Tuesday, Jan 25, 2022
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what happened in the meeting between the government and the farmer djsgnt

सरकार और किसान के बीच हुई बैठक में क्या- क्या हुआ? जानें सबकुछ

  • Updated on 12/2/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। दिल्ली बॉर्डर (Delhi Border) पर लगातार हो रहे किसान आंदोलन के रोकथाम के लिए मंगलवार को सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत हुई। लेकिन माना जा रहा है कि यह बैठक बेनतीजा रहा। किसान नेता जहां अपनी पुरानी बातों को सुना रहे थे, वहीं सरकार की ओर से प्रजेंटेशन देकर उसके बारे में विस्तार से बताया जा रहा था। बैठक में किसान संगठनों की ओर से 32 प्रतिनिधि शामिल थे, वहीं सरकार की ओर से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) हिस्सा ले रहे थे। 

3 दिसंबर को फिर होगी बैठक
कृषि कानून को लेकर केंद्र सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच लगभग 4 घंटे से भी ज्यादा समय तक मंथन हुआ। इस बैठक में फिर से 3 दिसंबर को मिलने पर सहमति हुई है। इस बीच कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने बैठक में एक समिति बनाने का प्रस्ताव दिया। जिसे किसान नेताओं ने ठुकरा दिया है। कृषि मंत्री ने कहा कि एक समिति का गठन होना चाहिये। जिसमें  सरकार और कृषि एक्सपर्ट कृषि कानून से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेगे। लेकिन किसान नेताओं ने इसे अस्वीकार कर दिया। जिसमें किसानों के सभी तरह के सवालों का जबाव देने की कोशिश की जा रही है। वहीं सरकार MSP पर भी रुख साफ किया है।

विचार विमर्श किया गया
बता दें प्रदर्शनकारी किसानों के प्रतिनिधियों के साथ मंगलवार को होने वाली बैठक से कुछ घंटे पहले केंद्रीय मंत्रियों राजनाथ सिंह और अमित शाह तथा भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा एवं अन्य ने इस विषय पर देर तक विचार-विमर्श किया। केंद्र सरकार ने प्रदर्शन कर रहे सभी 32 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ अपराह्न तीन बजे यहां विज्ञान भवन में बैठक बुलाई है। राजनाथ सिंह, अमित शाह ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल के साथ तीन घंटे से अधिक समय तक केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन के मुद्दे पर मंथन किया।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी है
दिल्ली के सिंघु और टिकरी बार्डर पर विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा के किसानों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी है। शुक्रवार की हिंसा के बाद यहां से किसी तरह की अप्रिय घटना की कोई खबर नहीं है। सोमवार को गाजीपुर सीमा पर भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हो गये। विपक्षी दलों ने भी केंद्र पर दबाव बढ़ाते हुए कहा है कि किसानों के लोकतांत्रिक संघर्ष का सम्मान किया जाए और कानूनों को वापस लिया जाए।

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