Tuesday, Nov 19, 2019
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जेलों, पुलिस थानों और अस्पतालों से अपराधियों की फरारी कब रुकेगी 

  • Updated on 6/25/2019

लचर प्रबंधन के चलते जहां भारतीय जेलें उनमें बंद कैदियोंं द्वारा अपनी आपराधिक गतिविधियां चलाने का अड्डा बन गई हैं वहीं जेल अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों की लापरवाही के चलते जेलों, पुलिस थानों और अस्पतालों के जेल वार्डों में उपचाराधीन कैदी रोज फरार हो रहे हैं जो मात्र 18 दिनों के निम्र उदाहरणों से स्पष्ट है : 

  • 04 जून को बिहार के नवादा में पुलिस पर पथराव एवं सरकारी वाहन को क्षतिग्रस्त करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया कैदी बलबीर यादव पानी पीने के बहाने चौकीदार को चकमा देकर थाने से फरार हो गया। 
  • 11 जून को उत्तर प्रदेश में प्रयागराज जिले के बहरिया थाने का लॉकअप में सेंंध लगाकर वहां से 7 अपराधी भाग निकले। 
  • 12 जून को हैदराबाद से 6 पुलिस कर्मियों द्वारा रेल से पेशी के लिए दिल्ली लाया जा रहा कैदी आगरा के निकट हथकड़ी तोड़ कर फरार हो गया।  
  • 17 जून को गुरुग्राम के अस्पताल में भर्ती एक कैदी शौच के लिए बाथरूम जाने के बहाने खिड़की तोड़ कर भाग निकला। 
  • 18 जून को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा कैदी राजस्थान की करोली जिला ओपन जेल से फरार हो गया। 
  • 20 जून को बिहार में नवादा जिले के सदर अस्पताल के जेल वार्ड में इलाज के लिए भर्ती कैदी शौचालय की खिड़की तोड़ कर चम्पत हो गया। 
  • 20 जून को छत्तीसगढ़ में रायगढ़ की जिला अदालत में पेशी के लिए लाई गई महिला कैदी 2 आरक्षकों को चकमा देकर फरार हो गई।
  • 21 जून को ही राजस्थान में झालावाड़ की जिला जेल से 3 अलग-अलग बलात्कार के केसों के आरोपी कम्बलों को रस्से के तौर पर इस्तेमाल करके 18 फुट ऊंची जेल की दीवार फांद कर भाग निकले।   
  • 22 जून को नीमच की कनावटी जेल में 4 आरोपी बैरक के दो सरिए काटने के बाद रस्सी के सहारे दीवार फांद कर भाग गए। 
  • यही नहीं, 22 जून को बरगाड़ी मामले में मुख्य आरोपी डेरा प्रेमी मङ्क्षहद्र पाल उर्फ बिट्टïू की नाभा की नई जिला जेल में हत्या कर दी गई।

जेलों, पुलिस थानों और अस्पतालों के जेल वार्डों से कैदियों की फरारी जहां संबंधित अधिकारियों की कारगुजारी पर प्रश्रचिन्ह लगाती है वहीं जेलों और पुलिस हिरासत से अपराधियों का फरार होना सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा भी है। लिहाजा ऐसी घटनाओं को रोकनेके लिए संबंधित स्टाफ का निलंबन ही काफी नहीं है बल्कि इसके लिए उनको नौकरी से निकालने के साथ-साथ कठोर सजा देने जैसे कदम उठाने चाहिएं।     —विजय कुमार  

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