Sunday, Jan 26, 2020
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देश के अल्पसंख्यकों को ममता की नसीहत- न करें ओवैसी जैसे नेता पर भरोसा

  • Updated on 11/19/2019

नई दिल्‍ली/टीम डिजिटल। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की चीफ और पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले अपनी रणनीति में फेर बदल किया है। उन्होंने पहली बार बीजेपी की बजाय AIMIM को आड़े हाथों लिया है। बंगाल के कूचबिहार जिले में एक कार्यक्रम को दौरान टीएमसी प्रमुख ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलीमीन का नाम लिए बिना उन्हें ‘अल्पसंख्यक कट्टरता’ को लेकर चेतावनी दी।

ममता बनर्जी ने असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) पर निशाना साधते हुए कहा, "मैं देख रही हूं कि अल्पसंख्यकों के बीच कई कट्टरपंथी हैं। इनका ठिकाना हैदराबाद में है। आप लोग इन पर ध्यान मत दें।"

इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संसद के शीतकालीन सत्र में ‘नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019’ लाने का प्रयास करने के लिए एक बार फिर मोदी सरकार (Modi Government) पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह विवादास्पद विधेयक बंगालियों और हिंदुओं को देश से बाहर करने के लिए एक तरह का जाल है। ममता बनर्जी ने इसे लेकर केंद्र की भाजपा सरकार का कड़ा विरोध जताया। 

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केंद्र सरकार (Central Government) सोमवार से शुरू हुए शीतकालीन सत्र (Winter Session) में नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) लाने की तैयारी में है। इसी के विरोध में पूर्वोत्तर भारत में सोमवार को जोरदार प्रदर्शन हुआ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का पुतला फूंका गया।

बंगाल में NRC लागू होने नहीं देंगे - ममता
कूचविहार में टीएमसी कार्यकर्ताओं (TMC Workers) को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि जब तक राज्य में तृणमूल कांग्रेस की सरकार है तब तक हम बंगाल में एनआरसी लागू नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि कोई भी बंगाल में किसी की नागरिकता नहीं छीन सकता। ममता बनर्जी का सीधा निशाना केंद्र की मोदी सरकार पर था। 

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बंगालियों और हिंदुओं को बाहर करने की साजिश
बनर्जी ने भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) में सुधार करने में विफल रहने के लिए भी केंद्र की आलोचना की। बनर्जी ने कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए कदम उठाने के बजाय एयर इंडिया (Air India) जैसे सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने में दिलचस्पी ले रही है। उन्होंने कहा, "केन्द्र कैब को लाने की योजना बना रही है लेकिन मैं आपको बता दूं कि यह एनआरसी की तरह एक और जाल है। यह वैध नागरिकों की सूची से बंगालियों और हिंदुओं को बाहर करने और उन्हें अपने ही देश में शरणार्थी बनाने की एक साजिश है।"

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शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने के लिए कई कदम उठाए
इस विधेयक के कानून बनने के बाद बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को सात साल भारत में गुजारने पर और बिना उचित दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता मिल सकेगी। ममता बनर्जी ने कहा, "हमारी सरकार के सत्ता में आने के बाद हमने कूचबिहार जिले में शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने के लिए कई कदम उठाये थे। लेकिन हमने कभी भी कोई शर्त नहीं लगाई कि उन्हें इस देश में छह साल तक रहना होगा।"

बता दें कि लोकसभा (Lok Sabha) द्वारा आठ जनवरी को इस विधेयक को पारित किये जाने के बाद इसे राज्यसभा में पेश नहीं किया गया था और लोकसभा भंग होने के कारण इस विधेयक की अवधि समाप्त हो गई थी।

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