Sunday, Sep 26, 2021
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कोरोना को लेकर दुनिया को डराने में लगा है WHO! जानें कब- कब, क्या दी जानकारी

  • Updated on 5/15/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना वायरस की वैक्सीन तैयार होने में कम से कम 12 से 18 महीने लगेंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मार्च में यह कह कर जो उम्मीद जगाई थी अब उस पर पानी फेर दिया गया है। अब कहा जा रहा है कि शायद दुनिया को इस वायरस के साथ ही जीना होगा। ऐसे ही रवैये की वजह से अमेरिका लगातार डब्ल्यूएचओ की आलोचना कर रहा है।

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डब्ल्यूएचओ प्रमुख टीए गिब्रयेसॉस का कथन तो और चौंकाने वाला है। उन्होंने लॉकडाउन को लेकर दुनिया को अगाह किया है कि इसमें ढील से संक्रमण की रफ्तार बढ़ सकती है। मजे की बात तो यह है कि चीन जिस पर इस बीमारी को छुपाकर दुनियाभर में फैलाने का आरोप है, में लॉकडाउन नहीं है। जहां दुनिया कोरोना से लड़ने में परेशान है, वह अपनी आक्रामक सैनिक और व्यापारिक नीतियों को लागू करने में लगा है। गिब्रयेसॉस पर कोरोना को लेकर चीन के हित में वक्तव्य जारी करने का आरोप है जिसे डब्ल्यूएचओ भी मान चुका है। आइए देखते हैं कि डब्ल्यूएचओ ने इस वायरस को लेकर दुनिया को कब-कब क्या जानकारी दीः-

31 दिसम्बर 2019ः डब्ल्यूएचओ ने दुनिया को जानकारी दी कि उसे चीन की वुहान से खास तरह के न्यूमोनिया के अनेक मामलों की जानकारी मिली है। इनकी वजह एक नोवल कोरोनावायरस है।

01 जनवरी 2020ः चीन से सूचना मिलने के बाद डब्ल्यूएचओ ने इंसीडेंट मैनेजमेंट सपोर्ट टीम (आईएमएसटी) का गठन किया ताकि किसी भी महामारी से निपटने के उपाय शुरू किए जाएं।

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04 जनवरीः डब्ल्यूएचओ के ट्विटर हैंडिल से वुहान के न्यूमोनिया की जानकारी दी गई मगर कहा गया कि इससे कोई मौत नहीं हुई है। वायरस को कम घातक आंका गया।

05 जनवरीः पहली बार डब्ल्यूएचओ ने दुनिया के मीडिया को यह जानकारी अधिकारिक रूप से दी कि चीन के वुहान में एक नए वायरस से बीमारी फैल रही है। मगर इसके इंसान से इंसान में फैलने के बारे में कोई पुख्ता साक्ष्य न होने की बात भी कही।

10 जनवरीः डब्ल्यूएचओ ने सभी सदस्य देशों को सचेत करते हुए ऑनलाइन तकनीकी दिशानिर्देश भेजे कि वे अपने यहां बीमारी की आशंका वाले मामलों को कैसे पहचाने, कैसे जांच करें और किस तरह प्रबंध करें कि यह बीमारी अन्य लोगों में न फैले।

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14 जनवरीः डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस के संबंध में अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बताया कि इस बीमारी के इंसान से इंसान में फैलने के बहुत ही सीमित संकेत हैं। अगर ऐसा होता है तो इसके बड़े पैमाने पर फैलने की आशंका है।

22 जनवरीः जांच के लिए चीन पहुंचे डब्ल्यूएचओ के दल ने वक्तव्य जारी किया कि यह बीमारी इंसान से इंसान के बीच फैल रही है, इसके साक्ष्य मिले हैं, मगर संक्रमण के प्रसार को जानने के लिए अभी और जांच की जरूरत है।

23 जनवरीः डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने आपात कमेटी की बैठक बुलाई। इसमें शामिल हुए सदस्य तब तक उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस बात के लिए एक मत नहीं हुए कि इसे वैश्विक आपदा घोषित किया जाए या नहीं।

28 जनवरीः डब्ल्यूएचओ का प्रतिनिधिमंडल महानिदेशक के नेतृत्व में चीन पहुंचा। चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों से मुलाकात कर स्थिति का आकलन किया और संक्रमण के साक्ष्य एकत्र किए।

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30 जनवरीः डब्ल्यूएचओ की आपात कमेटी की बैठक फिर से बुलाई गई। इसमें सभी सदस्यों ने एकमत से सहमति जताई कि सभी देशों के लिए पब्लिक हैल्थ इमरेजैंसी घोषित कर दी जाए।

03 फरवरीः डब्ल्युएचओ ने विश्व समुदाय को बीमारी के खिलाफ रणनीतिक तैयारी और निपटने के तरीकों से संबंधित प्लान जारी किया।

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11 मार्चः दुनिया के अन्य देशों में भी तेजी से फैल रही कोविड-19 को डब्ल्यूएचओ ने महामारी घोषित किया और बताया कि संक्रमण खतरनाक स्तर पर है।

18 मार्चः डब्ल्यूएचओ ने सदस्य देशों के साथ मिलकर कोविड-19 की दवाओं के परीक्षण के लिए सोलिडेरिटी ट्रायल शुरू किया। वैक्सीन तैयार होने में 12 से 18 महीने का समय लगने की संभावना जताई।

14 मईः डब्ल्यूएच ने आशंका जताई कि यह भी संभव है कि एचआईवी की तरह कोरोना का वैक्सीन भी तैयार हो पाए।

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