Tuesday, Jan 25, 2022
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वैक्सीन पर्याप्त फिर भी नहीं लग पाई एफएलडब्ल्यू को डोज, शासन सख्त 

  • Updated on 11/28/2021

नई दिल्ली/टीम डिजीटल। जिले को पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध कराने के बावजूद भी एफएलडब्ल्यू (फ्रंट लाइन वर्कर्स) का टीकाकरण नहीं होने पर शासन ने नाराजगी जताई है। इस संबंध में संबंधित विभाग से फ्रंट लाइन वर्कर्स का टीकाकरण नहीं होने पर कारण स्पष्ट करते हुए रिपोर्ट देने को कहा है। कोरोना से बचाव के लिए 16 जनवरी 2021 से टीकाकरण की शुरूआत हो चुकी है। इसमें सबसे पहले हेल्थ वर्कर्स को टीका लगाया गया।

इसके बाद फं्रट लाइन वर्कर्स पुलिस, एनडीआरएफ इसके अलावा फ्रंट लाइन वर्कर्स में शामिल होने वाले अन्य विभागीय कर्मचारी व अधिकारी को टीकाकरण अभियान में शामिल किया गया। इन लोगों को मिले लक्ष्य से अधिक टीकाकरण किया गया। इसके बाद निर्धारित समयांतराल पर इन्हें दूसरी डोज लगाई गई। लेकिन अभी भी कई फ्रंट लाइन वर्कर्स को दूसरी डोज नहीं लग पाई है। जिसे लेकर शासन स्तर से जल्द ही दूसरी डोज लगाने के निर्देश दिए गए है। साथ ही प्रशासन को भेजे गए पत्र में कहा कि प्रथम डोज से आच्छादित फ्रंट लाइन वर्कर्स के सापेक्ष लगभग 68 प्रतिशत फं्रट लाइन वर्कर्स को ही दूसरी डोज का टीका प्राप्त हुआ है।

शेष 32 प्रतिशत फं्रट लाइन वर्कर्स अभी भी कोविड-19 वैक्सीन की दूसरी खुराक से वंचित है। जिन जनपदों में शेष फ्रंट लाइन वर्कर्स का शत-प्रतिशत टीकाकरण पहली व दूसरी डोज कराने एवं अब तक टीकाकरण न कराए जाने का कारण स्पष्ट करते हुए फ्रंट लाइन वर्कर्स के नाम, पदनाम तथा कार्यस्थल की सूचना देने को कहा है। साथ ही शेष दूसरी डोज से वंचित समस्त फ्रंट लाइन वर्कर्स के शत-प्रतिशत टीकाकरण कराए जाने के निर्देश दिए गए है। 

85 फीसदी को लगी दूसरी डोज
जिले में फ्रंट लाइन वर्कर्स में 22579 लोग शामिल है। इसमें 31279 को पहली डोज लगाई जा चुकी है। जबकि 26800 को दूसरी डोज लग चुकी है। यानी 85.69 फीसदी को दोनों डोज लग चुकी है। वहीं, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नीरज अग्र्रवाल का कहना है कि पूर्व में दिए गए लक्ष्य के अनुसार पहली और दूसरी लग चुकी है। लेकिन इसमें ऐसे भी वर्कर्स शामिल थे, जिनकी बाहर ड्यूटी थी, उन्होंने भी आकर टीके लगवाए है। जिससे लक्ष्य से अधिक टीकाकरण हुआ है। अब उनकी दूसरी डोज भी लगाई जा रही है। इस संबंध में रिपोर्ट भी दी गई है। 

इन जिलों से नहीं मांगी रिपोर्ट 
फं्रट लाइन वर्कर्स को लेकर गाजियाबाद समेत अन्य कई जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है। जबकि  बहराइच, बाराबंकी, हरदोई, भदोही, श्रावस्ती, सोनभद्र, आजमगढ एवं गोरखपुर में फ्रंट लाइन वर्कर्स की कोई रिपोर्ट नहीं मांगी गई है। 
 

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