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उत्तराखंडः अफसरों के Corona प्रभावित देशों के स्टडी टूर पर उठा सवाल

  • Updated on 3/20/2020

देहरादून/दीपक फरस्वाण। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएफएफए) के अधिकारियों ने एक के बाद एक चूक न की होती, तो उत्तराखंड (Uttarakhand) में अभी तक कोविड-19 वायरस नहीं पहुंचता। अकादमी ने उस वक्त प्रशिक्षु आईएफएस अफसरों को स्टडी टूर के लिए यूरोपीय देशों में भेजा, जब वहां कोरोना अपना प्रभाव दिखा चुका था। आईजीएफएफए की चूक से ही उत्तराखंड में कोविड-19 पहुंचा, यह बात दावे से इसलिए कही जा सकती है, क्योंकि प्रदेश में अभी तक सिर्फ तीन व्यक्ति ही कोविड-19 पॉजिटव मिले हैं। ये तीनों वहीं आईएफएस प्रशिक्षु हैं, जो हाल ही में यूरोपीय देशों के स्टडी टूर से लौटे हैं। इस मामले में केन्द्रीय वन मंत्रालय की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।

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 प्रशिक्षु आईएफएस 28 फरवरी को स्टडी टूर के लिए यूरोप गए थे। इनका दल स्पेन, एस्टोनिया, फिनलैंड और रूस आदि जगह गया था। कहा यह भी जा रहा है कि आईजीएफएफए ने इटली भ्रमण की अनुमति मांगी थी, जो वहां कोरोना के प्रकोप के चलते नहीं मिली। ये अधिकारी 11 मार्च को टूर पूरा कर दिल्ली लौटे। 13 मार्च को इनमें से पहले दो और फिर चार अधिकारियों में बुखार, जुकाम व कोल्ड के लक्षण मिले। उसके खून के नमूने हल्द्वानी मेडिकल कालेज भेजे गए।

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इन अधिकारियों को आईजीएफएफए भवन में ही आईसोलेशन वार्ड में रखा। अधिकृत लैब की जांच में पहले दो अधिकारियों के सैम्पल में से एक में कोविड-19 के लक्षणों मिले। 19 मार्च को इन्हीं अधिकारियों में से 2 अन्य में भी कोरोना पॉजिटव मिला। साफ है कि उत्तराखण्ड में कोरोना स्टडी टूर पर यूरोपीय देशों का भ्रमण कर लौटे प्रशिक्षु अधिकारियों से ही पहुंचा। हैरानी की बात है कि जब डब्लूएचओ यह एडवाइजरी जारी कर चुका था कि चीन के बाद यूरोपीय देश कोरोना के एपिक सेंटर बन रहे हैं, तो फिर आईजीएफएफए ने प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों को इन देशों में स्टडी टूर के लिए क्यों भेजा।

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दिल्ली एयरपोर्ट पर क्यों नहीं किया क्वारंटाइन

सवाल यह भी है कि विदेश से लौटते वक्त इन प्रशिक्षु आईएफएस दिल्ली एयरपोर्ट में ही क्वारंटाइन क्यों नहीं किया गया। हैरानी की बात यह है कि विदेश गये प्रशिक्षु अधिकारियों के दल में आईजीएफएफए के निदेशक ओंकार सिंह भी शामिल रहे। मौजूदा समय में उन्होंने क्वारंटाइन किया गया है।

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