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क्या है अयोध्या विवाद के मायने, जानें कैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदल जाएगी तस्वीर

  • Updated on 11/9/2019

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। जब देश सदियों से अयोध्या (Ayodhya) विवाद को सुलझाने के लिये टकटकी निगाहों से देख रही हो तो ऐसे में आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जिसमें CJI ने अपने आदेश में विवादित जमीन हिंदुओं को देने का फैसला सुनाया है। इसके साथ ही मुस्लिम पक्षकारों को अयोध्या में 5 एकड़ जमीन देने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में ASI के सबूत को आधार माना है। राम लला विराजमान को जमीन का मालिकाना हक देने के साथ ही निर्मोही अखाड़े के दावे को भी खारिज कर दिया है। केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि एक ट्रस्ट बनाकर आगे की प्रक्रिया को बढ़ाया जाए।


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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के है बहुत ही मायने

लेकिन इन सबके बीच राजनीतिक दलों ने भी इस विवाद पर रोटी सेंकने से परहेज नहीं किया है। जिससे अचानक अयोध्या संवेदनशील हो गया है। हालांकि यह भी सच है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने मीडिएटर की टीम गठित करके उससे इस विवाद को हिंदु और मुस्लिम पक्षकारों से मिलकर सुलझाने का जिम्मा दिया तो माना गया कि इसे बहुत ही सौहार्दपूर्ण तरीके से निपटा लिया जाएगा। लेकिन इस टीम के एक भी कदम न बढ़ने से फिर से गेंद सुप्रीम कोर्ट के पालें में ही आ गया।

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हर हाल में कामयाब रहे भाईचारा

सुप्रीम कोर्ट ने लगातार 40 दिन तक सुनवाई की। इस दौरान हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों ने अपने-अपने पक्ष रखे। लेकिन जब फैसले की घड़ी सदियों से आहिस्ता-आहिस्ता चलते एकदम निर्णायक मोड़ पर आ खड़ी हुई है तो देश को बहुत ही धेर्य रखने की आवश्यकता है। हमें यह नहीं भूलना चाहिये कि अंततः भाइचारे को हर हाल में कायम रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। खास करके जब सुप्रीम कोर्ट के निर्णय आएंगे तो उसे तहे दिल से स्वीकार करना चाहिये। यहीं भारतीय संस्कृति की तहजीब है।

देश को संयम बरतने की आवश्यकता

खास करके राजनीतिक दलों को बहुत ही संयम रखने की जरुरत है। देश अपनी गति से चलते रहेगा बशर्तें कुछ असामाजिक तत्वों पर निगाह पैनी रखना केंद्र और राज्य सरकार की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। फिर से पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ को कसौटी पर कसा जाएगा। सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों को राजधर्म निभाना चाहिये। ताकि हर हाल में कानून-व्यवस्था बरकरार रहे। 

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पीएम ने शांति बरतने की अपील की

यह भी संयोग है कि जब सुप्रीम कोर्ट अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाएगा तो बीजेपी केंद्र और उत्तरप्रदेश की सत्ता में काबिज है। कभी राम जन्म भूमि को लेकर 90 के दशक में आंदोलन के अगुवा रहे बीजेपी से सबसे ज्यादा संयम रखने की उम्मीद की जा रही है। इसकी एक बानगी तब देखने को मिली जब खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने देश से फैसले को सर आंखों पर रखने और हर हाल में शांति को बरककार करने की अपील की है।

असामाजिक तत्वों पर निगाह रखने की जरुरत

इसके बहुत ही सकारात्मक संदेश जाएंगे इसमें कोई दो राय नहीं है। तो वहीं उत्तरप्रदेश में योगी सरकार ने भी लोगों से संयम रखने और असामाजिक तत्वों के बातों में न बहकने की भी अपील की है जो बहुत कुछ कहता है। दूसरी तरफ संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी कहा है कि देश को शांति बरतने की आवश्यकता है। इसके अलावा सभी प्रमुख दलों ने भी लोगों से शांति और भाईचारा रखने की आवश्यकता पर बल दिया है। 

वास्तव में न सिर्फ आमजन अब mature हो गए है बल्कि राजनीतिक दलों में भी पहले की अपेक्षा गंभीरता देखने को मिलती है। जिससे इस बात को बल मिलता है कि शांति और सौहार्द पूर्ण वातावरण में फैसले को सुना जाएगा और उसे स्वीकार भी किया जाएगा।                
 

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