Wednesday, Apr 14, 2021
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Vaccination: मंत्रालय का दावा, भारत में कोरोना टीकाकरण सबसे तेज

  • Updated on 4/8/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि कोविड-19 रोधी टीकाकरण में अमरीका को पीछे छोड़ते हुए भारत दुनिया में सबसे तेज टीकाकरण (Vaccination) वाला देश बन गया है। भारत में रोजाना औसतन 30,93,861 खुराकें दी जा रही हैं। देश में अब तक कोविड-19 टीके की 8.70 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं। सुबह सात बजे तक की रिपोर्ट के मुताबिक कुल 13,32,130 सत्रों में टीके की 8,70,77,474 खुराकें दी जा चुकी हैं। देश में टीकाकरण अभियान के 81वें दिन (छह अप्रैल) को 33,37,601 लोगों को खुराकें दी गयी।

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महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 55,469 मामले सामने आए
देश में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है और बुधवार को अब के सर्वाधिक 1,15,736 नए मामले सामने आए। नए मामलों में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और केरल की भागीदारी 80.70 प्रतिशत थी। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 55,469 मामले सामने आए। वहीं छत्तीसगढ़ में 9,921 और कर्नाटक में 6150 मामले आए। उपचाराधीन मरीजों की संख्या भी 8,43,473 हो गयी है जो संक्रमण के कुल मामलों का 6.59 प्रतिशत है।   

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टीकाकरण के बाद युवाओं में ब्लड क्लोटिंग के मामले
टीकाकरण के बाद युवाओं में ब्लड क्लोटिंग के मामले सामने आने के बाद ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने अपनी कोविड-19 वैक्सीन का बच्चों पर ट्रायल रोक दिया है। यूनिवर्सिटी की ओर से फरवरी में ही 5 से 17 साल तक के बच्चों पर टीके का ट्रायल शुरू किया गया था। करीब 200 बच्चों पर यह परीक्षण किया गया। मगर अब यूनिवर्सिटी ने ट्रायल के लिए और बच्चों का पंजीकरण रोक दिया है।

वाल स्ट्रीट जरनल की रिपोर्ट के अनुसार यूनिवर्सिटी इस सबंध मेें ब्रिटेन की स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों की नियामक संस्था के रुख का इंतजार कर रही है। ब्रिटेन में करीब एक दर्जन लोगों की मौत टीका लगने के बाद ब्रेन क्लोट से हुई है। हालांकि नियामक संस्था के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि अभी तक वैक्सीन और ब्रेन क्लोट में कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है। 

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बुजुर्गों को घर-घर जाकर टीका लगाने पर केंद्र से जवाब मांगा
बंबई उच्च न्यायालय ने 75 साल से अधिक उम्र के नागरिकों और बिस्तर से नहीं उठ पाने वालों तथा व्हीलचेयर पर निर्भर लोगों को घर-घर जाकर टीका लगाने का अनुरोध करने वाली याचिका पर बुधवार को केंद्र का जवाब मांगा। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूॢत जी एस कुलकर्णी की पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा कि (कोविड-19) टीकाकरण के लिए निर्धारित पंजीकरण प्रक्रिया को क्या और आसान बनाया जा सकता है। पीठ अधिवक्ता ध्रुति कपाडिय़ा और कुणाल तिवारी की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिन्होंने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को 75 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों और बिस्तर से नहीं उठ पाने वालों या व्हीलचेयर पर निर्भर लोगों के लिए घर-घर जाकर टीकाकरण की सुविधा मुहैया करने का अनुरोध किया है। 

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पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता अद्वैत सेठना को याचिका पर जवाब देने का निर्देश दिया और कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दों के समाधान की जरूरत है। पीठ ने कहा कि हम इस मुद्दे पर सरकार की नीति में हस्तक्षेप करने का प्रयास नहीं कर रहे। हम बस ये देख रहे हैं कि क्या नीति में कुछ और सुधार हो सकता है। मुद्दा यह है कि प्रकिया लंबी नहीं, बल्कि और आसान होने चाहिए। न्यायमूर्ति कुलकर्णी ने कहा कि व्हीलचेयर पर निर्भर अपने पिता को वह टीकाकरण केंद्र पर नहीं ले जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसे और कई मामले हो सकते हैं जहां व्यक्ति बिस्तर से उठ ही नहीं पाता हो और वह नहीं जा पाए।  टीकाकरण केंद्रों में आईसीयू की सुविधा उपलब्ध कराने की जरूरत है ताकि टीका लगाने के बाद व्यक्ति पर नजर रखी जा सके। 

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