Monday, Nov 29, 2021
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कोयला संकट को लेकर केजरीवाल के बाद यूपी के सीएम योगी ने पीएम मोदी से लगाई गुहार

  • Updated on 10/10/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कोयला संकट को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बाद यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीएम नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है। इस संबंध में उन्होंने भी प्रधानमंत्री को खत लिखकर संकट से निकलने की गुहार लगाई है। बता दें कि कोयला संकट की कमी की वजह से देशभर में बिजली संयत्रों के बीच कोयला खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है।

खास बात यह है कि केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने संकट होने से इनकार किया है और केजरीवाल के खत पर सवाल उठाए हैं।  सीएम योगी ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर अतिरिक्त कोयला मांगा है। कोयला की कमी होने पर  प्रदेश में बिजली संकट गहराने से पहले ही आदित्यनाथ ने अधिकारियों को हाई अलर्ट पर कर दिया है। 

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लेकिन योगी के खत ने केंद्र की मोदी सरकार को धर्म संकट में डाल दिया है। इसकी वजह है कि यूपी में भाजपा की ही सरकार है। ऐसे में योगी सरकार के इस कदम को लेकर केंद्र क्या जबाब देगा। खबरें हैं कि योगी की केंद्रीय भाजपा नेतृत्व से नहीं बन रही हैं। इस वजह से भी योगी ने यह खत सियासत के तहत लिखा है। आज ही दिल्ली के डिप्टी सीएम ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। 

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आंखें मूंद लेने की केंद्र की नीति देश के लिए घातक होगी: सिसोदिया 
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रविवार को आरोप लगाया कि केंद्र यह स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि कोयला संकट है और हर समस्या के प्रति आंखें मूंद लेने की उसकी नीति देश के लिए घातक साबित हो सकती है। उनका बयान कोयला मंत्रालय के यह कहने के बाद आया है कि विद्युत उत्पादन संयंत्रों की मांग को पूरा करने के लिए देश में पर्याप्त मात्रा में कोयला उपलब्ध है। साथ ही, मंत्रालय ने बिजली आपूॢत में व्यवधान आने की आशंका को पूरी तरह से गुमराह करने वाला करार देते हुए खारिज कर दिया। 

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सिसोदिया ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘केंद्रीय मंत्री आर के सिंह ने आज कहा कि कोयला संकट नहीं है और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) को एक पत्र नहीं लिखना चाहिए था। यह दुखद है कि केंद्रीय कैबिनेट मंत्री ने इस तरह का गैर जिम्मेदाराना रुख अपनाया है।’’ आम आदमी पार्टी के नेता ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि केंद्र सरकार संकट से ‘‘दूर भागने’’ के लिए बहाने बना रही है। सिसोदिया ने आरोप लगाया कि जब राज्यों और चिकित्सकों ने कहा था कि कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी है, तब केंद्र ने स्वीकार नहीं किया था कि ऐसा कोई संकट है।  

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उप मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘उसने उस वक्त भी यही चीज किया था, जब देश ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहा था। उसने यह स्वीकार नहीं किया था कि ऐसा कोई संकट है। इसके बजाय वे राज्यों को गलत साबित करने की कोशिश करते हैं।’’ सिसोदिया ने कहा कि हर समस्या के प्रति आंखें मूंद लेने की केंद्र की आदत देश के लिए घातक साबित हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘कोयला संकट बिजली संकट पैदा कर सकता है, जो देश की प्रणाली को पूरी तरह से ठप कर सकता है। यह उद्योगों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है। ’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं हाथ जोड़ कर केंद्र सरकार से अनुरोध करता हूं कि कृपया संकट को स्वीकार कीजिए। केंद्र को सहयोग का व्यवहार प्रर्दिशत करना चाहिए और कोयला संकट का हल करना चाहिए।’’ 

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