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बिना प्रवक्ता के चल रहा राजकीय महाविद्यालय का विज्ञान संकाय

  • Updated on 8/10/2019

जेशीमठ/ब्यूरो। राजकीय महाविद्यालय जोशीमठ के विज्ञान संकाय को सात वर्ष पहले उच्च शिक्षा निदेशालय ने मान्यता दे दी थी। मान्यता के बाद भी महाविद्यालय में प्रवक्ताओं और संसाधनों की कमी है। इससे यहां पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य को लेकर सरकार और उच्च शिक्षा निदेशालय की संवेदनहीनता का अंदाजा लगाया जा सकता है। कई बार छात्रों ने इसके लिए आंदोलन भी किया। इसके बाद भी अब तक प्रवक्ताओं की तैनाती नहीं हुई।


स्थानीय लोगों और छात्रों की मांग पर उच्च शिक्षा निदेशालय ने वर्ष 2011-12 में महाविद्यालय को गणित, रसायन विज्ञान, जंतु विज्ञान, भौतिक विज्ञान और वनस्पति विज्ञान विषयों के साथ अस्थायी मान्यता प्रदान की थी। मान्यता मिलने के बाद य छात्र-छात्राओं ने विज्ञान संकाय में दखिला लिया, लेकिन लम्बे समय तक प्रवक्ताओं की तैनाती न होने से वर्ष 2013 में संकाय बंदी की कगार पर आ खड़ा हुआ। छात्र-छात्राओं की मांग पर निदेशालय ने वर्ष 2014 में तीन प्रवक्ताओं को तैनात किया।

इस पर छात्र-छात्राओं ने महाविद्याय में प्रवेश लिया। कुछ दिन बाद तीनों प्रवक्ताओं का पुनः स्थानांतरण कर दिया गया। ऐसे में अब महज एक वनस्पति विज्ञान के प्रवक्ता के भरोसे विज्ञान संकाय चलाया जा रहा है। यहां प्रयोगशाला सहायकों के चार पद भी रिक्त हैं। छात्र संघ अध्यक्ष कपिल कुंवर का कहना है कि महाविद्यालय के विज्ञान संकाय में प्रवक्ताओं की नियुक्ति व अन्य समस्याओं के निराकरण के लिए उच्च शिक्षा मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक ज्ञापन भेजे गए। लेकिन हालात नहीं सुधरे। 

महाविद्यालय में विज्ञान संकाय में प्रवक्ताओं की कमी है। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई है। निदेशालय ने लोकसेवा आयोग से महाविद्यालय में प्रवक्ताओं की नियुक्ति का आश्वासन दिया है। जल्द समस्या का समाधान होगा। 
-प्रो. एलबी अग्निहोत्री, प्राचार्य, महाविद्यालय जोशीमठ।

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