Friday, May 14, 2021
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what did bjp achieve during the corona era and where did congress reach albsnt

सफरनामा 2020ः Corona काल में बीजेपी ने क्या किया हासिल और कहां पहुंची Congress?

  • Updated on 12/26/2020

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। जब से केंद्र में नरेंद्र मोदी पीएम बने है तब से पहली बार बीजेपी के लिये साल 2020 कम खुशी-ज्यादा गम वाला साल रहा। पार्टी के लिये गम इसलिये कि इस साल कोरोना वायरस के कारण ही तेजी से सुधार पर आमदा मोदी सरकार के कदम अचानक से ठिठक गए। केंद्र में बीजेपी नीत पूर्ण बहुमत वाली और मजबूत सरकार है। अगर कहा जाए मौजूदा दौर बीजेपी के लिये स्वर्णिम है तो कहना गलत नहीं होगा। 

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लेकिन मन में पाले पावरफुल का गुमान तब टूट जाता है जब इसका लिटमस टेस्ट देश में होने वाले समय-समय पर होने वाले चुनाव में जीत-हार होती है। बीजेपी के साथ भी यहीं हुआ। पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव के बाद एनडीए सरकार काफी तेजी से सुधार को बढ़ाती नजर आ रही थी। मसलन धारा 370 खात्मा करना हो, CAA,NRC को लेकर फैसला करना हो- मोदी-शाह दमदार तरीके से एक के बाद एक निर्णय लेती नजर आ रही थी। लेकिन इस साल के शुरुआत में ही कोरोना वायरस के दस्तक देने के बाद पूरे साल देश और बीजेपी के लिये मुश्किल क्षण रहा।   

BJP Congress 

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लोकतंत्र में चुनाव का बहुत बड़ा महत्व होता है। फिर यह चुनाव लोकसभा का हो या फिर विधानसभा का या लोकल बॉडी का-इसका खासा प्रभाव होता है। कोई भी चुनाव ही होता है जिसमें हिस्सा लेकर सत्ताधारी पार्टी फिर से वापसी करती है या बरसों से आस लगाए विपक्षी दलों को सत्ता का स्वाद चखने का मौका मिलता है। लेकिन इस दौरान सत्ता कब फिसल जाए कोई नहीं कह सकता। 

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बीजेपी के लिये सबसे बड़ी जीत तब हुई जब 2019 के लोकसभा चुनाव में  फिर से केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार की वापसी हुई। वो भी पहली बार बीजेपी ने लोकसभा में सबसे ज्यादा 300 के आंकड़ा को भी पार कर लिया। लेकिन साल 2019 के अंत में महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में विधानसभा चुनाव हुए। लेकिन बीजेपी को तब बड़ा झटका लगा जब महाराष्ट्र और झारखंड में बीजेपी की सरकार चली गई। वहीं हरियाणा में किसी तरह जेजेपी के साथ मिलकर सरकार का गठन करने में सफलता मिली। वहीं दिल्ली में भी बीजेपी को तगड़ा झटका लगा। हालांकि बीजेपी को साल 2020 में कम खुशी ही सही लेकिन बिहार में फिर से एनडीए सरकार की वापसी और हैदराबाद,जम्मू-कश्मीर में लोकल चुनाव में अच्छा प्रदर्शन काफी संतोष दे गई।

Narendra Modi

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यह तो कहानी हुई सत्ताधारी पार्टी बीजेपी की जो अपने गठन से लेकर दशकों तक विपक्ष में बैठी रही। लेकिन कांग्रेस को क्या कहेंगे जो आजादी के बाद से ही दशकों तक केंद्र की सत्ता में आन-बान-शान से रही। लेकिन अब ऊंट आया पहाड़ के नीचे- वाले स्थिति में पहुंच गई है। कांग्रेस 2014 के बाद से लगातार कमजोरी होती गई है। दिल्ली से लेकर बिहार तक सभी चुनाव में बस हार ही हार का सामना करना पड़ा।

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पार्टी एक अदद राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश तक नहीं कर पाई है। या यूं कहिये कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी का विकल्प भी राहुल और सोनिया ही है। जिसका खमियाजा पार्टी को भुगतना पड़ रहा है। पार्टी पूरी तरह दिशाहीन हो चुकी है। कांग्रेस के कद्दावर नेता कभी खिन्न में शीर्ष नेतृत्व को ही इसके लिये जिम्मेदार ठहराने से भी नहीं चूकते है। यह उस पार्टी में बढ़ते असंतोष के सुर है जहां से ही दरबारी कल्चर देश भर में शुरु हुई। कभी गांधी परिवार के एक इशारे पर एक टांग पर खड़े रहने वाले नेताओं की जमात अचानक से कम होती गई है।

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राहुल गांधी की फिर से ताजपोशी तो तय है। लेकिन नरेंद्र मोदी के विराट व्यक्तित्व को कितना चुनौती देंगे- यह भी किसी से छिपी हुई नहीं है। इसके वाबजूद राहुल यदि शरद पवार के उस सलाह को मानें कि उन्हें निरंतरता को हासिल करना चाहिये -तो निश्चित रुप से पार्टी का कायापलट भी कर सकते है। नरेंद्र मोदी को चुनौती भी दे सकते है। बशर्तें उन्हें पहले खुद में काफी बदलाव से गुजरना होगा। 

 

 

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