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कश्मीर को लेकर चीन ने क्या बदल ली है रणनीति, जाने कैसे

  • Updated on 10/8/2019

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। जब चीन (china) के राष्ट्रपति शी जिनपिंग(xi Jinping) भारत (india) आएंगे तो जम्मू और कश्मीर (jammu & kashmir) से धारा 370 हटाने के बाद में यह उनकी पहली यात्रा होगी। वे 11 अक्टूबर को महाबलीपुरम, तमिलनाडु पहुंचेंगे जहां वे पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता अनौपचारिक शिखर सम्मलेन में हिस्सा लेंगे। हालांकि इस मुलाकात से पहले ही चीन का कश्मीर को लेकर सुर बदल गया है, जो भारत के लिये राहत की बात है।

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पाकिस्तान की अंतराष्ट्रीय मंच से उपेक्षा से अवगत है चीन 
चीन ने कहा है कि कश्मीर के मसले को दोनों देशों को आपसी बातीचत से सुलझाना चाहिये। इससे पहले चीन ने पाकिस्तान के सुर से सुर मिलाते हुए कहा था कि UN के चार्टर के अनुरुप ही कश्मीर समस्या का समाधान किया जाना चाहिये। जिसमें स्पष्ट तौर पर पाकिस्तान का छाप था। अगर चीन के इस रुख में बदलाव के पीछे का कारण को देखा जाए तो भारत यात्रा पर आ रहे राष्ट्रपति का यात्रा बहुत ही महत्वपूर्ण है। चीन भली-भांति जानता है कि पाकिस्तान को खुश करने के चक्कर में कभी-भी भारत से रिश्ता को खराब नहीं किया जा सकता। शायद इसलिये जब वे पीएम मोदी के साथ शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे तो भारत और पाकिस्तान से उम्मीद लगाएंगे कि दोनों देशों को क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिये मिलकर काम करना चाहिये।  

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कश्मीर को लेकर पाक है अलग-थलग
दूसरी तरफ चीन ने हाल के दिनों में पीएम मोदी के अमेरिका के सफल यात्रा को नजदीक से देखा है। जिसमें चीन ने भी महसूस किया है कि कश्मीर को लेकर दुनिया भर के देशों के सामने पाकिस्तान के गुहार लगाने का कोई फायदा नहीं हुआ है। उससे पहले खुद UNSC के विशेष बैठक में भी चीन ने जब कश्मीर को लेकर विशेष बैठक बुलाई थी तो किसी देश ने चीन का समर्थन नहीं किया था। इससे भी चीन ने सबक जरुर लिया होगा। पीएम मोदी के अमेरिका यात्रा को लेकर जिस तरह रेड कार्पेट बिछाया गया तो वहीं पाकिस्तान के पीएम इमरान खान का फीका स्वागत किया, यह सब भी चीन को कहीं न कहीं रणनीति बदलने के लिये मजबूर किया है। इसके अलावा हाउडी मोदी जो सिर्फ पीएम नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिये रखा गया था वहां महाशक्ति अमेरिका के राष्ट्रपति डौनाल्ड ट्रंप के पहुंचने की ताजा याद भी चीन अभी नहीं भूलेगा।

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भारत और चीन दोनों देश के है प्राचीन सभ्यता      
उनके भारत यात्रा के कारणों की बात की जाए तो महाबलीपुरम जो दोनों देश को सदियों से जोड़ता है। तमिलनाडु के प्राचीन शासक पल्लव के समय से ही चीन से भारत का संबंध रहा है। लगभग 2000 वर्ष पहले से भारत और महाबलीपुरम का जो संबंध रहा है, चीनी राष्ट्रपति के यात्रा से उस रिश्तों को मजबूती फिर से मिलेगी। यहां जो चीनी सिक्का मिला है वो दोनों देशों के इस रिश्तों की गवाही देता है। कभी कांचीपुरम जिला बोद्ध धर्म का गढ़ माना जाता था। चीनी यात्री ह्वेनसांग भी कभी कांचीपुरम यात्रा करके दोनों देशों के आपसी प्रगाढ़ता के बारे में लिखा है।      
 

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तमिलनाडु के राजनीतिक दलों ने किया स्वागत
चीनी राष्ट्रपति के इस यात्रा का तमिलनाडु के विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी स्वागत किया है। द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने कहा है कि यह राज्य के लिये गर्व की बात है कि चीनी राष्ट्रपति और पीएम मोदी के मेजबानी करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने चीन के सभ्यता को भी प्राचीन बताते हुए कहा कि भारत की तरह पुरातन संस्कृति का केंद्र रहा है।

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