Sunday, Dec 04, 2022
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where is the problem in the brain of an epileptic patient, iit''''s technology will tell in minutes

मिर्गी मरीज के दिमाग में कहां है दिक्कत मिनटों में बताएगी आईआईटी की तकनीकि

  • Updated on 8/8/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। विश्व में मिर्गी चौथी सबसे कॉमन बीमारियों में से एक है। जिससे विश्व भर में करोड़ों लोग प्रभावित हैं। अकेले भारत में मिर्गी से प्रभावित लोगों की संख्या तकरीबन 1 करोड़ है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईटी) दिल्ली ने एक ऐसी तकनीकि विकसित की है। जिससे मिर्गी मरीजों के मस्तिष्क के उस हिस्से का पता चल सकेगा जहां उन्हें सर्जरी की जरूरत होगी। इस तकनीक को शोधकर्ताओं ने नॉन इनवेसिव ईईजी बेस्ड ब्रेन सोर्स लोकलाइजेशन नाम दिया है।

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नॉन इनवेसिव ईईजी बेस्ड ब्रेन सोर्स लोकलाइजेशन से आसान होगा मिर्गी मरीजों का इलाज
अब से पहले मैग्नेटोइंसेफेलोग्रॉफी (एमईजी) तकनीकि के जरिए पता चल जाता है कि दिमाग के किस हिस्से में दिक्कत है। एमईजी तकनीकि देश में बहुत कम जगह उपलब्ध है। इसमें क्रेनियोटॉमी के जरिए मिर्गी मरीजों की खोपड़ी में छेद कर ब्रेन में इलेक्ट्रोड लगाया जाता था। इस प्रक्रिया में 2 से लेकर 8 घंटे तक लगते हैें। तब जाकर कहीं मिर्गी के लिए मस्तिष्क में जिम्मेदार जोन का पता चलता है।

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मस्तिष्क के अंदर की संरचना न्यूरोसर्जन्स के लिए भी रही है बड़ी चुनौती
यह सर्जरी भी मरीजों के लिए आसान नहीं है। मिर्गी से प्रभावित मनुष्य के मस्तिष्क की असामान्य संरचना इसका कारण होती है। ऐसे मरीजों को ब्रेन सर्जरी करानी होती है। मस्तिष्क के अंदर की संरचना के कारण न्यूरोसर्जन्स के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती का काम रहा है। आईआईटी दिल्ली के इलेक्ट्रिल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. ललन कुमार ने बताया कि इस तकनीक के जरिए इलेक्ट्रिकल सिग्नल वाले जोन का सटीक पता चल सकेगा।

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इस प्रक्रिया में मरीज के सिर में लगाए जाएंगे सेंसर 
साथ ही इस तकनीक में मरीज को किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। इस प्रक्रिया में मरीज के सिर पर कुछ सेंसर लगाए जाएंगे जो चंद मिनटों में बता देंगे कि दिमाग के किस हिस्से में सिग्नल और असामान्य संरचना है। इससे सर्जरी करने वाले डॉक्टर को पता चल जाएगा कि सर्जरी किस हिस्से में होनी है। हमने मिर्गी मरीजों पर ट्रायल भी किए हैं जिसके सकारात्मक परिणाम के बाद नेचर साइंस पत्रिका में ये शोध प्रकाशित हुआ है।
 

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