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क्या है दलबदल कानून, जिसमें तहत सचिन पायलट और 19 विधायकों को भेजा गया नोटिस?

  • Updated on 7/16/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राजस्थान में मचे सियासी घमासान में अब कानूनी दांवपेंच भी खेले जाने लगे हैं। सचिन पायलट के कांग्रेस पार्टी से बेदखल होने के बाद अब राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने सचिन पायलट और 19 पार्टी विधायकों को दलबदल विरोधी कानून के तहत नोटिस भेजा है।

इस मामले में अब सचिन सहित 19 विधायकों से जवाब मांगा गया है। अचानक राजनीतिक फेरबदल के बीच आए इस कानूनी दांवपेंच के बारे में आईये आपको बताते हैं। जानते हैं क्यों जारी किया गया ये दलबदल नोटिस।

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बैठक में नहीं हुए थे शामिल
इसकी शुरुआत तब से हो चुकी थी जब सचिन पायलट और ये 19 विधायक, मुख्यमंत्री अशोक गहलौत द्वारा बुलाई गई उनके घर पर हुई बैठक में नहीं गए थे। जिसके बाद पार्टी ने उनके खिलाफ ये कार्रवाई शुरू कर दी। नोटिस जारी किया गया है और नोटिस के जवाब के बाद पार्टी तय करेगी कि इन विधायकों का क्या किया जाना है।

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क्या है ये दलबदल कानून
ये कानून तब लागू होता है कि जब निर्वाचित सदस्यों द्वारा पार्टी छोड़ने या पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर उनकी सदस्यता को रद्द किया जाता है। इस बारे में भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची में उल्लेख किया गया है और इसे दल बदल विरोधी कानून कहा जाता है। इस कानून को 1985 में 52वें संशोधन के साथ संविधान में शामिल किया गया था।

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क्यों पड़ी जरूरत
राजनीतिक लाभ के लिए लगातार सदस्यों द्वारा बगैर सोचे समझे दल बदलने की आदत को देखने के बाद इस कानून की जरूरत तब पड़ी। इतना ही नहीं राजनेताओं द्वारा अवसरवादिता और राजनीतिक अस्थिरता के बहुत ज्यादा बढ़ जाने के कारण इस कानून को लाया गया ताकि अपने फायदे के लिए सिर्फ नेता पार्टी ही न बदलने रह जाए बल्कि देश जिस उद्देश से राजनीति से जुड़े उसे भी पूरा करें।

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जब हुआ संशोधन
इस कानून के 1985 में बनने के बाद भी जब अदला बदली नहीं रुकी तब इसमें संशोधन किए गए। तब इसमें बदलाव करते हुए सिर्फ एक व्यक्ति ही नहीं बल्कि सामूहिक रूप से भी दल बदले जाने को असंवैधानिक करार दिया गया। ये बदलाव इसमें साल 2003 में किए गए थे।

इतना ही नहीं इसमें धारा 3 को भी खत्म कर दिया गया जिसके तहत एक तिहाई पार्टी सदस्यों को लेकर दल बदला जा सकता था, अब ऐसा करने के लिए दो तिहाई सदस्यों की सहमती जरूरी होती है।

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ये कानून तब लागू नहीं होता जब...
-पूरी राजनीतिक पार्टी किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी के साथ मिल जाती है
-किसी पार्टी के निर्वाचित सदस्य अपनी एक नई पार्टी बना लें
-किसी पार्टी के सदस्य दो राजनीतिक पार्टियों के विलय हो जाने पर खुद को उनसे अलग एक अन्य ग्रुप में रखते हैं
- किसी पार्टी के दो तिहाई सदस्य अलग हो जाएं और नई पार्टी बना लें

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चुनौती दी जा सकती है!
राजस्थान के हालातों की बात करें तो सचिन पायलट और 19 विधायकों के खिलाफ जारी हुए नोटिस को लेकर चुनौती दी जा सकती है। जानकारों की माने तो व्हिप हमेशा विधानसभा कार्यवाही में या मौजूदगी को लेकर जारी किया जाता है लेकिन जिस तरह से ये नोटिस जारी किया गया है वो विधानसभा से बाहर और मुख्यमंत्री के आवास पर बैठक में न आने पर जारी किया गया है, इसलिए इस आधार पर चुनौती दी जा सकती है।

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