Friday, Jan 18, 2019

चमोली में ‘खेतों’ में निखर रहीं खेल प्रतिभाएं

  • Updated on 1/10/2019

गोपेश्वर/कर्णप्रयाग/ब्यूरो। भारत में खिलाड़ियों को प्रोत्सहित करने के लिए जहां विदेशी कोच से लेकर अंतर्राष्ट्रीय सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, वहीं चमोली जिले में खिलाड़ी अभ्यास के साथ खेतों में टूर्नामेंट खेलने को मजबूर हैं। खेलों को बढ़ावा देने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चमोली जिले में एकमात्र स्पोर्ट्स स्टेडियम जिला मुख्यालय पर है।

जिले ने जहां राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिए हैं। वहीं यहां नई प्रतिभाओं को निखारने के लिए सरकार के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। जिले में जोशीमठ, पीपलकोटी और पोखरी ब्लॉक मुख्यालयों पर वर्षों से खेल मैदान प्रस्तावित हैं। धनाभाव में इन खेल मैदानों का निर्माण नहीं हो पा रहा है। वहीं जिला मुख्यालय में मौजूद एकमात्र स्पोर्ट्स स्टेडियम गोपेश्वर का भी एक हिस्सा करीब एक दशक से क्षतिग्रस्त पड़ा हुआ है। ऐसे में यहां ब्लॉक स्तर पर शिक्षा विभाग या खेल महाकुंभ अभियान जैसी खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन खेतों में करवाया जा रहा है। 

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वहीं स्थानीय स्तर पर आयोजित होने वाले क्रिकेट टूर्नामेंट भी खेतों में फसल की कटाई के बाद आयोजित किये जाते हैं। स्थानीय निवासी रामपाल, पंकज शर्मा और संदीप कुमार का कहना है कि ब्लॉक स्तर पर खेल मैदानों की कमी के चलते जहां स्कूली खेलकूद प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिये छात्र-छात्राओं को मीलों की दूरी नापनी पड़ रही हैं। वहीं खेलों के अभ्यास के लिये कोई व्यवस्था नहीं है। 

चमोली जिले में पोखरी में मिनी स्पोर्ट्स स्टेडियम का निर्माण कार्य चल रहा है। जोशीमठ और पीपलकोटी में खेल मैदानों का निर्माण प्रस्तावित है। यदि जिले में 3 से 4 मिनी स्पोर्ट्स स्टेडियमों का निर्माण किया जाता है, तो खिलाड़ियों को सुगमता से खेलों की ट्रेनिंग दी जा सकेगी। 
गिरीश कुमार, जिला क्रीड़ा अधिकारी, चमोली। 

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