Tuesday, Jun 22, 2021
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किसान आंदोलन को लेकर विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ को 7 सांसदों ने लिखी चिट्ठी, जताई चिंता

  • Updated on 12/25/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत के नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 30 दिनों से प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए सात प्रभावशाली अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ को पत्र लिखकर अपने भारतीय समकक्ष के साथ भारत में चल रहे किसानों के विरोध-प्रदर्शन (Farmers Protest) का मुद्दा उठाने का आग्रह किया है। 

इसमें समूह में भारतीय-अमेरिकी महिला सांसद प्रमिला जयपाल भी शामिल हैं। लेकिन भारत ने विदेशी नेताओं और राजनेताओं द्वारा किसानों के विरोध पर की गई टिप्पणियों को ''अनुचित" और ''अधूरी व गलत सूचना पर आधारित'' बताया है। साथ ही भारत ने यह भी कहा है कि यह मामला एक लोकतांत्रिक देश के आंतरिक मामलों से संबंधित है। 

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इस बारे में भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था कि "हमने कुछ अधूरी सूचनाओं पर आधारित टिप्पणियों को देखा, जो भारत में किसानों से जुड़ी हुई हैं। यह टिप्पणियां अनुचित हैं, साथ ही यह एक लोकतांत्रिक देश के आंतरिक मामलों से संबंधित हैं।"

किसानों के मामले में 23 दिसंबर को अमेरिकी सांसदों ने पोम्पियो को पत्र लिखा था। इस पत्र में कहा गया है कि ये मामला पंजाब से जुड़े सिख अमेरिकियों से भी जुड़ा हुआ है और यह अन्य राज्यों के भी भारतीय अमेरिकियों को प्रभावित कर रह रहा है।

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पत्र में अमेरिकी सांसदों ने लिखा, इससे कई भारतीय-अमेरिकी सीधे-सीधे प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि उनके परिवार के सदस्य और खेती की जमीन पंजाब में है। ये लोग भारत में अपने परिवार और अपने लोगों को लेकर चिंता में है। इन गंभीर हालात को देखते हुए, हम आपसे अपील करते हैं कि आप भारतीय विदेश मंत्री से बातचीत करें ताकि राजनीतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर अमेरिका की प्रतिबद्धता को पूरा किया जा सके। 

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पत्र में अमेरिकी सांसदों ने कहा है कि अमेरिका इस तरह के विरोध-प्रदर्शनों से अच्छी तरह परिचित रहा है और वो सामाजिक अव्यवस्था के मौजूदा दौर पर भारत को सलाह दे सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हम भारत सरकार के राष्ट्रीय नीति को लागू करने के अधिकार का सम्मान करते हैं। लेकिन हम भारत के लोगों और विदेश में रह रहे उन लोगों के अधिकारों का भी सम्मान करते हैं जो कृषि कानून के खिलाफ यहां और भारत में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। हम सम्मान करते हैं कि यह लोग इस नए कानून को अपनी आर्थिक सुरक्षा पर हमले की तरह देख रहे हैं। 

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