Thursday, Jun 01, 2023
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वक्फ बोर्ड से 123 विवादास्पद प्रॉपर्टी लेने पर VHP ने की मोदी सरकार की प्रशंसा

  • Updated on 2/21/2023

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने वक्फ बोर्ड की विवादित प्रॉपर्टी पर विशेष कमेटी के निर्णय और उस फैसले को मानने के लिए भारत सरकार की तारीफ की है। साथ ही कहा कि वीएचपी के प्रयास से अरबों रुपये की प्रॉपर्टी वक्फ बोर्ड के कब्जे में जाने से बच सकी है।

आलोक कुमार ने बताया कि 1910 के लगभग करीब सौ वर्ष पूर्व भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली लाया गया और नई राजधानी के लिए दिल्ली में काफी जमीन अधिग्रहित की गई। उन्होंने कहा कि 70 और 80 के दशक में दिल्ली वक्फ बोर्ड ने उन प्रॉपर्टी में से 123 प्रॉपर्टी को वक्फ बोर्ड की घो​षित किया।

इसमें सुनियोजित तरीके से खास स्थान रखे गए जिनमें कई प्रबुद्ध व देश के महत्वपूर्ण पदों के प्रमुखों के लॉन आदि में इसके लिए जगह तय की गई। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने वक्फ की इस घोषणा के विरोध में कोर्ट में 123 मुकदमे फाइल किये। वक्फ बोर्ड विभाग के तत्कालीन मंत्री, भारत सरकार ने निर्णय लिया और एक रुपये वार्षिक प्रति एकड़ की दर से जमीन वक्फ बोर्ड को सौंपी।

आलोक कुमार ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद ने इस फैसले का विरोध किया और कोर्ट का रुख किया। कोर्ट में वीएचपी को स्टे भी इस मामले में मिला। केस के दौरान आखिर में सरकार ने अपनी बात रखते हुए कहा कि इस मामले में नोटिफिकेशन को लागू नहीं करेंगे, बल्कि इस मामले पर दोबारा से विचार करने की बात भी कही।

आलोक कुमार ने आरोप लगाते हुए कहा कि मनमोहन सिंह की सरकार ने इस मुद्दे पर दोबारा विचार नहीं किया। लेकिन 2014 के चुनावों की घोषणा से ठीक पहले एक अधिसूचना की कि उक्त प्रॉपर्टी के अधिग्रहण को सरकार वापस ले रही है। वीएचपी ने इसको भी कोर्ट में चुनौती दी।

वीएचपी की चुनौती का सरकार कोर्ट में जवाब नहीं दे सकी। जिस पर सरकार ने कहा कि इस रिट पिटिशन को प्रस्तुतिकरण मानते हुए इस पर विचार और सुनवाई करेंगे और फिर दोबारा से फैसला करेंगेे। इसके बाद भारत सरकार ने जस्टिस एस.पी गर्ग की अध्यक्षता में कमेटी बनाई। कमेटी ने अपना पक्ष रखने के लिए वक्फ बोर्ड को बार-बार कहा। लेकिन न तो वक्फ बोर्ड उपस्थित हुआ और न उनकी तरफ से कोई ज्ञापन दिया और न दावा रखा।

लिहाजा दावे के समर्थन की तो बात ही नहीं पैदा होती। ऐसे में कमेटी ने निर्णय में साफ कहा कि वक्फ बोर्ड का दावा साबित नहीं हो सकता है। आलोक कुमार ने कहा कि वीएचपी को बेहद प्रसन्नता है कि आखिरकार भारत सरकार ने कमेटी की सिफारिशों को मान लिया और अरबों रुपये की 123 प्रॉपर्टी को वक्फ बोर्ड के कब्जे में आने से बचाने में वीएचपी कामयाब रही।

दूसरी ओर, दिल्ली वक्फ बोर्ड ने 123 वक्फ संपत्तियों को केंद्र द्वारा अपने कब्जे में लेने के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया है। बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान ने सोमवार को यह जानकारी दी। खान ने कहा कि 123 संपत्तियां लंबे समय से वक्फ बोर्ड के पास हैं और केंद्र उस पर ‘जबरन कब्जा'' करने की कोशिश में कानून और अदालतों को दरकिनार कर रहा है। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के भूमि और विकास कार्यालय ने हाल ही में मस्जिदों, दरगाह और कब्रिस्तान सहित दिल्ली वक्फ बोर्ड की 123 संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने का फैसला किया था।

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