Thursday, Oct 28, 2021
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uttarakhand glacier burst 155 people feared dead 8 bodies recovered so far prshnt

Uttarakhand Glacier Burst: 155 लोगों के हताहत होने की आशंका, 203 लोग अभी भी लापता

  • Updated on 2/8/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली जिले (Chamoli district) में रविवार को प्राकृतिक आपदा से भारी तबाही मची। इस घटाना में अब तक अबतक 19 लोगों की मौत हुई है वहीं  छह लोग घायल हुए है जबकि 202 लोग लापता हैं। चमोली जनपद में ग्लेशियर फटने से ऋषिगंगा नदी में अचानक जबरदस्त सैलाब आने के कारण 2 पॉवर प्रोजैक्ट पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और वहां काम करने वाले लगभग 125 अधिक मजदूर लापता हैं।

Updates:-

  • आईटीबीपी, सेना, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की संयुक्त टीम ने चमोली में तपोवन सुरंग में प्रवेश किया है।
  • तपोवन टनल में भी लगातार राहत बचाव कार्य चल रहा है. अभी तक 100 मीटर तक टनल की सफाई हुई है, यहां करीब 37 लोगों के फंसे होने की खबर है।
  • कल चमोली में आई बाढ़ के मद्देनजर हालात का जायजा लेने के लिए केंद्रीय मंत्री आरके सिंह जोशीमठ पहुंचे। वहीं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि कुल 203 लोग अभी भी लापता हैं। बचाव अभियान जारी है।
  • कल चमोली में आई बाढ़ के मद्देनजर हालात का जायजा लेने के लिए केंद्रीय मंत्री आरके सिंह जोशीमठ पहुंचे। वहीं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि कुल 203 लोग अभी भी लापता हैं। बचाव अभियान जारी है।
  • दूसरे दिन बचाव अभियान में 12 लोगों को एक सुरंग से बचाया गया। लोगों को बचाने के लिए जेसीबी मशीनों की मदद से दूसरी सुरंग को साफ किया जा रहा है।

वे सैलाब में बह गए या मलबे में फंसे हुए हैं। यह अभी पुष्ट नहीं हुआ है। सेना, अद्र्धसैनिक बल और उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान शुरू कर दिया है। देर शाम तक 10 शव बरामद हुए थे। इस घटना के बाद हरिद्वार तक गंगा किनारे बसे सभी शहरों और गांवों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने घटनास्थल का दौरा किया और राहत एवं बचाव कार्य का निरीक्षण किया। 

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पावर प्रोजैक्ट में 36 मजदूर कर रहे थे काम
घटना रविवार की सुबह करीब साढ़े 9 बजे की है। सी.एम. त्रिवेन्द्र रावत ने बताया कि चमोली जिले में रेनी गांव से ऊपर उच्च हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने के कारण ऋषिगंगा नदी में अचानक जबरदस्त बाढ़ आ गई। घटना के समय इसी गांव के पास स्थित 13 मैगावाट के ऋषि गंगा पावर प्रोजैक्ट में 36 मजदूर काम कर रहे थे। यहां 4 पुलिसवालों की ड्यूटी भी लगी थी। पानी के तेज बहाव में सभी बह गए। 2 पुलिसवालों ने भागकर अपनी जान बचाई। 5 किलोमीटर नीचे धौलीगंगा के समीप एन.टी.पी.सी. का पावर प्रोजैक्ट बन रहा है। यहां लगभग 175 मजदूर काम कर रहे थे। ग्लेशियर फटने के कारण ऋषिगंगा नदी में पैदा हुआ सैलाब तबाही मचाता हुआ यहां तक आ पहुंचा। 35 से 40 के करीब मजदूर काम छोड़कर सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए। 

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अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश
शेष सैलाब की चपेट में आ गए। इस जगह पर 2 टनल निर्माणाधीन हैं। एक टनल में 15 और दूसरी में 35 मजदूर काम कर रहे थे। सभी सैलाब की चपेट में आ गए। चमोली जिला प्रशासन की सूचना पर आई.टी.बी.पी., एन.डी.आर.एफ., भारतीय वायु सेना, सेना और एस.डी.आर.एफ. की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं। टनल में जमा मलबे को खोद-खोद कर बाहर निकाला जा रहा है। सी.एम. ने बताया कि घटना में जान या माल के नुक्सान का पूरा आंकलन करना अभी कठिन है।

उत्तराखंड में बाढ़  के मद्देनजर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के संबंधित विभागों और अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए।  मुख्यमंत्री ने गंगा नदी के किनारे पड़ने वाले सभी जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को भी पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए। उधर गंगा नदी का जलस्तर बढऩे के बाद कानपुर में बैराज के गेट खोल दिए गए हैं।  लगभग  1 लाख क्यूसेक पानी के 10 दिन में कानपुर आने की सम्भावना है लेकिन इसमें बहुत ज्यादा परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।

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आईटीबीपी के जवानों ने सुरक्षित निकाले 16 मजदूर
गोपेश्वर : ऋषिकेश से 13-14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एन.टी.पी.सी. की निर्माणाधीन 480 मैगावाट तपोवन-विष्णुगाड पनबिजली परियोजना की बाढ़ से क्षतिग्रस्त एक सुरंग में फंसे सभी 16 मजदूरों को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। आई.टी.बी.पी. के जवान मजदूरों को बचाने के लिए लगभग 250 मीटर लंबी सुरंग में रस्सी के सहारे अंदर पहुंचे। तपोवन क्षेत्र में ही स्थित परियोजना की एक अन्य सुरंग में फंसे 30-35 मजदूरों को बाहर निकालने के लिए बचाव और राहत कार्य चलाया जा रहा है। इन्हें सेना की मदद से बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है। इस सुरंग में बाढ़ के साथ आया मलबा जमा हो गया है, जिसे मशीनों की मदद से हटाने का प्रयास किया जा रहा है।  

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मोदी, सोनिया व राहुल ने चिंता का इजहार किया 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में एक सभा में कहा कि वे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के साथ निरंतर सम्पर्क में है और स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हम मां गंगा के एक छोर पर हैं, लेकिन जो मां गंगा का उद्गम स्थल है, वो राज्य उत्तराखंड इस समय आपदा का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि वहां पर राहत और बचाव का कार्य चल रहा है और प्रभावित लोगों की मदद का हर प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जानमाल के नुकसान पर दुख जताया। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि राज्य सरकार सभी पीड़ितों को तुरंत सहायता मुहैया कराए और कांग्रेस कार्यकत्र्ता भी हाथ बटाएं।

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