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हमने कांग्रेस की तुलना में दोगुनी खरीद की- MSP था, है और रहेगा: अनुराग ठाकुर

  • Updated on 1/4/2021

नई दिल्ली/ अकु श्रीवास्तव। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार और संगठन में यूं तो बहुत सारे ऐसे नेता हैं, जो युवा होते ही अपना प्रभाव छोड़ना शुरू कर देते हैं और धीरे-धीरे राज्य की राजनीति के साथ और आगे बढ़ते चले जाते हैं। लेकिन कुछ ही ऐसे नेता हैं, जिन्होंने संगठन में भी बहुत अच्छा काम किया। पार्टी को भी अपने दौर में मजबूत करने का काम किया। सरकार का हिस्सा बने हैं तो वहां भी अलग प्रभाव छोड़ रहे हैं। क्षेत्र में भी लोकप्रिय हैं और सांसदों के बीच भी नई-नई चीजें करते रहते हैं। गुलदस्तों के बजाय किताबें लेना पसंद करते हैं। अपने काम और काबिलियत से सबके दिलों में अपने लिए जगह बना लेने की कला बिरलों में ही होती है। ऐसा ही एक चेहरा हैं अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur)।

भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर दो कार्यकाल पूरे किए और अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Govt) में वित्त राज्यमंत्री का दायित्व संभाल रहे हैं। किसान आंदोलन से लेकर मौजूदा सियासी हालात और देश की आर्थिक स्थिति पर रविवार को नवोदय टाइम्स/पंजाब केसरी के लिए अकु श्रीवास्तव ने अनुराग ठाकुर से बात की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश...

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किसानों के साथ आखिरी दौर की बातचीत सन्निकट है। कहां मामला फंस रहा है?
मोदी सरकार किसान हितैषी है। सत्ता में आने के बाद से किसान कल्याण के कई अहम कदम उठाए हैं। अगर आप देखें तो कांग्रेस ने एमएसपी पर खरीद के लिए पांच साल में 3.75 लाख करोड़ खर्च किए, जबकि मोदी सरकार ने इतनी ही अवधि में आठ लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की खरीद की है। ढाई गुना से ज्यादा है। हम प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ले कर आए। 14 हजार करोड़ प्रीमियम किसानों ने दिया, बदले में 70 हजार करोड़ रुपए मुआवजा किसानों को मिला है। वहीं पर गेहूं की खरीद 73 धान की 114 प्रतिशत बढ़ी है। गेहूं और धान की एमएसपी मूल्य 43 प्रतिशत ज्यादा बढ़ा और दलहन-तिलहन 70 से 75 प्रतिशत बढ़े हैं।

एक लाख करोड़ रुपए कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के रूप में खर्च करने जा रहे हैं ताकि किसानों को पर्याप्त भंडारण की सुविधा मिले। रेफ्रिजरेटर ट्रेन मिले। देश भर में माल जा सके। तीनों बिल किसानों के हित में है। इसमें कहा गया है कि किसान अब स्वतंत्र है देश में कहीं भी किसी भी दाम पर किसी भी स्थान पर, जो पहले नहीं था। स्थानीय मंडी में और मंडी से बाहर भी बेच सकता है। मंडी खत्म नहीं होने जा रही है। दूसरा, अपनी जमीन ठेके पर दे सकता है। ठेके पर जमीन लेने वाले को बुआई और कटाई का ही अधिकार होगा। जमीन का मालिकाना हक केवल किसानों का रहेगा। किसानों से बातचीत जारी है और पूर्ण विश्वास है, इसका समाधान निकलेगा। देश भर का किसान खुश है। जो कुछ किसानों के मन में भ्रम है, हम उसे भी दूर करेंगे।

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किसानों का सबसे ज्यादा जोर एमएसपी पर है, तो इसे देने में कहां दिक्कत है?
हमने कहा न, कि कांग्रेस से ज्यादा हमने एमएमसपी दी। हमने खरीद भी दोगुनी की। खत्म करने का तो सवाल ही नहीं उठता। एमएसपी थी, है और रहेगी। जो पहले प्रशासनिक प्रक्रिया थी, आज भी प्रशासनिक प्रक्रिया है। भविष्य के लिए हम लिखित रूप से देने को तैयार हैं।

