Saturday, Jun 23, 2018

हाईकोर्ट के जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण पर रोक के फैसले को चुनौती देगी सरकार

  • Updated on 6/13/2018

देहरादून/ब्यूरो। उत्तराखंड के सभी जल विद्युत परियोजनाओं पर रोक संबंधी हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने की तैयारी चल रही है। फिलहाल शासन स्तर पर फैसले का परीक्षण कराया जा रहा है। नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य में बन रही सभी जल विद्युत परियोजनाओं पर रोक लगा दी है। 

कोर्ट ने सभी जिलों के डीएम को आदेश दिया है कि 8 हफ्तों में पॉवर प्रोजेक्ट्स को चिन्हित कर मलबा निस्तारण के लिए डम्पिंग जोन बनाएं। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सभी नदियों में 50 प्रतिशत पानी बहता रहना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई दिक्कत न हो। 

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नदियों के बहाव के सबसे उच्च क्षेत्र से 500 मीटर दायरे तक मिट्टी, पत्थर न डालने के आदेश जारी किए हैं। दो सदस्यीय खंडपीठ के इस फैसले से उत्तराखंड शासन में हड़कंप मचा हुआ है। जल विद्युत परियोजनाओं पर रोक का मतलब है कि कई हजार करोड़ रुपये के विकास कार्यों पर ब्रेक लग जाना। 

इस कारण शासन स्तर पर कोर्ट के फैसले का अध्ययन किया जा रहा है। अध्ययन के पश्चात इस फैसले को चुनौती दी जाएगी। या तो नैनीताल हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दी जाएगी या फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी। बहरहाल, इस संबंध में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि वह अदालत के फैसले का परीक्षण कर रहे हैं। इसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।

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हड़ताल नहीं करने की अपील
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने उत्तराखंड टैक्सी चालकों की प्रस्तावित हड़ताल को वापस लेने की मांग की है। उत्पल कुमार ने कहा कि यहां के टैक्सी चालक काफी समझदार हैं। वह जानते हैं कि यह पीक सीजन है। यदि इस सीजन में हड़ताल होती है, तो बाहर से आने वाले सैलानी प्रदेश की गलत छवि लेकर वापस जाएंगे।

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