Thursday, Apr 15, 2021
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शामली में हुई महापंचायत को प्रशासन ने नहीं दी अनुमति, 26 जनवरी की हिंसा का दिया हवाला

  • Updated on 2/5/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। उत्तरप्रदेश (Uttar pradesh) के शामली जिले में भैंसवाल गांव में चौधरी चरण सिंह की पार्टी रालोद (RLD) ने एक महापंचायत बुलाई है, इस महापंचायत को आसपास के किसानो का बड़ा समर्थन मिल रहा है। सरकार ने भी इस इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया है। वहीं दूसरी तरफ चौधरी चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी भी इस महापंचायत में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में कई किसान नेता महापंचायत में पहुंच चुके हैं और भाषण दे रहे हैं।  

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महापंचायत होने की नहीं दी इजाजत
इससे पहले सरकार ने इस महापंचायत को होने के लिए इजाजत नहीं दी थी। सरकार की तरफ से कहा गया है कि जिले में 4 फरवरी से मार्च तक धारा 144 लागू कर दी गई है। पुलिस ने साफ-साफ मना कर दिया है कि वह प्रदेश में ऐसी किसी भी पंचायत को होने की इजाजत नहीं दे रही है। उसके बाद भी यहां किसानों का सैलाब उमड़ पड़ा है और लोग लगातार आ रहे हैं। मंच पर किसानों के नेता संबोधन कर रहे हैं। 

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26 जनवरी को हुई थी हिंसा
शिवसेना सदस्य ने आरोप लगाया कि सरकार सवाल पूछने वाले को देशद्रोही बताने लगती है। उन्होंने कहा कि लोकसभा सदस्य शशि थरूर सहित कई लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है। राउत ने 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान लाल किले पर हुयी घटना और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का जिक्र करते कहा ‘वह दुखद घटना है। लेकिन इस मामले में असली आरोपियों को नहीं पकड़ा गया है और निर्दोष किसानों को गिरफ्तार कर लिया गया है।  

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बसपा ने किया विरोध
बसपा के सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि सरकार किसानों के आंदोलन को रोकने के लिए खाई खोद रही है और पानी, खाना, शौचालय जैसी सुविधाएं बंद कर रही है जो मानवाधिकार हनन है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों पर नए कृषि कानून नहीं थोप सकती। मिश्र ने कहा कि सरकार नए कानूनों को डेढ़ साल के लिए स्थगित करने की बात कर रही है। ऐसे में उसे अपनी जिद छोड़कर इन कानूनों को वापस ले लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि नए कानूनों में कई खामियां हैं जिनसे किसानों को भय है कि उनकी जमीन चली जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ठेकेदारी के नाम पर जमींदारी व्यवस्था को वापस लाना चाहती है।


 

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