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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, कील कांटे दुरुस्त करने में जुटे शासन के अफसर

  • Updated on 10/9/2019

देहरादून/ ब्यूरो: उत्तराखंड में निर्माणाधीन ऑल वेदर रोड का पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्परिणामों का अध्ययन करने के लिए एक टीम जल्द ही उत्तराखंड आने वाली है। यह टीम कोई गलत छवि लेकर ना लौटे इसके लिए उत्तराखंड शासन के अफसरों ने कागजी तौर पर खुद को मजबूत करने का प्रयास शुरू कर दिया है।

प्रदेश के बदरीनाथ-केदारनाथ-गंगोत्री और यमुनोत्री को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी चार धाम सड़क परियोजना को इस तरह बनाया जा रहा है ताकि उस पर सभी प्रकार के मौसम में सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन हो सके। इस परियोजना का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय सीमा को भी छूता है इस कारण सामरिक लिहाज से भी इसका बड़ा महत्व है।
 

लगभग 1200 करोड़ की लागत से बनने वाली इस सड़क का निर्माण कार्य इसी वर्ष पूरा होना था। परंतु सड़क निर्माण के लिए काटे जा रहे पेड़ों को लेकर इसमें अड़ंगा लग गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पर्यावरणविद रवि चोपड़ा की अध्यक्षता में ग्यारह सदस्यीय एक कमेटी गठित हुई है जो यह पता करेगी कि सड़क निर्माण के कारण पर्यावरण पर क्या दुष्प्रभाव पड़ा है और आगे इसके दुष्परिणाम क्या होंगे।

यानी यदि इस टीम की रिपोर्ट प्रदेश सरकार के प्रतिकूल गई तो चारधाम रोड परियोजना खटाई में पड़ सकती है। प्रदेश सरकार अच्छी तरह जानता है कि उत्तराखड के लिए इस सड़क का क्या महत्व है। सरकार को यह भी पता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस परियोजना को अपने ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल कर रखा है। इस कारण सरकार की ओर से लोक निर्माण विभाग को और वन एवं पर्यावरण विभाग को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अफसरों के साथ तालमेल बिठाकर काम करने को कहा गया है।

सरकार के आदेश पर लोक निर्माण विभाग और वन एव पर्यावरण विभाग ऐसे आंकड़े जुटाने में लगे हैं जिससे दिल्ली से आने वाली टीम को सार्थक रिपोर्ट बनाने में मदद मिल सके। इसके लिए फिलहाल सड़क चौड़ीकरण के क्रम में काटे गये हरे पेड़ का हिसाब लगाया जा रहा है। रोड निर्माण से जुड़ी एजेंसियों को स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि पहाड़ों की कटिंग से जमा हुए मलबे को उचित स्थान पर ही डंप करें। लोनिवि के उच्च पदस्थ अफसर ने बताया कि परियोजना का पूरा होना हर हाल में जरूरी है।

 

 

 

 
 
 
 
 
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