क्या लगता है कि इस आंदोलन के पीछे कोई और ताकतें काम कर रही हैं?
तीनों बिलों से देश भर का किसान खुश है। उन्हें पता है कि ये क्रांतिकारी बिल हैं। 30-40 साल से इनका इंतजार था। राहुल गांधी और अमरिंदर सिंह जी, सब कहते रहे, कोई नहीं कर पाया। हमने करके दिखाया। हमने किसान के हित में किया है। इसीलिए हम इस पर टिके हुए हैं कि किसानों के जीवन में बदलाव लाएंगे। 2022 तक उनकी आमदनी को दोगुना करने का हमने संकल्प लिया था। स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को भी लागू किया। लागत के साथ 50 प्रतिशत दिया। एमएसपी भी दिया और आगे भी देते रहने का लिखित रूप में देने को तैयार हैं। जो लोग भ्रम फैला रहे हैं, वे एजेंडा दूसरा साथ में जोड़ रहे हैं। किसी ने बिजली का जोड़ दिया, किसी ने दूसरा, किसी ने तीसरा। केवल एमएसपी एक विषय था, आज आठ-दस मुद्दे शामिल हो गए हैं। मेरा मानना है कि भोले-भाले किसानों के कंधे पर रख कर राजनीतिक बंदूक नहीं चलानी चाहिए।

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किसान कानून वापस लेने पर जोर दे रहे हैं। क्या यह संभव है?
मुझे लगता है जो लोग किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर चलाना चाहते हैं, वे देश के बाकी किसानों के साथ अन्याय कर रहे हैं। राहुल गांधी का 2014 का बयान देखिए—उन्होंने कहा था हमने 11 यूपीए मुख्यमंत्रियों से बात कर ली है। सभी मंडी के बाहर की व्यवस्था देने को तैयार हैं। अमरिंदर सिंह ने अपने घोषणा पत्र में कहा था। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा था। अब इनको सांप क्यों सूंघ गया। अब ये क्यों तैयार नहीं। कौन सी ताकतें इन्हें रोक रही हैं। राहुल गांधी का संसद में भाषण, सोनिया गांधी की पब्लिक स्पीच सुनिए। ये लोग राजनीति करते हैं किसान के नाम पर। हम लोग किसानों की आय दोगुना करना चाहते हैं अगले तीन-चार वर्षों में।

जहां एपीएमसी (मंडी) भंग कर दी गई। वहां एमएसपी नहीं मिल पा रहा है। बिहार इसका उदाहरण है। ऐसा क्यों?
मुझे लगता है कि क्रॉप डायवर्सीफिकेशन एक बहुत बड़ा विषय है। देश की जरूरत क्या है, यह हमें समझना चाहिए। पंजाब-हरियाणा के किसानों ने गेहूं-धान पैदा कर देश की मांग को पूरा करने का काम किया है। आज बाहर से खाद्य वस्तुओं का आयात घटा तो यह देश के किसानों ने ही किया है पैदावार बढ़ा कर। दालें जो विदेशों से आयात करनी पड़ती थीं, आज हिंदुस्तान में उसकी पैदावार बढ़ी। भारत आत्मनिर्भर बना है। इस दिशा में हमारी सरकार का बहुत बड़ा योगदान है।

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बाहर से खाद्यान्न आयात कम करने के लिए क्या प्रयास हो रहा है?
निश्चित तौर पर हमारा प्रयास यही है कि भारत आत्मनिर्भर बने। खासकर कृषि क्षेत्र में। 138 करोड़ लोग भारत में रहते हैं। उनके खाने की व्यवस्था, रहने की व्यवस्था, पानी की व्यवस्था, बिजली की व्यवस्था यह सब हम करने का प्रयास कर रहे हैं। मोदी सरकार हर गांव को बिजली, हर घर को बिजली, हर घर को शौचालय, हर घर को गैस का कनेक्शन और अब हर गरीब को पक्का मकान देने का काम कर रही है। हम लोग एक लक्ष्य तय करके एक निश्चित समय सीमा में पूरा करते हैं।

