Tuesday, Dec 06, 2022
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War of words intensifies between Sachin Pilot and Ashok Gehlot

सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच जुबानी जंग तेज

  • Updated on 11/24/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस नेता सचिन पायलट को ‘गद्दार' करार देते हुए कहा कि उन्होंने 2020 में पार्टी के खिलाफ बगावत की थी और गहलोत नीत सरकार गिराने की कोशिश की थी इसलिए उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया जा सकता। पूर्व उप मुख्यमंत्री पायलट ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गहलोत जैसे कद वाले किसी नेता के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि इस तरह कीचड़ उछालने से कुछ हासिल नहीं होगा और कांग्रेस में सभी की जिम्मेदारी राजस्थान में फिर से पार्टी की सरकार लाने के लिए संगठन को मजबूत करने की है। मध्य प्रदेश में भारत जोड़ो यात्रा में बृहस्पतिवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा के साथ पैदल चलने वाले पायलट ने कहा कि वह कभी इस तरह की भाषा का उपयोग नहीं करते।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को गुजरात में विधानसभा चुनाव पर ध्यान देना चाहिए जहां वह पार्टी के वरिष्ठ पर्यवेक्षक हैं। इस वाक् युद्ध से राजस्थान में कांग्रेस पार्टी में आंतरिक कलह और बढ़ती नजर आ रही है जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा भी कुछ दिन में राजस्थान में आने वाली है। इस बयानबाजी पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने कहा कि पायलट के साथ गहलोत के मतभेदों को इस तरह सुलझाया जाएगा कि पार्टी मजबूत हो। कांग्रेस ने यह भी कहा कि इस समय ध्यान भारत जोड़ो यात्रा की सफलता पर होना चाहिए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने एक बयान में कहा, ‘‘अशोक गहलोत वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं।

उन्होंने अपने कनिष्ठ सहयोगी सचिन पायलट के साथ जो मतभेद जाहिर किये हैं, उन्हें इस तरह से सुलझाया जाएगा कि कांग्रेस पार्टी मजबूत हो।'' उन्होंने यह भी कहा, ‘‘इस समय प्रत्येक कांग्रेस कार्यकर्ता की जिम्मेदारी पहले ही व्यापक रूप से सफल भारत जोड़ो यात्रा को उत्तर भारत के राज्यों में और अधिक प्रभावशाली बनाने की है।'' पायलट ने कहा, ‘‘नाम लेकर कीचड़ उछालने और आरोप लगाने से कुछ हासिल नहीं होगा।'' उन्होंने कहा कि यह भाजपा को हराने के लिए उसके खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का तथा राहुल गांधी के हाथ मजबूत करने का समय है। उन्होंने कहा, ‘‘इतने अनुभव वाले किसी व्यक्ति के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना, ऐसे पूरी तरह झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाना शोभा नहीं देता। जब हमें मिलकर लड़ना है तो इस सबसे कुछ हासिल नहीं होगा। पहले भी अशोक गहलोत जी लंबे समय तक मेरे खिलाफ इस तरह के आरोप लगाते रहे हैं।''

गहलोत ने यह आरोप भी लगाया कि जब पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस के कुछ विधायक गुरुग्राम के एक रिसॉर्ट में एक महीने से अधिक समय तक रहे थे, तब इस बगावत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका थी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अक्सर उनसे मिलने जाते थे। राजस्थान के मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनके पास इस बात का सबूत है कि पायलट समेत प्रत्येक विधायक को 10-10 करोड़ रुपये दिये गये थे। उन्होंने कहा कि पार्टी आलाकमान को यदि लगता है तो 102 विधायकों में से पायलट को छोड़कर किसी को भी उनकी जगह मुख्यमंत्री बना सकता है। गहलोत ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, ‘‘विधायक कभी उसे स्वीकार नहीं करेंगे जिसने बगावत की हो और जिसे गद्दार कहा गया हो। वह मुख्यमंत्री कैसे बन सकता है? विधायक ऐसे आदमी को मुख्यमंत्री कैसे स्वीकार करेंगे। मेरे पास सबूत है कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार गिराने के लिए गुरुग्राम के रिसॉर्ट में ठहरे विधायकों को 10-10 करोड़ रुपये दिये गये थे।''

उन्होंने कहा कि ऐसा उदाहरण कहीं देखने को नहीं मिलेगा जहां प्रदेश में पार्टी का अध्यक्ष वहां की सरकार को गिराने की कोशिश कर रहा हो और जिसे प्रदेश अध्यक्ष तथा उप मुख्यमंत्री दोनों पद गंवाने पड़े हों। ये बयान ऐसे समय में भी आये हैं जब गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अपने चरम पर है और गहलोत राज्य में पार्टी के वरिष्ठ पर्यवेक्षक हैं। राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया ने इन आरोपों का खंडन किया कि 2020 में कांग्रेस विधायकों को दल बदल के लिए पैसे देने में भाजपा शामिल थी। पायलट ने भी पैसों के लेनदेन के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये इल्जाम झूठे और बेबुनियाद हैं।

गहलोत ने कहा कि अगर पायलट विधायकों से माफी मांगते और उन्हें मना लेते तो स्थिति अलग होती। गहलोत के करीबी 90 से अधिक पार्टी विधायकों द्वारा राजस्थान में कांग्रेस विधायक दल की बैठक नहीं होने देने के बाद पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से अपने माफी मांगने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘उन्होंने (पायलट ने) आज तक माफी नहीं मांगी है। अगर उन्होंने माफी मांगी होती तो मुझे माफी नहीं मांगनी पड़ती।'' जब गहलोत से पूछा गया कि क्या आलाकमान पायलट को उनकी जगह मुख्यमंत्री बनाने का फैसला कर सकता है तो उन्होंने कहा कि यह तो कल्पना आधारित सवाल है। उन्होंने यह भी कहा, ‘‘लेकिन यह कैसे होगा? यह नहीं हो सकता।''

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस विधायक दल की बैठक नहीं होने देने के बाद पार्टी विधायकों की पिछले दिनों हुई बैठक विद्रोह नहीं थी बल्कि पायलट के खिलाफ बगावत थी जिन्होंने उनकी सरकार को गिराने की कोशिश की। राजस्थान में 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर गहलोत और पायलट के बीच गतिरोध रहा है। गहलोत का कहना है कि पायलट की 2020 में की गयी बगावत को भुलाया नहीं जा सकता और उन्हें अधिकतर कांग्रेस विधायकों का समर्थन नहीं है, वहीं पायलट खेमा दावा कर रहा है कि विधायक नेतृत्व परिवर्तन चाहते हैं। गहलोत ने कहा कि विधायक चाहते हैं कि पायलट कम से कम पार्टी आलाकमान से और राजस्थान की जनता से माफी मांग लें। उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस आलाकमान राजस्थान के साथ न्याय करेगा। 

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