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दशहरा से जुड़ीं अनसुनी बातें, इस पर्व पर करें खुद के अंदर छिपी बुराई का भी अंत

  • Updated on 10/8/2019

Navodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल। हमारा देश त्योहारों का देश है। यहां जितने भी त्योहार मनाये जाते हैं उनके पीछे कोई न कोई कहानी या रहस्य छिपे हुए हैं। इन त्योहरों में से एक त्योहार दशहरा भी है। इसे पूरे देश में बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है। सत्य पर असत्य की विजय के रूप में मनाया जाने वाला दशहरा कई रूपों में समृद्धिदायक त्योहार है। धर्मग्रंथों में अश्विन महीने के शुक्लपक्ष की दशमी के दिन अलग-अलग समय पर दो घटनाओं का जिक्र मिलता है, जिन्हें हम महिषासुर मर्दन और रावणवध के नाम से जानते हैं। 

दशहरा आज: कड़ी सुरक्षा में चूर होगा रावण का अहंकार

रामायण के मुताबिक पत्नी सीता को रावण के चंगुल से बचाने के लिए श्रीराम ने रावण का वध किया। इस तरह अधर्म पर धर्म की जीत हुई। इस कथा को तो बचपन से सुनते आ रहे हैं तो इसके बारे में तो पता ही होगा लेकिन क्या आपको पता है कि इस कहानी के अलावा दशहरे से जुड़ी कुछ और भी बातें हैं, जिससे ज्यादा लोग वाकिफ नही होंगे। दशहरे से कई रीत-रिवाज भी जुड़े हैं, जिसे पिछले कई सालों से लोग मानते आ रहे हैं। 

मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने जब रावण को मार दिया तो उनकी सेना प्रमाण के तौर पर लंका की राख अपने साथ ले आई। तभी से रावण के पुतले की अस्थियों को घर ले जाने का चलन शुरू हुआ। इसके अलावा मान्यता यह भी है कि धनपति कुबेर के द्वारा बनाई गई सोने की लंका की राख तिजोरियों में रखने से घर में कुबेर का वास होता है और घर में सुख समृधि बनी रहती है। इस कारण आज भी रावण के पुतले के जलने के बाद उसके अस्थि-अवशेष को घर लाना शुभ माना जाता है और इस से नकारात्मक शक्तियां घर में प्रवेश नहीं करती हैं। 

आज मारा जाएगा लंकेश, होगी 'असत्य पर सत्य’ की जीत

अश्विन के महिने में शुक्लपक्ष की दशमी को तारों के उदयकाल में मृत्यु पर भी विजयफल दिलाने वाला काल माना जाता है। सनातन संस्कृति मे बताया गया है कि दशहरा विजय और बहुत शुभता का प्रतीक,  बुराई पर अच्छाई और सत्य पर असत्य की जीत का त्योहार है। इसीलिए इस पर्व को विजयादशमी भी कहा गया है।

आपको बता दें कि दक्षिण भारत के द्रविड़ ब्राह्मणों में रावण के पुतले के दहन से पहले उसका पूजन करने की परंपरा है।  कहते हैं कि इस पृथ्वी पर रावण एक ऐसा अकेला प्रकांड विद्वान था जिसमे त्रिकाल दर्शन की क्षमता थी। रावण के ज्ञान और विद्वता की प्रसंशा श्रीराम ने भी की। यही वजह है कि द्रविड़ ब्राह्मणों में रावण पूजन की परंपरा को सबसे अच्छी मनी गई है। इतना ही नही कई जगह पर रावण दहन के दिन उपवास रखने की भी प्रथा है। 

दशहरे के दिन मनुष्य अपनी दस प्रकार की बुराइयों को छोड़ सकता है।  इनमें मत्सर, अहंकार, आलस्य, काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह, हिंसा और चोरी जैसी शामिल हैं। अगर आपके पास इनमें से कोई भी बुराई है, तो इस दशहरे में उस बुराइ को रावण के पुतले के साथ ही जला दीजिए। 

Navratri 2017: जानिए महानवमी के दिन क्यों किया जाता है मुख्य पूजन?

दशहरे के सर्वसिद्धि मुहूर्त में अपने पूरे वर्ष को खुशहाल बनाने के लिए लोग सदियों से उपाय करते रहे हैं।  इन उपायों में शमी वृक्ष की पूजा, घर में शमी का पेड़ लगाकर नियमित दीपदान करना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि दशहरे के दिन कुबेर ने राजा रघु को स्वर्ण मुद्रा देते हुए शमी की पत्तियों को सोने का बना दिया था, तभी से शमी को सोना देने वाला पेड़ माना जाता है। दशहरे के दिन नीलकंठ दर्शन को भी शुभ माना जाता है।

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