Monday, Aug 08, 2022
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जानें क्या था Operation Trident? जिसकी सफलता से भारतीय नौसेना को मिली थी एक नई पहचान

  • Updated on 12/3/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। नेवी डे (Navy day) पर उन वीर नौसैनिक जवानों को याद किया जाता है, जो अपने वीरता का परिचय देते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए। इस दिन हम उन वीर सपूतों के जज्बे को सलाम करते हैं जिनके कारण भारत की समुद्री सीमा पर कोई समस्या नहीं आती। लेकिन हर साल 4 दिसंबर को ही नौसेना दिवस क्यों मनाया जाता है? इसके पीछे पाकिस्तान (Pakistan) से जुड़ी एक बेहद ही हैरान करने वाली कहानी है।

पाकिस्तानी नौसेना बेस पर किया था हमला
दरअसल, आज से करीब 49 साल पहले यानि कि 4 दिसंबर 1971 को भारतीय नौसैनिक जांबाजों ने पाकिस्तानी जल सीमा में घुसकर कराची (Karachi) नौसेना के बेस पर जबरदस्त हमला किया। माना जाता है कि इस कार्रवाई की एक वजह पाकिस्तान को एक हमले का मुंहतोड़ जवाब था। जिसमें पाकिस्तान की ओर से भारत के सीमाई इलाकों में हवाई हमला किया गया था। भारतीय नौसेना ने जिस तरह से दुश्मन को नुकसान पहुंचाया उससे वह युद्ध में संभल नहीं सका। भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ (Operation Trident) नाम दिया था।

ऑपरेशन ट्राइडेंट के पीछे की कहानी
भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 की लड़ाई शुरु होने से पहले अक्टूबर 1971 में नौसेना अध्यक्ष एडमिरल एसएम नंदा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) से मिलने पहुंचे। नौसेना की तैयारियों के बारे में बताने के बाद अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से पूछा कि अगर नौसेना कराची पर हमला करें, तो क्या इससे सरकार को राजनीतिक रुप से कोई आपत्ति हो सकती है।

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समुद्री के बाहर न हो कार्यवाई
इंदिरा गांधी ने जवाब देने से पहले एडमिरल के सवाल पर ही आपत्ति जताई। उन्होंने उल्टा एडमिरल से ही सवाल किया कि आप ऐसा क्यों पूछ रहे हैं। नंदा ने कहा कि 1965 में नौसेना से खास तौर पर कहा गया था कि वह भारतीय समुद्री सीमा से बाहर कोई कार्रवाई न करें। इंदिरा गांधी ने कुछ देर सोचा और अंग्रेजी में कहा कि ‘वेल एडमिरल, इफ देयर इज अ वार, देअर इज अ वार।' मतलब कि ‘अगर लड़ाई है तो लड़ाई है।’ प्रधानमंत्री (Prime Minister) के इस कथन के बाद नंदा ने उन्हें धन्यवाद दिया और कहा कि मैडम मुझे मेरा जवाब मिल गया।

बंद लिफाफे में हमले के आदेश
साल 1971 को भारत के द्वारा किए गए इस हमले में पाकिस्तान को बहुत भारी नुकसान हुआ। 4 दिसंबर के हमले में भारत ने पाकिस्तान के चार जंगी जहाजों को डुबो दिया था। साथ में कराची (Karachi) बंदरगाह के ईंधन भंडार को नुकसान हुआ। अनुमान है कि इस दौरान 500 से ज्यादा पाकिस्तानी नौसेनिकों की मौत हो गई। कहा जाता है कि इस हमले का आदेश बंद लिफाफे में नौसेना के पास पहुंचा था।

भारत ने अपने तीन युद्धपोतों INS निपत, INS निरघट और INS वीर की सहायता से कराची बंदरगाह पर हमला किया। भारत से युद्धपोत गुजरात (Gujrat) के ओखा पोर्ट से पाकिस्तान के लिए दोपहर 2 बजे रवाना हुए थे। भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के PNS खैबर, PNS शाहजहां और PNS मुहाफिज की जलसमाधि बना दी।

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3 जहाजों को डुबो दिया
यह पहली लड़ाई थी जब एशिया महाद्वीप में एंटी शिप मिसाइल का इस्तेमाल हुआ था। सिर्फ 4 मिसाइल के सहारे भारत ने पाकिस्तानी नौसेना के 3 जहाजों को डुबो दिया। इस ऑपरेशन (Operation) में भारत के सभी सैनिक सुरक्षित थे। कहा जाता है कि भारतीय जहाज रात में वापस लौट रहे थे। तभी पाकिस्तान की वायु सेना (Air Force) ने हमला करने का सोचा। लेकिन अंधेरे में तीर सही से नहीं लगा और अपने ही एक जहाज पर हमला कर दिया।

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