Thursday, May 13, 2021
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चीनी कम्पनियों को उत्तराखंड से बाहर रखने का रास्ता साफ

  • Updated on 12/9/2020

देहरादून/ब्यूरो। उत्तराखंड में राज्य सरकार के अधीन होने वाले विकास और निर्माण कार्यों में अब ऐसे किसी भी देश की कम्पनी भाग नहीं ले सकेगी जिसकी सीमा भारत की सीमा से सटी हुई है। सरकार के इस फैसले से निर्माण के क्षेत्र से चीनी कम्पनी को दूर रखना संभव हो सकेगा।

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राज्य सरकार ने वर्ष 2016 में उत्तराखंड अधिप्राप्ति (प्रिक्योरमेंट) अधिनियम बनाया था। वर्ष 2017 में इसकी नियमावली को राज्यपाल ने मंजूरी दी। इस नियमाली को उन सभी सेवा और निर्माण कार्यों में लागू किया गया जो राज्य सरकार के नियंत्रण में है। इसी वर्ष लद्दाख में चीन की सीमा पर हुए विवाद के बाद केन्द्र सरकार ने अपने प्रावधानों में संशोधन करते हुए उन सभी देशों को ग्लोबल टेंडर में भाग लेने से अपात्र घोषित कर दिया जिसकी सीमा भारत की सीमा से लगती है।

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बुधवार को उत्तराखंड की प्रदेश मंत्रिमंडल ने भी स्थानीय प्रिक्योरमेंट नियमावली में संशोधन करते हुए केन्द्र सरकार द्वारा किये गये नये प्रावधानों को हू-ब-हू लागू कर दिया। इसका मतलब यह है कि उत्तराखंड में सेवा या निर्माण में काम करे के  लिए जारी होने वाले ग्लोबल टेंडर में पडो़सी मुल्क खासकर चीन की कम्पनियां भाग नहीं ले सकेंगी। दरअसल, सूत्रों की मानें तो नियमावली में संशोधन ही चीन को ध्यान में रखकर किया गया है। नियमावली में एक अन्य संशोधन के तहत निर्माण एजेंसी के लिए यह आवश्यक कर दिया गया है कि वह पांच लाख तक की खरीददारी स्थानीय स्वयं सहायता समूहों से करेगी। यदि आवश्यक उत्पाद स्वयं सहायता समूह के पास उपलब्ध नहीं है तो तभी कोई दूसरा विकल्प चुना जा सकता है।

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