आने वाले बजट में किसानों को अतिरिक्त सहायता-सुविधा देने की संभावना है?
देश के किसानों के लिए हम कुछ न कुछ करने का प्रयास लगातार करते रहते हैं। आपदा में अवसर ढंूढा। 13400 करोड़ रुपए की मंजूरी पशुओं में होने वाली मुंह पका, खुर पका बीमारी से मुक्ति के लिए टीकाकरण के लिए दिया। 15 हजार करोड़ दुग्ध उत्पादन बढ़ाने को, 20 हजार करोड़ मछली उत्पादन के लिए। एक लाख करोड़ रुपए पांच सालों में इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करने का तय किया है। ढाई करोड़ किसानों को क्रेडिट कार्ड। कुसुम योजना के तहत सोलर पंप और सोयल हेल्थ कार्ड दे रहे हैं। यह दिखाता है कि किसानों का ब्याज भी कम कर रहे हैं और आय बढ़ाने का भी काम कर रहे हैं।

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बेरोजगार युवाओं के लिए अतिरिक्त रूप से ध्यान देने पर क्या प्रयास हो रहा है?
देश में स्किलिंग की बहुत जरूरत है। शिक्षा में और इंडस्ट्री की जरूरत में काफी अंतर है। नई शिक्षा नीति इसकी भरपाई करने का काम करेगा। आपदा ने बताया कि आपको अपग्रेड करना पड़ेगा। री-स्किल करना पड़ेगा। ताकि इंडस्ट्री की जरूरत के मुताबिक आप तैयार कर सकें। विश्व का लार्जेस्ट वर्कफोर्स बनाने का काम करना है। लगातार काम कर रहे हैं। नए रोजगार के अवसर बनें, इसके लिए नए उद्योग लगाने वालों पर सिर्फ 15 फीसद टैक्स है। स्टार्टअप्स को बहुत सारे इंसेटिव दिए हैं। इनकम टैक्स की छूट। लान्ग टर्म कैपिटल गेन की छूट दी है। यही कारण है कि आज भारत स्टार्टअप नेशन में दुनिया के चार देशों की श्रेणी में आ गया है। यह भारत की बहुत बड़ी उपलब्धि है। युवाओं की उपलब्धि है। मोदी सरकार ने उसको दिशा देने का काम किया। दूसरे उद्योग भी ऐसा करें, इसके लिए 10 सैक्टरों को प्रोडक्शन लिंक इंसेटिव के लिए चुना गया है। ताकि भारत दुनिया के पहले दो-तीन देशों में आकर खड़ा हो जाए, जिससे रोजगार बढ़े। यह बहुत बड़ा बदलाव है।

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कोरोना काल में उद्योगों पर जिस तरह की काली छाया पड़ी। क्या उद्योगों को और कुछ सहायता देने का चल रहा है?
आपदा के समय रीस्ट्रक्चरिंग बेल आउट दिया। इनसालवेंसी बैंककरप्सी कोड को 31 मार्च तक सस्पेंड करके रखा ताकि कंपनियां बिके न, बची रहें। बंद न हो तो इसके लिए इमरजेंसी क्रेडिट के तहत 3 लाख करोड़ रुपए उद्योगों को बगैर गारंटी के देने का प्रावधान किया। उसमें से दो लाख करोड़ रुपए बंट भी चुके हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में बहुत सारे कदम उठाए हैं। रिफार्म्स लेकर आए। 1991 में भी इतने बड़े रिफार्म्स नहीं हुए, जो मोदी सरकार ने किया।

एसबीआई अप्रेंटिस पर नियुक्ति करती है। जो वेतन दे रही है, वह चपरासी से भी कम है। सरकार क्या कर रही है?
इंडियन बैंकर एसोसिएशन इस पर चर्चा करती है। सरकार भी इसमें  सुधार के लिए ध्यान देगी।

