Monday, Jul 16, 2018

पाकिस्तान और चीन से अवैध हथियार नेपाल के जरिए आ रहा भारत

  • Updated on 2/13/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पंजाब में अवैध हथियारों की सप्लाई थमने का नाम नहीं ले रही। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि जब आपराधिक छवि के कारण उनके असला लाइसैंस सरकार नहीं बनाती तो वे अवैध असला खरीदने से नहीं डरते। जानकारों की मानें तो भारत में पाकिस्तान और चीन के हथियार नेपाल के जरिए अवैध रूप से सप्लाई हो रहे हैं। इसके अलावा देश में बिहार व यू.पी. में अवैध हथियारों की सैंकड़ों फैक्टरियां चल रही हैं जिनसे अपराधियों को हथियार बहुत ही कम दाम में मिल जाते हैं। 

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सूत्रों के अनुसार जहां बिहार और यू.पी. में अवैध हथियारों का सबसे ज्यादा निर्माण हो रहा है वहीं पंजाब व हरियाणा अवैध हथियारों की सबसे बड़ी मार्कीट बन चुका है। पंजाब में अवैध हथियारों का शौक सिर्फअपराधियों को ही नहीं है, बल्कि कुछ युवा वर्ग भी ऐसा है जो शौक के तौर पर अवैध हथियार रखता है। अवैध हथियारों का 80 प्रतिशत हिस्सा पंजाब के गांवों में जा रहा है। इस समय विदेशी अवैध हथियार सिर्फ गैंगस्टरों या बड़े अपराधियों के पास ही हैं। देसी छोटे कट्टे, बंदूकें या पिस्टल के लिए 5 हजार से लेकर 25 हजार रुपए खर्च करने पड़ सकते हैं।

पंजाब में देसी अवैध हथियारों की सप्लाई बिहार के मुंगेर, यू.पी. के इटावा, मैनपुरी, मध्य प्रदेश के खंडवा, बुरहानपुर, थार व खरगोन जिलों से हो रही है। पंजाब में कई बिहारी और यू.पी. के दलाल सक्रिय हैं जो पंजाब व हरियाणा में अवैध असला मुहैया करवाते हैं। जहां असला बनता है वहां तो ये कट्टे महज एक हजार रुपए में मिल जाते हैं पर पंजाब आते-आते ये 5 हजार रुपए के हो जाते हैं। इसी प्रकार पिस्टल और बंदूकें 10 हजार से 40 हजार रुपए तक पहुंच जाती हैं। युवा अपराधियों में अवैध असले का क्रेज बढ़ता जा रहा है।

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