Monday, Oct 25, 2021
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इस जानवर की वजह से Corona ने बदला रूप, डेनमार्क में हड़कंप, क्या वैक्सीन भी हो जाएंगी बेकार?

  • Updated on 11/9/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना महामारी का दूसरा चरण दुनियाभर में देखने को मिल रहा है। इस बार ये चरण पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक और गंभीर माना जाना रहा है। दुनियाभर के देशों में से सबसे जटिल मामले डेनमार्क में देखने को मिले हैं। यहां अलग किस्म के कोरोना संक्रमित मामलों की पहचान की गई है। ये सभी 214 मामले मिंक यानी उदबिलाव से जुड़े बताए जा रहे हैं। 

एक रिपोर्ट के अनुसार, बीते पांच नवंबर को 12 मामलों में एक खास किस्मे की कोरोना स्ट्रेन मिली है जिसके होने से दुनिया में नए खतरे की आशंकाएं जताई जाने लगी हैं। इस बारे में रॉयटर की रिपोर्ट की माने तो कोरोना वायरस में हुए इस बड़े बदलाव को लेकर डेनमार्क की सरकार एक करोड़ 70 लाख उदबिलाव को मारने की योजना बना रही है। 

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वहीँ, इस बारे में विश्वा स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के अधिकारियों का कहना है कि ऊदबिलाव नए कोरोना वायरस के लिए एक स्टोर साबित हुए हैं। डेनमार्क में मिली कोरोना वायरस की ये खास किस्मे (mutated strain) की इस प्रजाति/स्ट्रेन से एक दर्जन लोगों में संक्रमण फैला है। 

डब्लूएचओ की आपात अधिकारी कैथरीन स्मॉलवुड (Catherine Smallwood) ने कोपेनहेगन स्थित यूरोपीय कार्यालय में कहा कि यह निश्चित रूप से दुनिया के लिए बड़ा जोखिम है। उन्होंने कहा कि उदबिलाव की आबादी इंसानों में कोरोना की इस नई नस्ल  को तेजी से फैला सकती है। इसके बाद ये इंसानों में इंसानों से तेजी से फैलने लगेगा। ऐसे में ये न सिर्फ लोगों के लिए खतरे की बात है बल्कि कोरोना वायरस वैक्सीन के लिए काम कर रहे वैज्ञानिकों के लिए भी बड़ी चिंता की खबर है।

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अब वैज्ञानिकों को देखना होगा कि दुनियाभर में जिन टीकों पर काम हो रहा है क्या वे इस कोरोना के बदले रूप/परिवर्तित नस्ले के लिए भी काम कर पाएंगे। क्या ये कारगर होंगे। अगर ये टीके बेअसर साबित हुए तो दुनियाभर में बड़ा नुकसान हो सकता है।   

इस बारे में डब्लूएचओ की मुख्य विज्ञानी सौम्या स्वाकमीनाथन ने कहा कि कोरोना वायरस में आए इस बदलाव के कारण वैक्सीन को लेकर लगाए जा रहे कयास अभी जल्दबाज़ी हो सकती है। अभी हमें इस बदलाव का दुष्प्रभाव जानने के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। अभी इस बारे में कोई सबूत नहीं मिला हैं।

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उधर, डब्ल्यूएचओ हेल्थ इमर्जेंसी प्रोग्राम में कार्यरत विज्ञानी लीड मारिया वान केरखोव ने भी कहा कि अभी कुछ भी कहने और किसी भी परिणाम तक पहुंचने से पहले कोरोना में हुए इस बदलाव पर पूरी जानकारी एकत्र करने, शोध करने की जरूरत है।  

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