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पटरी पर आ रही अर्थव्यवस्था
जीएसटी कलेक्शन के ट्रेंड को लेकर क्या कहा जाए कि जीडीपी माइनस 23 से उबरने के आसार हैं।
दुनिया भर के देशों ने आज से सात महीने पहले जो कहा था, भारत ने उससे काफी बेहतर किया है। माइनस 23.9 प्रतिशत विकास दर थी, तीन महीने में माइनस सात परसेंट पर आ गए हैं। सितंबर में 95 हजार करोड़, अक्तूबर में एक लाख 5 हजार करोड़, नवंबर में 1 लाख करोड़ से ज्यादा अब दिसंबर में एक लाख 15 हजार करोड़ रुपए जीएसटी कलेक्शन हुई है। यह दिखाता है कि अर्थव्यवस्था तेजी से पटरी पर आ रही है। दो कोविड वैक्सीन की घोषणा मोदी जी ने की है। अपने आप में बहुत बड़ी बात है। लोगों को भरोसा मिलेगा। जन जन को वैक्सीन मिलेगी और कोरोड़ों लोगों की जान बचाने का काम किया जाएगा।

मर्जर से बैंकों की कार्यक्षमता बढ़ेगी
प्रश्न-एक तरफ बैंकों-इंश्योरेंस कंपनियों का मर्जर और दूसरी तरफ उद्योगपतियों को बैंकिंग क्षेत्र में आने को मंजूरी। पहले जनता का पैसा जमा करें और फिर ले उड़ें?
बैंकिंग बहुत व्यवस्थित तरीके से चलती है। निजी क्षेत्र में बहुत सारे बैंक हैं। बहुत सारे बहुत अच्छा भी कर रहे हैं। वे भी चल रहे हैं। किसी ने पैसा नहीं निकाला। पारदर्शिता रखते हो, जवाबदेही रखते है, ऑडिट होता है तो ऐसे कोई पैसा निकाल नहीं सकता। सरकारी क्षेत्र के बैंकों की ताकत बड़े, इसिलिए मर्जर किया है। उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए किया गया है। इससे लेनदेन और व्यापार भी बढ़ेगा।

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बच्चों के लिए इकट्ठा करते हैं किताबें
अपने संसदीय क्षेत्र में आप कई छोटे-छोटे काम करते हैं। कैसे मैनेज करते हैं?
जागरूकता फैलाना बहुत जरूरी है। अपनी संस्था के जरिए हमारा प्रयास होता है कि किताबें इकट्ठी करें और दूसरे जरूरतमंद बच्चों को मुहैया कराएं। ऐसे सांसद मोबाइल स्वास्थ्य सेवा चलाते हैं। यह चलता-फिरता अस्पताल है। हर रोज पंचायत स्तर पर ये गाड़ियों जाती हैं और मु त इलाज, जांच करती हैं। 3 गाड़ियों से शुरू किया था आज 17 गाड़ियों चल रही हैं। मेधावी छात्रों को मदद करते हैं। वे ज्यादा से ज्यादा सीखें-जानें इसके लिए उन्हें बाहर ले जाते हैं। इसका बहुत लाभ मिला है उन्हें। नशे से दूर रहें इसके सांसद खेल महाकुंभ करवाया। युवा हमारा वर्तमान और भविष्य भी हैं। राजनीति तो रोज करते हैं, लेकिन लोगों के जीवन में बदलाव लाएं, इसका भी प्रयास करते रहते हैं।

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सामाजिक-राजनीतिक चर्चा
आपकी पत्नी शैफाली सांसदों की पत्नियों के साथ मिल कर कुछ काम करती हैं। किस तरह का काम है?
हमारे यहां कमल सखी मंच है। इसमें सभी सांसदों की पत्नियां सामाजिक-राजनीतिक चर्चा करती हैं और सरकार की नीतियों को कैसे नीचे तक लेकर जाएं, इसमें एक-दूसरे से जानने का अवसर मिलता है।

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