Saturday, Mar 23, 2019

70 साल की प्रतीक्षा के बाद युद्ध स्मारक 

  • Updated on 2/25/2019

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद जिन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक बनाने का काम सिरे चढ़ाया। देश के शहीदों को स्वतंत्र भारत में, भारतीयों द्वारा निर्मित भव्य स्मारक 25 फरवरी को राष्ट्र को समर्पित हो रहा है। यह गौरव का विषय तो है ही, साथ ही साथ विडम्बना भी है कि जिस देश ने पांच युद्ध लड़े और 1947 के तुरन्त बाद से पाकिस्तान और चीन के धोखे से किए गए  हमलों तथा उनके द्वारा जम्मू-कश्मीर की 1.25 लाख वर्ग किलोमीटर भूमि हड़पने, 1971 का युद्ध जीत पाकिस्तान की इस्लामी फौज को समर्पण के लिए बाध्य करने व कारगिल युद्ध जीतने के बाद भी देश के बलिदानी सैनिकों की याद में कोई राष्ट्रीय स्तर का स्मारक देश की राजधानी में नहीं बना।

अगर देश के हर शहर में, दिल्ली के हर कोने में, सड़कों, अस्पतालों, चौराहों के नाम रखे गए तो वे सब एक परिवार, खानदान, वंश को समॢपत हुए।  प्रथम परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा,  नेफा (अब अरुणाचल) की रक्षा में चमत्कारिक वीरता दिखाने वाले राइफल मैन जसवंत सिंह रावत, चुशूल के वीर मेजर शैतान सिंह से लेकर कश्मीर में चल रहे छद्म पाकिस्तानी युद्ध में शहीद मेजर चित्रेश सिंह बिष्ट, मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल और चालीस सी.आर.पी.एफ. के जवानों तक एक लम्बी सूची है शहीदों की। कांग्रेस ने सुभाष बोस को भुलाया, पटेल को भुलाया, शास्त्री जी गायब हुए, जगजीवन राम हटाए। ये तो कांग्रेस के थे, अगर श्यामा प्रसाद मुखर्जी, लोहिया या करियप्पा, मानेक शॉ को अपमानित किया, भुलाया, उनकी अंतिम यादों तक में कांग्रेसी शामिल नहीं हुए तो समझ में आता है कि वे नेहरू के प्रिय नहीं थे पर जिनका जीवन देश के लिए बलिदान हुआ उनका स्मारक तक न बनाना यह अक्षम्य अपराध, अक्षम्य पाप है। 

पहला युद्ध स्मारक तो 1947 के युद्ध या 1962 के तुरन्त बाद बनना चाहिए था। सेना ने शौर्य दिखाया था नेता हारे थे। राजाओं-महाराजाओं का समय भी देखा है, पर उनका भी ऐसा शासन व्यवहार नहीं रहा। पहली बार अटल जी के समय शहीद सैनिकों के पाॢथव शरीर उनके घर, उनके परिजनों तक पहुंचाने प्रारंभ हुए अन्यथा परिजन अपने बेटे, पिता, पति के अंतिम दर्शन तक के लिए तरस जाते थे। पर इन्होंने उसका बदला, देश के सर्वश्रेष्ठ रक्षामंत्री जार्ज फर्नांडीज पर ताबूत घोटाले का झूठा आरोप लगाकर दिया। 

झूठ बोलना इनकी फितरत में शामिल है। जार्ज फर्नांडीस 21 बार सियाचिन गए। सियाचिन में स्नो-स्कूटर दिलवाए, बेस कैंप में पहली बार सी.टी. स्कैन मशीनें लगवाईं पर जो देश का हुआ, सेना और सैनिकों  का हुआ, उन पर इन झूठ के पैरोकारों और सेना विरोधी भ्रष्ट मीडिया ने फ्लाइंग कॉफिन्स यानी उड़ते ताबूत जैसे घृणित आरोप लगाए। ये भला सेना के रणबांकुरों, शहीदों का स्मारक क्यों बनवाते।

युद्ध स्मारक राष्ट्रीय तीर्थ है-वीरता, शौर्य और बलिदान का तीर्थ, जिसका मन देश में रमा हो, वही इनको पुष्प चढ़ा सकता है। माखन लाल चतुर्वेदी ने लिखा-मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर देना तुम फैंक। मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ जाएं वीर अनेक। नरेन्द्र मोदी ने आज सेना और समाज का दिल जीत लिया।

-तरुण विजय

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