Tuesday, Jul 23, 2019

बेवजह की चिंता किसी खतरनाक बीमारी का लक्षण तो नहीं! जानिए कैसे मिलेगा छुटकारा

  • Updated on 6/29/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। OCD यानी की आब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑडर (Obsessive Complusive Disorder) ये नाम अधिकतर लोगों ने सुना है लेकिन इसके बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं। आब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑडर (Obsessive Complusive Disorder) वैसे तो सुनने और देखने में ये नाम मात्र तीन अक्शर का लगता है। लेकिन जब ये बीमारी के किसी को लग जाती है तो उसका पागल होना निश्चित है।

पागल इसलिए क्योंकि यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें इंसान वहीं सब चीजें दोहराने की कोशिश करता है जिसमें उसको संतुष्टि ना मिली हो और बल्कि एक बार नहीं बल्कि बार-बार इंसान उसी काम को दौहराता है। ये बीमारी (Dieases) उन लोगों को ज्यादा होती है जिन्हें स्ट्रेस (Stress) और हर समय चिंता (Anxiety) सताई रहती है।

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बता दें कि, ये बीमारी किसी भी तरह से हो सकती है जैसे इस बीमारी के अंदर इंसान को खुद को साफ रखने की लत लग जाती है, इसके अलावा इसमें इंसान गैस के नॉब को बार-बार चेक करता है जब तक वह पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हो जाता है, इस बीमारी का एक और मुख्य कारण यह भी है की इसमें इंसान बार-बार वही चीज करता है जो वो पहला कर चुका है।

आमतौर पर लोगों को एक बार में किसी काम या चीज से संतुष्टि हो जाती है लेकिन ओसीडी के मरीज (Patient) एक बार में किसी काम या चीज पर संतुष्ट नहीं हो पाते है जिसके लिए वे बार-बार उसी काम को दौहराते है। आइए ओसीडी से जुड़ी कुछ अन्य बातों के बारे में जानते हैं।

ओसीडी के लक्षण 

  • कीटाणुओं, गंदगी आदि के संपर्क में आने या दूसरों को दूषित कर देने का खतरा सताता रहता है।
  • किसी और को नुकसान पहुंचाने का डर रहता है 
  • सेक्स संबंधी बूरे ख्याल या फिर हिंसक ख्याल आना।
  • धर्म या नैतिक विचारों पर पागलपन की हद तक ध्यान देना
  • क्रम और समानता को लेकर यह सोचना कि सब कुछ परफेक्ट होना चाहिए।
  • किसी चीज को भाग्यशाली या दुर्भाग्यशाली मानने का अंधविश्वास।

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आमतौर पर कैसे होती है ओसीडी 

  • इस समस्या के दौरान इंसान का दिमाग एक जगह काम नहीं करता है और हर पल चिंता सताने लगती है।
  • बार-बार सफाई करने वाली गंदगी से डरते हैं। हर बार अपने आप को साफ सुथरा रखने की कोशिश करते हैं।
  • कुछ लोग बार-बार चीजों की जांच करते हैं जैसे- अवन बंद किया या नहीं, दरवाजा बंद किया या नहीं आदि। 
  • धर्म और पाप से डरने वाले लोग यह सोचते हैं कि अगर कुछ गलत हो गया तो भगवान हमें श्राप दे देंगे या फिर कुछ अनर्थ हो जाएगा।
  • गिनती करने वाले और चीजों को व्यवस्थित करने वाले क्रम और समानता से ऑब्सेस्ड होते हैं। उनमें से कुछ निश्चित संख्याओं, रंगों और अरेंजमेंट को लेकर अंधविश्वास हो सकता है।
  • चीजों को संभालकर रखने वाले इस चीज से डरते हैं कि अगर उन्होंने कुछ बाहर फेंका तो उनके साथ गलत हो जाएगा। और अपने इसी डर की वजह से वे गैरजरूरी चीजों को भी संभालकर रखते हैं।

ओसीडी में कैसा हो जाता है इंसान का व्यक्तित्व

  • चीजों को बार-बार चेक करने की लत लग जाती है जैसे, ताले, गैस, उपकरण, स्विच आदि।
  • साफ-सफाई में अधिक से अधिक समय लगाना। 
  • बेकार चीजों को इकट्ठा करना जैसे पुरानी रदी, खाने डिब्बे, या फिर बोटल आदि।
  • धर्म के डर से ज्यादा से ज्यादा पूजा में लगाना।
  • बेवजह की चीजों को क्रम से लगाना या उनको अरेंज करना।

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कैसे होता है इस बीमारी का इलाज 

1. पहला, अनावरण और प्रतिक्रिया बचाव (Exposure and Response Prevention) :  इस इलाज (Treatment) में आपको उन चीजों से रोकने के लिए जिन्हें आप बार-बार करते हैं इसके लिए एक थेरपी (Therapy) दी जाती है। इस थेरपी में आपको गंदी चीजें छुने को दिया जाता है जैसे अगर आप साफ-सफाई से ज्यादा ऑब्सेस्ड (obsessed) हैं तो आपको पब्लिक टॉयलेट (Public Toilet) के दरवाजों के हैंडल (handle) छूने के लिए कहा जा सकता है और इसके बाद आपको हाथ धोने से रोका जाता है। हालांकि, इसके बाद आपका मन मचलने लगेगा या आपको बेचैनी होने लगेगी लेकिन ऐसा करने से बार-बार धोने से जुड़ी आपकी घबराहट धीरे-धीरे कम हो जाएगी।

2. दूसरा, संज्ञानात्मक थेरपी (Cognitive Therapy) : इस थेरपी के अंदर पीड़ित को उसके जिम्मेदारियों के बारे में अहसास कराया जाता है और इंसान के दिमाग में आने वाले बूरे ख्यालों को रोकने के लिए उन्हें इनसे दूर हटने के लिए प्रोत्साहित (Encourage) किया जाता है। ओसीडी (OCD) में संज्ञानात्मक थेरपी की सबसे ज्यादा भूमिका लोगों को यह बताने के लिए होती है कि आप बिना किसी कंपल्सिव बिहेवियर के भी अपने ऑब्सेसिव ख्यालों पर किस तरह से स्वस्थ और प्रभावकारी रिएक्शन दे सकते हैं।

 

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