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विश्वकर्मा पूजा: जानिएं क्या है पूजा का महत्व, विधि और शुभ मुहूर्त

  • Updated on 9/17/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को विश्वकर्मा पूजा मनाई जाती है। विश्वकर्मा पूजा, भगवान विश्वकर्मा (Lord Vishwakarma) के जन्म दिवस के अवसर पर मनाया जाता है। इस साल विश्वकर्मा पूजा 16 दिसंबर बुधवार को मनाई जाएगी। जिसे विश्वकर्मा डे भी कहा जाता है। इस कंपनी और कारखानों में ऋषि विश्वकर्मा के साथ ही औजारों, मशीनों और अस्त्र-शस्त्रों की भी पूजा की जाती है।

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सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी का सातवां धर्मपुत्र हैं भगवान विश्वकर्मा
माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने कई शिलाओं और नगरों का निर्माण किया था। जिसमें इंद्र नगरी, यमपुरी, वरुण पूरी, पांडव पूरी, कुबेर पूरी, शिव मंडल पूरी और सुदामापुरी शामिल है। मान्यताओं के अनुसार विश्वकर्मा जी ने ही भगवान विष्णु के लिए सुदर्शन चक्र और भगवान शिव के लिए त्रिशूल बनाया था। इन्हें सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी का सातवां धर्मपुत्र भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं (Mythological Facts) के मुताबिक जो भी इस दिन सच्चे मन से इनकी पूजा करता है उन्हें इसका विशेष लाभ मिलता है साथ ही जिनके कारोबार हैं उनमें बढ़ोतरी होती है और धन-धान्य का अधिक लाभ होता है।

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इसलिए मनाते है विश्वकर्मा पूजा
पैराणिक कथाओं के अनुसार जब विश्वकर्मा की उत्पत्ति हुई थी तो उन्होंने बड़े-बड़े चीजों का निर्माण किया था। इतना ही नहीं जब दानवों और दैत्यों ने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया था तो भगवान विश्वकर्मा ने महर्षि दधीची की हड्डियों से वज्र की उत्पत्ति की थी जिसके बाद जब देवराज इंद्र (Devraj Indra) और दानवों के बीच युद्ध हुआ तो देवराज की विजय हुई।
मान्यता के अनुसार अगर कोई अपना नया कारोबार या काम शुरू कर रहा हो तो उसे पहले विश्वकर्मा की पूजा करना चाहिए। इससे आर्थिक संकट (Economical Conditions) दूर हो जाते हैं साथ ही कारोबार (Trade) में धन की वृद्धि भी होती है।

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पूजा मुहूर्त
16 सितंबर के दिन सुबह 06 बजकर 53 मिनट पर कन्या संक्रांति का क्षण है, इस समय सूर्य देव कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। कन्या संक्रांति के साथ ही विश्वकर्मा पूजा का मुहूर्त है। विश्वकर्मा पूजा के दिन राहुकाल दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से 01 बजकर 53 मिनट तक है। इस समय काल में पूजा न करें।
 

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