Friday, Feb 03, 2023
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JNU में खूनी संघर्ष: नकाबपोश लोगों ने बहाया छात्रों और शिक्षकों का खून, जानें कब-कैसे-क्या हुआ

  • Updated on 1/6/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। फीस बढ़ने (Fee Hike) से लेकर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ लगातार हो रहे प्रदर्शनों के बीच रविवार शाम जेएनयू (JNU) जंग का मैदान बन गया। इस दौरान छात्रों के दोनों गुट लेफ्ट विंग और एबीवीपी ने एक दूसरे पर जानलेवा हमला कर दिया। इसमें दोनों ओर से एक दर्जन से अधिक छात्र घायल हो गए। 

घटना के बाद दोनों ही ओर से सोशल मीडिया पर वार शुरू हो गया और एक दूसरे के खिलाफ दोनों के समर्थक मारपीट के वीडियो डालने लगे। इन्हीं में से एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें करीब एक दर्जन से अधिक छात्र, जिन्होंने चेहरे ढक रखे हैं हाथों में चाकू, डंडे और रॉड लिए तोडफ़ोड़ करते दिख रहे हैं। इस वीडियो के बाद दोनों गुट उन नकाबपोशों को एक दूसरे का समर्थक बताने में जुटे हैं।

JNU Violence

जेएनयू परिसर किले में तब्दील
इधर, इस घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने पूरे परिसर को किले में तब्दील कर दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर खुद न्यू दिल्ली रेंज के ज्वाइंट सीपी आनंद मोहन दलबल के साथ मौके पर पहुंच गए। इसके साथ ही सुरक्षा के लिए डीसीपी साउथ वेस्ट के नेतृत्व में दक्षिणी पश्चिमी और दक्षिणी जिला के करीब दर्जन भर थानों की पुलिस टीम भी यूनिवर्सिटी परिसर में पहुंच गई। 

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नकाबपोश युवकों की पहचान में जुटी पुलिस
यह पुलिस टीम स्थिति को सामान्य बनाने के साथ ही उन नकाबपोश युवकों की पहचान करने में जुट गई है। इसके लिए जिला पुलिस ने आनन-फानन में एक टीम बनाई है, जो वायरल हो रहे नकाबपोशों के उस वीडियो की जांच करने में जुट गई है। उस वीडियो में गर्ल्स हॉस्टल की गैलरी में चारों ओर टूटे हुए शीशे, ईंट, पत्थर और टूटे हुए फर्नीचर के टुकड़े बिखरे हुए देखे जा सकते हैं। पहचान के लिए पुलिस टीम जेएनयू के छात्रों और प्रशासन के लोगों का भी सहारा ले रही है। देर रात तक पुलिस की ओर से शिकायत पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं किया गया था। 

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'जेएनयू प्रशासन और पुलिस बने मूकदर्शक'
जेएनयू अध्यापक संघ के अविनाश कुमार ने कहा कि संघ इस मामले की निंदा करता है। जिसमें जेएनयू प्रशासन और पुलिस मूकदर्शक बना रहा। नकाबपोश लोग हॉस्टल में घुस गए और छात्रों को पीटा। विवि में शांति बनाए रखने के लिए जेएनयू अध्यापक संघ ने एक बैठक बुलाई थी उस पर भी नकाबपोश लोगों ने डंडो और पत्थरों से हमला किया। एक प्रोफेसर को सिर में चोट आई है। कई प्रोफेसरों की कारों को निशाना बनाया गया। 

JNU अध्यापक संघ ने प्रशासन को बताया दोषी
जेएनयू अध्यापक संघ विवि में हो रही इस तरह की गतिविधियों के लिए सिर्फ प्रशासन को दोषी मानता है। फीस बढ़ोतरी से शुरू हुआ ये मामला अब तक खत्म नहीं हुआ। छात्र 70 दिनों से हड़ताल पर हैं। वीसी ने इसका कोई समाधान नहीं निकाला है। बताया गया कि शिक्षक अमित थोराट नकाबपोश लड़कों की विडीयो बना रहे थे, तो लड़कों ने उनको पकड़ लिया और उनकी वीडियो डिलीट कराई। अमित किसी तरह से वहां से बचकर निकले।

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3 जनवरी से सुलग रहा था विवाद: जेएनयू प्रशासन
जेएनयू में हुई हिंसा पर जेएनयू प्रशासन ने मध्य रात्रि बयान जारी कर कहा कि जेएनयू में ये माहौल 3 जनवरी से परिसर में बन रहा था, जब शीतकालीन सत्र के लिए चल रही पंजीकरण प्रक्रिया का विरोध करने वाले छात्र नकाब पहनकर सीआईएस परिसर में घुसे और बलपूर्वक टेक्निकल स्टाफ को वहां से हटाकर इंटरनेट सर्वर को बंद कर दिया, जिससे पंजीकरण प्रक्रिया रुक गई। 3 जनवरी को इस बारे में पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी।

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4 जनवरी को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया बहाल
4 जनवरी की सीआईएस के टेक्निकल स्टाफ ने पुन: पंजीकरण प्रक्रिया बहाल कर दी, जिसमें हजारों छात्रों ने नए छात्रावास नियमों के मुताबिक फीस भरकर पंजीकरण कराया। 4 जनवरी को दिन में 1 बजे करीब रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का विरोध कर रहे छात्रों का समूह गलत इरादे से एक बार फिर एसआईएस में घुस आया। 

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विरोध कर रहे छात्रों ने पॉवर सप्लाई और ऑप्टिकल केबल तोड़ी
उन्होंने पॉवर सप्लाई और ऑप्टिकल केबल तोड़ दी, जिससे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया फिर रुक गई। 4 को भी पुलिस कंप्लेंट दर्ज कराई गई। प्रशासन ने कहा कि ये प्रदर्शनकारी छात्र विवि में पिछले कुछ हफ्तों से कुछ स्कूलों की बिल्डिंग्स को भी बंद कर चुके हैं। 

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रविवार शाम 4:30 बजे भिड़े छात्र
रविवार को जब शीतकालीन सत्र के लिए पंजीकृत हो चुके छात्रों ने इन स्कूल बिंल्डिगों में प्रवेश करना चाहा तो प्रदर्शनकारी छात्रों ने इन्हें शारीरिक रूप से क्षति पहुंचाई। रविवार शाम 4:30 बजे जो छात्र रजिस्ट्रेशन के खिलाफ थे, उनका एक ग्रुप प्रशासनिक भवन के सामने से निकला। इसकी सूचना पुलिस को दी गई, लेकिन संघर्ष शुरू हो गया।

 

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