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पूर्व मुख्यमंत्रियों का किराया माफ करना गलत : हरीश रावत

  • Updated on 9/10/2019

देहरादून/ब्यूरो। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सरकार के उस निर्णय का विरोध की है जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी आवास के किराये को एक अध्यादेश के जरिए माफ किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे तो अब कोई भी निवर्तमान या भूतपूर्व मुख्यमंत्री सरकारी आवास खाली नहीं करेगा। अपने लिए सुविधाजनक सरकार आने का इंतजार करेगा। अच्छा होता, यदि सरकार इस मामले में सबके लिए एक सामान्य नियम बनाती।  

बताते चलें कि राज्य सरकार ने हाल ही में उत्तराखंड के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास के किराये की देनदारी से मुक्ति दे दी है। सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए पांच पूर्व मुख्यमंत्रियों पर बकाया करोड़ों रुपया मकान का किराया माफ कर दिया है, जिसे राज्यपाल की स्वीकृति भी मिल चुकी है। इस अध्यादेश के तहत पूर्व सीएम को मिलने वाली सभी सुविधाओं को 31 मार्च 2019 तक मान्य रखा गया है। इस अवधि तक के लिए पूर्व मुख्यमंत्रियों पर कोई देनदारी नहीं रहेगी। हालांकि, एक अप्रैल 2019 के बाद से उत्तराखंड के किसी भी मुख्यमंत्री को कोई सरकारी सुविधा भी नहीं मिलेगी।

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता हरीश रावत ने सरकार के इस निर्णय पर एतराज जताया है। अपनी फेसबुक वॉल पर हरीश ने पोस्ट किया है- ‘मैं, पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुविधा, किराया आदि के सवाल पर कुछ बोलना नहीं चाहता हूं। यदि आप एक सामान्य नियम बनायें, तो बात समझ में आती है। यदि आप आज कुछ भूतपूर्व मुख्यमंत्रियों का किराया आदि माफ कर देंगे, उनकी सुविधाओं को अनुमन्य मान लेंगे, तो भविष्य में जो भी यहां का निवर्तमान या भूतपूर्व मुख्यमंत्री होगा, वह सरकारी आवास नहीं छोड़ेगा और वह भी प्रतीक्षा करेगा कि कोई सुविधाजनक सरकार कभी आयेगी, तो मेरा भी किराया माफ कर देगी।’

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