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Who helps his father in farms and how he becomes ISRO rocket man

जानिए, खेतों में पिता की मदद करने वाला कैसे बना इसरो का 'रॉकेट मैन'

  • Updated on 7/30/2019

नई दिल्ली/वरूण कुमार गुप्ता। चंद्रमा (Moon) पर भारत (India) अपना दूसरा महत्वाकांक्षी मिशन 'चंद्रयान-2'  (Chandrayan-2) आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के श्रीहरिकोटा (Shriharikota) से अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट लॉन्चर GSLV Mk III के जरिये चांद की सफर पर निकल चुका है। ये अंतरिक्ष में भारत की छवि बनाने के लिए एक लंबी छलांग साबित हो सकती है। क्योंकि अभी तक दुनिया के पांच देश ही चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करा पाए हैं। ये देश हैं अमेरिका, रूस, यूरोप, चीन और जापान. इसके बाद भारत ऐसा करने वाला छठा देश होगा।

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लेकिन क्या आपको पता है इस महत्वाकांक्षी मिशन के पीछे जिस इंसान ने 'चंद्रयान-2' की अपनी टीम के साथ सालों की मेहनत से भारत के सपने को साकार किया है वो कैसे ISRO का अध्यक्ष  बना। जी हां आप सही सोच रहे हैं हम बात कर रहे हैं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष के सिवन (Kailasavadivoo Sivan) के बारे में।

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सिवन ने सरकारी स्कूल से ली है शिक्षा

तमिलनाडु (Tamil Nadu) के कन्याकुमारी (Kanyakumari0 जिले के सराक्कलविलाई गांव के एक किसान के बेटे कैलाशवडीवू सिवन आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष का पद गरिमा बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा वो चंद्रयान-2 मिशन का नेतृत्व भी कर रहे हैं। सिवन ने एक सरकारी स्कूल से अपनी शिक्षा ली है। उन्होंने अपनी स्कूलिंग में तमिल भाषा में पूरी की है। नागेरकोयल के एसटी हिंदू कॉलेज से उन्होंने स्नातक किया। सिवन ने 1980 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है।

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सिवन स्नातक करने वाले अपने परिवार के पहले सदस्य

इसके बाद सिवन ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसिज (IISC) से इंजीनियरिंग में मास्टर्स किया। 2006 में उन्होंने IIT बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी की। बता दें कि सिवन स्नातक करने वाले अपने परिवार के पहले सदस्य हैं। उनके भाई और बहन गरीबी के कारण अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाए। पर सिवन अपने परिवार का नाम अब पूरे विश्व में रौशन कर रहे हैं। और इस बात का उनके परिवार वालों को जरा भी घमंड नहीं है।   

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खेतों में करते थे अपने पिता की मदद 

सिवन कहते हैं की 'जब मैं कॉलेज में था तो मैं खेतों में अपने पिता की मदद किया करता था। यही कारण था कि पिता ने मेरा दाखिला घर के पास वाले कॉलेज में कराया था। जब मैंने 100 प्रतिशत अंकों के साथ Bsc (गणित) पूरी कर ली तो उन्होंने अपना मन बदल लिया। मेरा बचपन बिना जूतों और सैंडल के गुजरा है। मैं कॉलेज तक धोती पहना करता था। जब मैं MIT में गया तब पहली बार मैंने पैंट पहनी थी।' 

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कहा जाता है ISRO का रॉकेट मैन

इसरो अध्यक्ष के सिवन ने 1982 में इसरो में पहली बार कार्यरत हुए। यहां उन्होंने लगभग हर रॉकेट कार्यक्रम में भाग लिया है। उन्होंने जनवरी 2018 में इसरो के अध्यक्ष का पद का भार संभाला। पहले वो विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) के निदेशक थे। ये सेंटर रॉकेट बनाता है। उन्हें साइक्रोजेनिक इंजन, PSLV, GSLV, और रियूसेबल लॉन्च व्हीकल कार्यक्रमों में अहम योगदान के लिए इसरो का रॉकेट मैन भी कहा जाता है। 

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तमिल क्लासिकल गाने सुनना पसंद करते हैं सिवन

सिवन के हाथ सबसे पहली और सबसे बड़ी कमयाबी 15 फरवरी 2017 को लगी। जब भारत द्वारा एकसाथ 104 उपग्रहों को लॉन्च करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। ये इसरो का विश्व रिकॉर्ड भी है। रॉकेट विशेषज्ञ सिवन को खाली समय में तमिल क्लासिकल गाने सुनना और बागवानी करना पसंद है। उनकी पसंदीदा फिल्म राजेश-खन्ना की 1969 में आई आराधना है।

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 24 घंटे के अंदर ठीक करवाई चंद्रयान-2 की तकनीकी दिक्कत

15 जुलाई को जब चंद्रयान-2 अपने मिशन के लिए उड़ान भरने ही वाला था कि कुछ घंटों पहले तकनीकी कारणों से इसे रोकना पड़ा। इसके बाद सिवन ने एक उच्च स्तरीय टीम बनाई ताकि दिक्कत का पता लगाया जा सके और इसे 24 घंटे के अंदर ठीक कर दिया और सात दिनों बाद चंद्रयान-2 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 घंटे में तकनीकी खामी को दूर करने के लिए इसरो के वैज्ञानिकों की प्रशंसा की थी।

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