Wednesday, Oct 16, 2019
what is the relationship of china with mahabalipuram, where pm modi will meet xi jingping

महाबलीपुरम से क्या है चीन का नाता जहां शी जिनपिंग से PM मोदी करेंगे मुलाकात

  • Updated on 10/11/2019

नई दिल्ली/ प्रियंका शर्मा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) चीन (China) के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) का स्वागत तमिलनाडू (Tamil Nadu) के महाबलीपुरम (Mahabalipuram) में 11 अक्टूबर को करेंगे। दरअसल चीन के राष्ट्रपति भारत में अनौपचारिक सम्मेलन के लिए आने वाले हैं। आमतौर पर पीएम मोदी देश के राष्ट्राध्यक्ष की अगवानी दिल्ली में ही करते हैं लेकिन चीन के राष्ट्रपति से वे महाबलीपुरम में मुलाकात करेंगे। 2014 में भी पीए मोदी ने शी जिनपिंग से दिल्ली के बजाए अहमदाबाद में मुलाकात की थी। मंदिरों के शहर महाबलीपुरम में इस मुलाकात को खास कूटनितिक और ऐतिहासिक महत्व बताया जा रहा है।

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चीन के साथ ममलापुरम का है प्राचीन संबंध
दरअसल चीन के साथ ममलापुरम के प्राचीन संबंध से इस सम्मेलन को ऐतिहासिक बल मिलने की संभावना है। शक्तिशाली पल्लव शासकों का ममलापुरम का करीब 2000 साल पहले चीन के साथ खास संबंध था।, और पल्लव वंश का चीन के साथ भी संबंध रहा था। उन्होंने अपने शासनकाल में वहां दूत भेजे थे। 

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पुरातात्विक सबूतों से चीन के साथ संबंध का पता चलता है
पुरातत्वविद एस राजावेलू ने कहा कि तमिलनाडु के पूर्वी तट पर मिले पहली और दूसरी सदी के सेलाडॉन हमें चीनी समुद्री गतिविधियों के बारे में बताते हैं। उन्होंने कहा कि चीनी सिक्के और अन्य पुरातात्विक सबूतों से निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि वर्तमान ममलापुरम और कांचीपुरम जिले के तटीय क्षेत्रों समेत इन क्षेत्रों का चीन के साथ संबंध था।

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पल्लव शासन के दौरान चीनी यात्री यहां आए
ऐतिहासिक तथ्य बताते हैं कि कांचीपुरम में 7वीं सदी में पल्लव शासन के दौरान चीनी यात्री ह्वेन सांग आए थे और राजा महेंद्र पल्लव ने उनकी अगवानी की थी। अब करीब 1300 साल बाद पीएम नरेंद्र मोदी चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग का इस ऐतिहासिक नगरी में स्वागत करेंगे।

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व्यापारिक रिश्तों में संतुलन बनाने पर दिया जाएगा जोर
बता दें कि मोदी और शी भारत में दूसरे अनौपचारिक सम्मेलन में मुलाकात के दौरान वास्तविक नियंत्रण रेखा पर माहौल में स्थिरता कायम रखने और दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में संतुलन बनाने पर जोर देंगे। इस समिट से सीमा विवाद समाधान के अगले चरण और व्यापार घाटा कम करने के लिए चीन को भारतीय निर्यात बढ़ाने के उपाय तलाशने में मदद मिलेगी।

वहीं वुहान समिट में तय अजेंडे पर अब तक हुई प्रगति की समीक्षा भी होगी। इस मामले से वाकिफ लोगों ने बताया कि वुहान समिट के बाद भारत-चीन के बीच कई क्षेत्रों में साझेदारी को स्थिरता मिली है। मोदी और शी 2020 में दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्तों के 70 वर्ष पूरे होने पर होने वाले कार्यक्रम की रूपरेखा पर भी बातचीत करेंगे। 

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