Sunday, Nov 28, 2021
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जो था कभी शहर फिरोजाबाद........अब दिखते हैं अवशेष

  • Updated on 9/24/2021

नई दिल्ली। अनामिका सिंह। ‘कोस-कोस पर पानी बदले, चार कोस पर बानी’ यानि पानी का स्वाद हर कोस पर बदलता है उसी तरह भारत देश एक ऐसी समृद्ध संस्कृति वाला देश है जहां चार कोस पर भाषा, संस्कृति, सभ्यता व इतिहास सब बदल जाता है और यह बात दिल्ली के लिए बिल्कुल सटीक बैठती है। आज हम आपकों शहरों में कई शहर समेटे दिल्ली के छठें शहर जिसे शहर फिरोजाबाद कहा जाता है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।
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पुराने शहरों के पत्थरों का हुआ था फिरोजाबाद में इस्तेमाल
फिरोजशाह तुगलक ने 1354-1374 में बंगाल और सिंध की यात्रा से लौटकर एक नए शहर फिरोजाबाद की बुनियाद डाली जो दिल्ली का छठा शहर बना। इतिहासकारों का कहना है कि इस शहर को बसाने के लिए दिल्ली के पुराने शहरों के पत्थरों का बहुत इस्तेमाल किया गया। शाही महल का नाम कुश्के फिरोजशाह था। महल इतना बडा था कि उसमें दिल्ली के 12 गांव इंद्रप्रस्थ कस्बा, सराय शेखमलिक, सराय शेख अबुबकर तूसी, गादीपुर, खेतवाडा की जमीन, जाहरामट की जमीन, अंघोसी की जमीन, सराय मलिक की जमीन, अराजी मकबरा सुलताना रजिया, मौजा भार, महरौली और सुलतानपुर शामिल थे। 
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समकालीन इतिहासकार बताते हैं शहर मौजूदा दिल्ली से दुगुना था
समकालीन इतिहासकार शम्स सराज ने लिखा है कि यह शहर मौजूदा दिल्ली से दुगुना था। हालांकि फिरोजशाह के चार महल थे महल सहनगुलीना, महल छज्जा चैबीन, महल बारेआम व कोटला फिरोजशाह। जिसमें से अब मात्र कोटला फिरोजशाह ही देखा जा सकता है। कोटला फिरोजशाह यहां देखने के लिए दो चीजें ही अब शेष बची हैं जिनमें पहली है अशोक की लाट जिसे 1356 ईसवीं में मेरठ से लाकर लगाया गया था और दूसरी जामा मस्जिद जिसका नक्शा तैमूर लंग को इतना पसंद आया कि उसने इसकी नकल समरकंद में बनवाई है। इसके अलावा बावडी भी देखी जा सकती है।
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कुश्के शिकार जहांनुमा
फिरोजशाह ने फिरोजाबाद के बाहर कुश्के शिकार जहांनुमा बनाया जहां अब सिर्फ दो ही इमारतें खडी हैं। जिनमें से एक चैबुर्जी मस्जिद है और दूसरी पीर गायब है। जहां फिरोजशाह द्वारा अशोक की दूसरी लाट को लगवाया गया है। इसका इस्तेमाल फिरोजशाह शिकारगाह की तरह करता था।

बेगमपुर मस्जिद
बेगमपुर मस्जिद का निर्माण 1387 ईसवीं में हुआ जोकि बेगमपुर गांव में घुसते ही विजयमंडल के पास बना है। एक बडे चबुतरे पर बनी एक मंजिला मस्जिद की छत पर 64 गुंबद हैं। इस मस्जिद के आस-पास घनी आबादी है और यह सफदरजंग मकबरे से करीब दो मील दक्षिण में कुतुब को जाती सडक पर पडती है।

विजयमंडल
बेगमपुर के पास फिरोजशाह का बनवाया एक मकान है जिसे जहांनुमा या विजयमंडल और बेदी मंडल भी कहा जाता है। जिसे एक उंचे टीले पर बनाया गया था। यह एक बुर्ज और चार दरवाजों का कमरा है, इस पर से बादशाह अपनी सेना को देखा करता था।
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खिडकी मस्जिद
बेगमपुर से डेढ मील दक्षिण-पूर्व में और कुतुब-तुगलकाबाद रोड पर खिडकी नामक गांव में खिडकी मस्जिद का निर्माण करवाया। यह तीन खंड की इमारत है। मस्जिद में नौ जगह मिले हुए नौ-नौ बुर्ज बने हैं हर बुर्ज के नीचे चार खंभे है जिससे इसकी खूबसूरती बढ जाती है।

कदम शरीफ
लाहौरी गेट के पास बनी यह दरगाह बहुत विख्यात है जोकि फिरोजशाह के बेटे फतहखां की कब्र है और इसे 1374 ई में बनाया गया। जिसमें हजरत मोहम्मद साहब के चरण का निशान लगा हुआ है। इमारत एक चबूतरे पर बनी हुई है जो 78 फुट लंबा तथा 36 फुट चैडा व साढे 5 फुट उंचा है। पूर्व व पश्चिम में पक्के दालानों में फिरोजशाह के परिजनों की कब्रें हैं जोकि मुसलमानों का तीर्थस्थान है और यहां हर वर्ष मेला लगता है व पंखा चढाया जाता है।
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जाने फिरोजशाह से जुडा इतिहास
निःसंतान मोहम्मद तुगलक की मृत्यु के बाद उसका भतीजा फिरोजशाह तुगलक 1351 ईसवीं में गद्दी पर बैठा और उसने 1388 ईसवीं तक राज्य किया। नेकदिल व वास्तुप्रेमी फिरोजशाह ने सख्त अकाल पडने पर जनता की रक्षा के लिए यमुना और सतलुज से दो नहरें निकलवाईं और ऐसा करने वाला वो पहला शासक था। इतिहासकार फरिश्ते ने लिखा है कि फिरोजशाह ने अपने शासन के दौरान 50 बांध, 40 मस्जिदें, 30 विद्यापीठ, 100 धर्मशालाएं, तीस हौज, 100 हमाम और 150 पुल बनवाए थे।
 

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