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क्या पश्चिम बंगाल में चल गया मोदी-शाह का जादू, TMC के गढ़ में BJP को मिल रहा मूक समर्थन

  • Updated on 4/25/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली से पश्चिम बंगाल की अलसाई लाल जमीन पर भाजपा ( BJP) का चुनावी नारा, ‘सबका साथ सबका विकास’ लोगों के जहन पर असर डाल रहा है। भोपाल में प्रज्ञा ठाकुर ( Pragya Thakur) को भाजपा की ओर से प्रत्याशी बनाये जाने से मुस्लिम इलाके में भाजपा इस नारे का भले ही असर नहीं लेकिन अन्य क्षेत्रों में टीएमसी (TMC) की दबंगई से परेशान लोग भाजपा से अलग उम्मीद पाले हुए हैं।
 
बीरभूमि जिले की बोलपुर संसदीय सीट से भाजपा प्रत्याशी रामप्रसाद दास बताते हैं कि वे मुस्लिम बहुल इलाकों में प्रचार ही करने नहीं जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि बोलपुर (Bholpur) संसदीय क्षेत्र में 30 फीसदी आबादी मुस्लिमों की है। दास सफाई देते हुए कहते हैं कि यह धर्म का मामला नहीं है। मुस्लिम बहुल इलाकों में पार्टी का कोई नेटवर्क ही नहीं है। इसीलिए हम सत्तर फीसदी उन इलाकों में ही प्रचार पर जोर दे रहे हैं जहां पार्टी का नेटवर्क है।  

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बोलपुर में भाजपा एक और नारा ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ भी दीवारों पर लिखा दिखायी देता है। इसी तर्ज पर तृणमूल कांग्रेस ने भी भाजपा मुक्त बंगाल का नारा दे रखा है। यद्यपि दीवारों पर नारों तथा झंडे बैनर के माध्यम से प्रचार के मामले में तृणमूल कांग्रेस भाजपा बहुत पीछे है। भाजपा यहां 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री (prime minister) की चुनावी रैली के लिए मैदान हासिल करने में तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ा। वे जहां भी जमीन तय करते थे तृणमूल के लोग प्लाट या जमीन मालिक को डरा धमकाकर इसे रद करा देते थे। 

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बीरभूमि जिले में भाजपा के महासचिव अष्टम मंडल बताते हैं कि बहुत सारी कोशिश के बाद गोपालनगर में एक जमीन रैली के लिए अंतत: तय हो सकी। भाजपा प्रत्याशी रामप्रसाद दास (Ram prasaad Das) बताते हैं कि तृणमूल कांग्रेस दबंग उन्हें रैली करने से रोकने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाते रहते हैं। बीरभूमि तथा बोलपुर संसदीय सीट में तृणमूल कांग्रेस के दबंग जिला अध्यक्ष अणुब्रत मंडल की दबंगई चलती है। यहां असली चुनाव मंडल ही लड़ रहे हैं। वे ही जिले के डीएम तथा एसएसपी हैं। 

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तृणमूल कांग्रेस ने बोलपुर सीट से असित मल तथा बीरभूमि सीट से शताब्दि राय को अपना प्रत्याशी बनाया है। तृणमूल नेता अणुब्रत मंडल अपने ऊपर बाहुबली होने के आरोपों को खारिज करते हुए बताते हैं कि भाजपा का जिले में कोई सांगठनिक नेटवर्क नहीं है। वे दावा करते हैं कि भाजपा तो यहां कुल 1958 बूथों पर मतदान के दिन अपने प्रतिनिधि तक खोजने में सक्षम नहीं हो पा रही है। मंडल का यह भी दावा है कि भाजपा को यहां के कुल 17 लाख वोटों में से ज्यादा से ज्यादा 60 हजार वोट मिलेंगे। भाजपा प्रत्याशी रामदास भी स्वीकार करते हैं कि उन्हें बूथों के लिए एजेंट तय करने में दिक्कत आ रही है। 

उल्लेखनीय है कि बोलपुर में 29 अप्रैल को मतदान होना है। बोलपुर में आम लोगों का भी मानना है कि भाजपा के पक्ष में मतदान करना खतरनाक है। यहां मतदान के दिन हिंसा भी हो सकती है क्योंकि तृणमूल समर्थक यहां काफी प्रभाशाली हैं। कुछ दिन पहले यहां ग्रामीण इलाकों में तृणमूल तथा भाजपा समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हो चुकी है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश सचिव समत शेख ने कहा कि तृणमूल के गुंडे अभी हाल ही में भाजपा के एक जुलूस को रोकने की कोशिश की थी। भाजपा को कोई बड़ा नेता अभी तक संसदीय क्षेत्र में नहीं आया है। चुनाव बूथ के खर्च के लिए भी गांव वाले आपस में चदा जुटा रहे हैं। स्थानीय निवासी अरिंदम हालदार बताते हैं कि यहां लोगों में भाजपा के लिए आकर्षण तो लोगों में है लेकिन वे भाजपा को सीट दिला पायेंगे ऐसी उम्मीद बहुत कम है। 


 

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