Thursday, Feb 02, 2023
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उत्तराखंडः तीरथ मंत्रिपरिषद का गठन, मंत्रियों ने ली शपथ

  • Updated on 3/12/2021

देहरादून/ब्यूरो। दो दिन की मशक्कत के बाद मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने शुक्रवार को मंत्रिपरिषद की घोषणा कर दी है। इसमें आठ कैबिनेट मंत्री और तीन राज्य मंत्री बनाये गये हैं। तीरथ की कैबिनेट में निवर्तमान त्रिवेंद्र कैबिनेट के एक सदस्य को छोड़कर सभी को बरकरार रखा गया है। चार नये चेहरे भी शामिल किये गये हैं। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने राजभवन में सायं काल आयोजित समारोह में सभी मंत्रियों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलायी। कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय ने संस्कृत भाषा में शपथ ली, जबकि शेष सदस्यों ने शपथ ग्रहण के लिए हिंदी भाषा को चुना।

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तीरथ की मंत्रिपरिषद में जिन सदस्यों को शामिल किया गया है, उसमें कैबिनेट मंत्री के तौर पर पौड़ी जनपद के चौबट्टाखाल से विधायक सतपाल महाराज, नैनीताल के कालाढूंगी से विधायक बंशीधर भगत, पौड़ी के कोटद्वार से विधायक हरक सिंह, पिथौरागढ़ के डीडीहाट के बिशन सिंह चुफाल, ऊधमसिंह नगर के बाजपुर से विधायक यशपाल आर्य, उधम सिंह नगर के ही गदरपुर से विधायक अरविंद पांडेय, टिहरी के नरेन्द्र नगर से विधायक सुबोध उनियाल, देहरादून के मसूरी विधायक गणेश जोशी शामिल हैं।

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इसके अतिरिक्त पौड़ी के श्रीनगर विधायक धन सिंह रावत, अल्मोड़ा के सोमेश्वर की विधायक रेखा आर्य और हरिद्वार ग्रामीण क्षेत्र के विधायक यतीश्वरानंद को राज्यमंत्री बनाया गया है। मुख्यमंत्री समेत उत्तराखंड मंत्रिपरिषद में अधिकतम 12 सदस्य हो सकते हैं। शुक्रवार को शपथ ग्रहण समारोह के बाद मंत्रिपरिषद का कोटा पूरा हो गया है। तीरथ सिंह ने अपने मंत्रिमंडल में त्रिवेन्द्र सिंह रावत के आठ में से सात मंत्रियों को शामिल किया है। सिर्फ मदन कौशिक को संगठन में भेजे जाने के कारण उनके स्थान पर बंशीघर भगत को जगह दी गयी है।

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कांग्रेस से भाजपा में आए पिछली सरकार के सभी मंत्रियों को दोबारा मौका दिया गया है। धन सिंह रावत को मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना गया था लेकिन उन्हें राज्यमंत्री ही बनाया गया है। मंत्रिपरिषद में सात सदस्य गढ़वाल से और पांच सदस्य कुमाऊं से लिए गये हैं। चार ठाकुर, चार पंडित, एक ओबीसी और दो दलित श्रेणी के मंत्रियों को शामिल किया गया है। मदन कौशिक को संगठन में अध्यक्ष बनाकर मैदान और पहाड़ के समीकरण को भी साधने का प्रयास हुआ है। साथ ही यतीश्वरानंद को प्रतिनिधित्व देकर साधु संतों को साधने का प्रयास किया गया है।

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