Saturday, May 08, 2021
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यूपी विधान परिषद चुनाव: जांच में सही निकले सभी नामांकन पत्र, बसपा प्रत्याशी का जीतना तय

  • Updated on 4/17/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सभी 13 सीटों के लिए दायर किए गए नामांकन पत्रों की जांच पूरी हो गई है। सभी नामंकन पत्र सही पाए गए हैं। इसके साथ ही इन सभी सीटों पर निर्विरोध चुनाव तय हो गया है।     

विधान परिषद चुनाव के रिर्टिनंग अधिकारी अशोक कुमार चैबे के मुताबिक उच्च सदन की 13 सीटों के लिए इतने ही उम्मीदवारों ने पर्चा भरा है, जो जांच में सही पाए गए हैं। इसलिए सभी सीटों पर निर्विरोध चुनाव तय है। 

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हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा आगामी 19 अप्रैल को नाम वापसी की अवधि गुजरने के बाद होगी। दरअसल, विधान परिषद सदस्य और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और भाजपा सरकार के मंत्रियों महेंद्र सिंह और मोहसिन रजा समेत 13 सदस्यों का कार्यकाल आगामी 5 मई को खत्म हो रहा है। 

जो 13 सीटें खाली होंगी, उनमें 7 सपा की, 2-2 भाजपा और बसपा की और 1 राष्ट्रीय लोकदल की है। इनमें 1 सीट पूर्व मंत्री अम्बिका चैधरी की भी है, जो उनके सपा से बसपा में जाने के बाद खाली हुई थी।     

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सपा अध्यक्ष अखिलेश के अलावा पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र चैधरी, सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम, उमर अली खां, मधु गुप्ता, रामसकल गुर्जर और विजय यादव का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसके अलावा बसपा के विजय प्रताप और सुनील कुमार चित्तौड़ और रालोद के एकमात्र सदस्य चैधरी मुश्ताक का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है।

एक प्रत्याशी को विजय बनाने के लिए प्रथम वरीयता के 29 मतों की आवश्यकता होगी। प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों पर पिछले महीने हुए चुनाव में 9 सीटें जीतने वाली भाजपा प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में 324 विधायकों के दम पर कम से कम 11 सीटें आसानी से जीत सकती है। 

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भाजपा ने इनमें से 1 सीट अपनी सहयोगी पार्टी ‘अपना दल’ को दी है। भाजपा ने मंत्री महेंद्र सिंह और मोहसिन रजा के अलावा डा सरोजिनी अग्रवाल, बुक्कल नवाब, यशवंत सिंह, जयवीर सिंह, विद्यासागर सोनकर, विजय बहादुर पाठक, अशोक कटारिया और अशोक धवन को भी उम्मीदवार बनाया है। 

ग्यारहवीं सीट पर अपना दल (सोनेलाल) के आशीष सिंह पटेल ने नामांकन दाखिल किया है। सपा ने 1 सीट पर अपने प्रांतीय अध्यक्ष और मौजूदा विधान परिषद सदस्य नरेश उत्तम को प्रत्याशी बनाया है। दूसरी सीट पर बसपा के भीमराव अम्बेडकर मैदान में हैं। 

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सपा ने राज्यसभा चुनाव की तरह इस चुनाव में भी बसपा का साथ देने का एलान किया है और मौजूदा गणित के हिसाब से देखें तो राज्यसभा चुनाव में मायूस हुए अम्बेडकर का प्रदेश विधानमण्डल के उच्च सदन में पहुंचना तय है।

सपा के पास 47 विधायक हैं लेकिन उसके राष्ट्रीय महासचिव रहे नरेश अग्रवाल के भाजपा में चले जाने के बाद उनके विधायक पुत्र नितिन अग्रवाल ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा को वोट दिया था। वहीं सपा विधायक हरिओम यादव जेल में हैं।

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वह राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल सके थे। ऐसे में सपा के पास 45 वोट ही हैं। वह अपने दम पर एक प्रत्याशी को विधान परिषद पहुंचा सकती है। इसके बावजूद उसके पास 16 वोट बच जाएंगे। बसपा के पास 19 विधायक हैं, लेकिन विधायक मुख्तार अंसारी राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल सके थे। 

लिहाजा इस बार भी उनके वोट डालने की सम्भावना बहुत कम है। वहीं, बसपा विधायक अनिल सिंह ने भाजपा के पक्ष में वोटिंग की थी। उस लिहाज से देखें तो बसपा अपने 17 विधायकों पर ही भरोसा करेगी। सपा का साथ मिलने से बसपा प्रत्याशी की नैया आसानी से पार हो जाएगी।

यूपी की 100 सदस्यीय विधान परिषद में इस समय भाजपा के मात्र 13 मेंबर हैं। वहीं, सपा के 61, बसपा के 9, कांग्रेस के 2, राष्ट्रीय लोकदल का 1 और अन्य 12 सदस्य हैं। दो सीटें खाली हैं। 
 

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