Wednesday, Aug 10, 2022
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wetland makes the balance of the eco

पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाती है वेटलैंड

  • Updated on 1/2/2022

नई दिल्ली। अनामिका सिंह। विज्ञान के छात्रों को पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में पढ़ाया जाता है। लेकिन शहरीकरण के कारण पारिस्थितिक तंत्र में काफी असंतुलन देखने को मिल रहा है, इसकी वजह है वेटलैंड का खत्म होना। इसे लेकर अब केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय काफी सजग नजर आ रहा है और यही वजह है कि वो दोबारा से वेटलैंड को जीवित कर इस बिगड़ते पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। वहीं हो सकता है कि दिल्ली में 10 जलाशयों को जल्द ही वेटलैंड घोषित किया जाए। जबकि नजफगढ़ झील को केंद्र सरकार ने हाल ही में वेटलैंड घोषित कर दिया है।
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10 जलाशयों को किया जाएगा वेटलैंड घोषित
दिल्ली में वेटलैंड को लेकर हाल ही में दिल्ली पार्क एंड गार्डन सोसायटी ने एक रिपोर्ट जारी की थी। जिसमें उन्होंने कुछ जल निकायों की पहचान की थी, इसमें संजय झील, हौजखास झील, भलस्वा झील, स्मृति वन (कोंडली), स्मृति वन (वसंत कुंज), वेलकम झील, दरियापुर कलां, सुल्तानपुर डबास और पूठ कलां (सरदार सरोवर झील) सहित नजफगढ़ झील को वेटलैंड घोषित किए जाने की बात कही गई थी। यही नहीं रिपोर्ट में इन जल निकायों की जल गुणवत्ता का आंकलन भूमि एजेंसियों द्वारा किए जाने की बात भी कही गई थी। जिन्हें जल निकायों की बहाली के लिए सांकेतिक दिशानिर्देशों के अनुसार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को हर महीने या साल में कम से कम आठ बार सभी जल निकायों का जल परीक्षण या नमूना लेने की आवश्यकता होगी। इनके अलावा, सात जिलों ने मॉडल तालाबों (उत्तर, उत्तर पश्चिम, दक्षिण, दक्षिण पश्चिम, नई दिल्ली, उत्तर पूर्व और पश्चिम) की पहचान की है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मॉडल तालाबों के लिए बेंचमार्क तैयार कर सभी जिलाधिकारियों को भेज दिया गया है।
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वेटलैंड मित्र व स्कूल और कॉलेज के बच्चे करेंगे जलाशयों की पहचान
भारत का अमृत महोत्सव के उत्सव के लिए वेटलैंड के प्रति जागरूक करने के लिए मास्टर ट्रेनर बनाए गए हैं। जिसमें 787 स्कूल शिक्षकों ने वेटलैंड मूल्यों पर प्रशिक्षण दिया। यही नहीं इको क्लबों का आयोजन भी किया गया, इसमें 2 हजार से अधिक स्कूलों और कॉलेजों ने भाग लिया। जबकि 27 वेटलैंड मित्र नि: शुल्क आधार पर संरक्षण में प्राधिकरण की सहायता कर रहे हैं। उनका काम अपने आस-पास के जलाशयों की पहचान करना और वेटलैंड अथॉरिटी के लिए उनके खतरों या चुनौतियों को दूर करने के लिए कार्रवाई करना है।
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20 साल में लुप्त हो चुके हैं दिल्ली के 500 वेटलैंड
पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बनाने व शहर की आबोहवा के लिए महत्वपूर्ण वेटलैंड की लगातार दिल्ली में अनदेखी हुई है। यही वजह है कि 20 साल में करीब 500 से अधिक वेटलैंड कंक्रीट के फैलते जाल की भेंट चढ़ चुकें हैं। हालांकि अब सरकारी स्तर पर वेटलैंड संरक्षण के प्रयास तो शुरू हुए हैं लेकिन सफलता कब तक मिलेगी यह कहना संभव नहीं है। एक अध्ययन के अनुसार 20 साल पहले दिल्ली में 900 से अधिक वेटलैंड हुआ करते थे लेकिन वर्तमान में 400 बचे हैं। इसके पीछे की वजह विकास कार्य और अवैध निर्माण व अतिक्रमण बताया जाता रहा है।
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साल 2019 में हुआ दिल्ली स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी का गठन
बता दें कि वेटलैंड संरक्षण के लिए केंद्र सरकार ने वेटलैंड कंजर्वेशन एंड मैनेजमेंट रूल्स 2017 तैयार किया है, जिसे 2020 में संशोधित किया गया। एनजीटी के आदेश पर दिल्ली सरकार ने साल 2019 में वेटलैंड का संरक्षण करने के उद्देश्य से 23 सदस्यीय दिल्ली वेटलैंड अथॉरिटी का गठन किया था। इस अथॉरिटी ने करीब 278 वेटलैंड को चिन्हित किया है जिसे दोबारा जीवित करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही अथॉरिटी द्वारा नरेला के टीकरी खुर्द झील के संरक्षण का कार्य भी चल रहा है। इसके लिए वेटलैंड मित्र स्थानीय लोगों को बनाया गया है ताकि इसे बचाया जा सके।
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क्या होता है वेटलैंड
नमीयुक्त जमीन को वेटलैंड कहा जाता है, जहां भूजल का स्तर अच्छा होता है। मालूम हो कि अमूमन ऐसी जमीन नदियों के किनारे अधिकतर मिलती है लेकिन जहां वर्षा जल संरक्ष की व्यवस्था हो यानि प्राकृतिक रूप से जोहड़ बन गए हो उसे भी वेटलैंड कहा जा सकता है। दिल्ली में भी यमुना के बाढग़्रस्त क्षेत्र में ऐसे काफी जगह है जो पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखते हैं। इसके अलावा कई बरसाती नाले व गांवों के अंदर बनी जोहड़ व तालाब। हाल ही में यमुना बॉयोडाइवर्सिटी पार्क में 100 और 1.5 एकड़ में तीन अलग-अलग वेटलैंड विकसित किए गए हैं। जबकि यमुना खादर में भी छोटे-छोटे तालाब बनाने की योजना है जिससे वेटलैंड की संख्या भविष्य में बढ़ सकती है।


 

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