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up-is-vote-bank-equation-of-mayawati-correct-in-second-phase-lok-sabha-elections

दूसरे चरण में सटीक बैठेगा मायावती का वोट बैंक समीकरण?

  • Updated on 4/15/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। लोकसभा चुनाव (Lok Sabha elections) के दूसरे चरण (Second phase) में 18 अप्रैल को होने वाले मतदान में उत्तर प्रदेश की आठ सीटों पर बीएसपी-एसपी-आरएलडी (BSP-SP-RLD) गठबंधन का, खासकर मायावती (Mayawati) का बहुत कुछ दांव पर है। इन आठ सीटों में से चार एससी (SC) के लिए आरक्षित हैं।

छह सीटों पर बसपा के उम्मीदवार मैदान में

2014 में बीजेपी ने इन सभी आठ सीटों को जीता, जिनमें नगीना (Nagina), अलीगढ़ (Aligarh), हाथरस (Hathras) और आगरा (Agra) शामिल थे। मायावती ने नगीना, बुलंदशहर (Bulandshahr) और आगरा सहित आठ सीटों में से छह पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस चरण की अधिकतर सीटों पर भाजपा और बसपा के बीच कड़ी टक्कर है। केवल हाथरस सीट पर सपा का उम्मीदवार है।

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सपा ने यहां रामजी लाल सुमन को उतारा है। इन आठ सीटों पर दलितों (Dalits), जाटों (Jat), गुर्जरों (Gujjar) और मुसलमानों (Muslim) की महत्वपूर्ण आबादी है। नगीना, अमरोहा, अलीगढ़ और आगरा में दलितों और मुस्लिमों की आबादी 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत के बीच है। बुलंदशहर, हाथरस, मथुरा और फतेहपुर में जाटों और गुर्जरों की आबादी भी अच्छी खासी है।

दलित-मुस्लिम एकजुटता पर हैं मायावती उम्मीदें

2014 के चुनाव की तरह इस बार साम्प्रदायिक माहौल नहीं है, लेकिन योगी आदित्यनाथ ने प्रचार के दौरान दंगे के मुद्दे को हवा देने की कोशिश जरूर की है। वहीं महागठबंधन भगवा फैक्टर को काटने के लिए दलित-मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने की कोशिश कर रहा है।

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कठिन प्रतिद्वंद्वी को देखते हुए भाजपा ने दो आरक्षित सीटों पर अपने प्रत्याशी इस बार बदल दिए हैं। चुनाव विशेषज्ञ कहते हैं कि इन आरक्षित सीटों पर गैर दलित वोटों का हस्तांतरण निर्णायक भूमिका निभाएगा। अधिक मुस्लिम आबादी वाले अमरोहा और अलीगढ़ सहित कुछ गैर-आरक्षित सीटों पर भाजपा और बसपा के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है।

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