगर पति को असाध्य रोग जैसे एड्स आदि हो या वह संबंध बनाने में अक्षम हो तो शादी के तुरंत बाद तलाक की अर्जी दाखिल की जा सकती है। जबकि क्रिश्चियन कपल शादी के 2 साल बाद तलाक की अर्जी दाखिल कर सकते हैं।

यूनिफॉर्म सिविल कोड पर सबके अलग-अलग विचार
यूनिफॉर्म सिविल कोड पर कई इसके लागू होने के समर्थन में है, तो कई इसका विरोध कर रहे हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि ये सभी धर्मों पर हिंदू कानून को लागू करने जैसा है। मुस्लिम समुदाय के लोग तीन तलाक की तरह इस पर भी कहते हैं कि वह अपने धार्मिक कानूनों के तहत ही मामले का निपटारा करेंगे। वहीं कई लोगों का मानना है कि समान नागरिक संहिता लागू होने से भारत में महिलाओं की स्थिति में सुधार आएगा। अभी कुछ धर्मों के पर्सनल लॉ में महिलाओं के अधिकार को बहुत सीमित रखा गया हैं। तो कई लोगों का कहना है कि कॉमन सिविल कोड से सभी के लिए कानून एक समान हो जाएगा। जिससे देश में एकता बढ़ेगी, और एकता बढ़ने से देश में तेजी से विकास होगा।

यूनिफॉर्म सिविल कोड जल्द हो सकता है लागू 

देश में जिस तरह से बदलाव हो रहे हैं उससे लगता है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड को जल्द लागू किया जा सकता है। तीन तलाक और अनुच्छेद-370 को हटाना हाल ही में मोदी सरकार द्वारा किया गये सबसे बड़े फैसले रहे है। हालांकि पहले से ही केंद्र सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड लाने की कोशिश कर चुकी है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसका जिक्र कर इस मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है अब इसपर जल्द फैसला हो सकता है। बाकि तीन तलाक और अनुच्छेद-370 की तरह यूनिफॉर्म सिविल कोड को भी विरोध और विवाद का सामना करना पड़ सकता है।

     

comments

.
.
.
.
.