Saturday, Feb 22, 2020
when kejriwal and amit shah were so enthralled that this is my delhi only they will win

जब केजरीवाल और अमित शाह में ठन गई कि यह जो दिल्ली है मेरी ... वो ही जीतेंगे

  • Updated on 1/25/2020

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election) में बाजी मारने के लिये नेताओं की नेतागिरी अपने चरम पर है। एक तरफ गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) अपने चुनावी शाम का अंत एक सामान्य बीजेपी कार्यकर्ता के घर भोजन करके बिताते है, जो अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को नागवार गुजरता है। वे अमित शाह पर तंज कसने से भी नहीं चूकते है। दिल्ली के माननीय सीएम केजरीवाल को यह कतई पसंद नहीं है कि कोई आकर उनके दिल्ली में जिनके वे कथित 'बड़ा बेटा' बनकर पिछले 5 साल से सेवा करते रहे हैं, गृह मंत्री इस तरह भोजन करें। 

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जब शाह नब्ज टटोलने उतरे घरों में
उनके दुखती रग का दर्द यहीं है कि अमित शाह ऐसे ही भोजन कर-कर के पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा जाते है। जिसका लाभ बीजेपी को लोकसभा चुनाव 2014, 2019 में उत्तरप्रदेश जैसे रेगिस्तान भरी राजनीति में भी कभी 80 में 73 सीटें तो कभी 62 तक पहुंचा कर हरियाली ला देते है। उनका तर्क है कि अगर गृह मंत्री भोजन करने के बजाए शाहीन बाग पर विरोध करने वाले लोगों को ध्यान से सुनें तो बेहतर होता।

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CAA कानून की जरुरत ही नहीं देश में

यानी देश का बहुत भला होता अगर गैर जरुरी CAA को लेकर कानून नहीं बनाते। लोगों को घरों से कपकपाती ठंड में नहीं निकलना पड़ता। फिर शाहीन बाग भी इतना चर्चा में नहीं आता। फिर कपिल मिश्रा को भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबला वाला बयान भी नहीं देना पड़ता। ऊपर से फिर चुनाव आयोग को कपिल पर डंडा भी नहीं चलाना पड़ता। यानी बहुत ही शांत माहौल में मतलब धर्मनिरपेक्षता की एक मिसाल दिल्ली के चुनाव में दिखाई पड़ता। लेकिन सब पर अमित शाह ने पानी फेर दिया है।

Arvind kejriwal in public meeting

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शाहीन बाग में प्रोटेस्ट की जरुरत ही नहीं होती यदि... 
पता नहीं देश के मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह किस मिट्टी के बने हैं। जो जल्दी से CAA पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के वापस लेने की मांगों को एकदम अनसुनी ही कर बैठे हैं। यहां तक कि महिलाएं, बच्चे जो शाहीन बाग में खुले आकाश में विरोध कर रहे हैं, उसका भी दर्द नहीं देखा जाता है। भले ही अमित शाह ने राष्ट्रीय अध्यक्ष का कमान जेपी नड्डा को थमा दिया हो लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी के तारणहार के तौर पर अपनी भूमिका को तेज ही कर दिये है। जिस पर अरविंद केजरीवाल को गहरी आपत्ति है। वो तो मुस्करा दिये थे जब नड्डा को अमित शाह ने सौंप दिया राजपाठ, लेकिन यह तो उल्टी गंगा ही बहाने में लगे हुए है। भला पद दे देने के बाद कोई इतनी गहनता से चुनाव में कैसे लग जाता है। 

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एक केजरीवाल को घेरने कितने महारथी उतरे है दिल्ली की गलियों में
तभी अरविंद केजरीवाल अपने पहले और एक मात्र किला को बचाने के लिये बीजेपी के इतने महारथी को अपने सामने देखने पर चिंतित हो जाते हैं। उन्हें लगने लगता है कि देश के एक मात्र अभिमन्यू को घेरने के लिये आखिर इतनी सेना को क्यों बुलाया जा रहा है। कभी मोदी रामलीला से उन्हें ललकारते है, इसका असर थोड़ा सा कम होने लगता है तो अमित शाह दिल्ली की सड़कों पर पैदल चलने लगते है। फिर एक सामान्य बीजेपी के कार्यकर्ता के घर खाना खाते है तो चुपके से खाकर निकल जाते। लेकिन यह कौन-सी बात है कि आप खाना खाने की फोटो को वायरल भी कर देते हैं। जैसे अमित शाह चिढ़ा रहे हो कि देखो केजरीवाल नौटंकी में हम तुम्हारे... है।

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जब केजरीवाल पड़ गए गहरी सोच में
लेकिन अब केजरीवाल इस सोच में डूब जाते है कि तो उन्हें यह विचार आता है कि लगता है कि इस अमित शाह को अपनी पिछली दुर्गति 2015 विधानसभा चुनाव का ध्यान नहीं रहा है। थोड़ा सा ध्यान आया तो जेपी नड्डा को अध्यक्ष का पद देकर दूर से दिल्ली के लोकप्रिय सीएम पर ढ़ेपा फेंक रहे है। जैसे अपनी पुरानी बेइज्जती का बदला लेने के लिये किसी भी हद तक जाने को तैयार हो गए हैं।    


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केजरीवाल ने थपथपाई अपनी पीठ
अरविंद केजरीवाल अपने-आप को हिम्मत देते है कि पूरे बीजेपी वाले को पता नहीं है कि हमारे तरकश में कौन-कौन सा तीर है जो क्या क्या कमाल कर जाएंगे इसका आभास तो सिर्फ उन्हें ही है। उन्होंने सरपट प्रेस कांफ्रेस बुलाई और दनादन शाह पर सामत लाने की तैयारी तेज कर दी। एक सांस में बोल गए कि गृह मंत्री याद रखो कि जिस के घर खाना खाते हो उसका ध्यान पिछले 5 साल से उनकी सरकार ही रखी है। आपने तो थाली से प्याज ही गायब कर दी। उनके बच्चे की पढ़ाई का ध्यान ऐसा रखा कि दिल्ली के स्कूलों को बेहतर बनाकर ही दम लिये है। आप जिस घर के अभी-अभी पानी पिये हो उसे भी हमारी सरकार ने ही पहुंचाया है। इतना ही नहीं 24 घंटे बिजली भी दी, उपर से 200 यूनिट तक फ्री भी कर दिया। 

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दिल्ली को बदलने का किया दावा
आप यह भी अमित शाह नहीं भूलें कि जिस घर की महिला ने आपके लिये खाना बनाया उसके लिये दिल्ली में फ्री बस यात्रा यह लोकप्रिय सीएम केजरीवाल ही सुनिश्चित किया। आप की यही आदत अच्छी नहीं लगती है कि जब इन लोगों को हमें वोट करना चाहिये तो उनके घर पहुंचकर खाना खा लेते हैं। लेकिन याद रखिये कि दिल्ली को हमने बदला है, आप नहीं। एक बात और बता दूं कि पूरी दिल्ली मेरे लिये एक परिवार है। बस 8 फरवरी का इंतजार कीजिये। आप तो 5 साल में किसी के घर पहुंचते है। हम तो रोज दिल्ली की गलियों से गुजरते हैं।

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