what will we have when our nation get 5 trillion economy

5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए चुकानी होगी कीमत, तभी बदलेगी देश की सूरत

  • Updated on 7/10/2019

प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई मोदी सरकार 2.0 का पहला बजट जिसमें देश की लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर में बदलने का लक्ष्य रखा गया। तो जैसे ही पहला बजट पेश हुआ पेट्रोल-डीजल पर सेस लगने से उनके दामों में सिर्फ 1 रुपये की वृद्धी हो गई। अरे भई! देश को आगे बढ़ाना है कि नहीं? जब देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना है, देश को बचाना है तो इतना तो आपको करना पड़ेगा। इस चुनाव में पूरे देश के तारणहार को जिताने का मकसद यही तो था कि सूखी रोटी खा लेंगे पर देश को बचाएंगे। हमने अपने देश के विकास के लिए दुनिया का सबसे ताकतवर नेता चुना है। कोई और इस लायक था ही नहीं जिसे हम अपनी सिर आंखो पर बिठा सकें।

Navodayatimesअब जब देश की अर्थव्यवस्था अभी लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर की है तो बिहार में मरने वालों की संख्या में कमी आई या नहीं? जहां साल 2014 में लगभग 350 से ज्यादा बच्चे मरे थे वहां अब केवल 150 ही तो मरे हैं। देश में विकास हुआ होगा तभी मरने वालों की संख्या में कमी आई। बेकार में सड़कों पर उतकर अगर बिहार में प्रदर्शन करेंगे तो गरीब जनता पर केस दर्ज होना तो बनता है!

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ऐसे विकास नहीं होता, बड़े लोगों की तरह मेहनत करनी पड़ती है। दिमाग लगाना पड़ता है तब जाकर भारत के सवा सौ करोड़ देशवासियों को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का पाठ समझ आता है। कुछ 'बेकार में दिमाग लगाने वाले' बुद्धिजीवी मानते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था 3 ट्रिलियन डॉलर हो या 5 ट्रिलियन डॉलर गरीब लोगों को इससे कुछ खास लाभ नहीं होता।

हाल ही में आये आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के हिसाब से देश में सबसे ज़्यादा न्यूनतम मजदूरी 538 रुपये दैनिक दिल्ली में है और सबसे कम न्यूनतम मजदूरी नगालैंड में 115 रुपये है। 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में नगालैंड वाले 115 रुपये पर हैं और दिल्ली वाले 538 रुपये रोज पर हैं।

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एक ही देश के दो राज्यों में आय का इतना बड़ा अंतर ये बताता है कि अर्थव्यवस्था कहीं भी पहुंच जाए, जिसकी आय अधिक होगी लाभ सबसे ज्यादा उसी को मिलेगा। अगर एक क्षेत्र की आय 100 करोड़ से बढ़कर 200 करोड़ हो जाती है तो उसमें बड़े उद्योगपतियों की आय का प्रतिशत 98.5 होगा बाकी बचीकुची आय मध्यवर्गीयम और गरीब लोगों की होगी।

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उसी प्रकार देश के दूर दराज गांव और अविकसित इलाके 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की जादू की छड़ी घुमाते ही विकसित थोड़े ही न हो जाएंगे। अभी इंतजार करो कम से कम 20 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था होने का तब कहीं जाके गरीबों का नंबर आएगा। फिलहाल 'नून रोटी खाओ देश को बचाओ' और फिर हमारे ताकतवर नेता को विदेशों में देखने से ही हमारी तो आधी भूख मर जाती है। सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। 

लेखिका: कामिनी बिष्ट

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

 

 

 

 

 

 

 

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