Monday, Mar 25, 2019

उत्तराखंड में बदस्तूर जारी है अवैध खनन का काला कारोबार, सरकार बेपरवाह

  • Updated on 3/8/2018

नई टिहरी/ब्यूरो। उत्तराखंड में सरकार को नदियों, जंगलों और तमाम दूसरे स्थलों से अवैध खनन का वह सब कुछ दृश्य नजर नहीं आता, जिसकी शिकायत लगातार पर्यावरण प्रेमी और खनन स्थल के आसपास रहने वाले लोग करते रहते हैं। जबकि पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने हैलीकॉप्टर से जाते समय वहां सतलुज नदी के आसपास हो रहे अवैध खनन को न देख लिया, बल्कि ऊपर से ही उसके फोटो भी करवा लिए।

हैलीकाप्टर से ही उन्होंने ट्वीट तो किया ही किया, अवैध खनन की ओर से आंख बंद किए अधिकारियों की भी जमकर क्लास ली। आनन-फानन एक्शन हुआ। कई आरोपी धरे गए।  उत्तराखंड में मुख्यमंत्री सहित तमाम काबीना मंत्री लगातार हैलीकाप्टर से उड़ान भरते हैं। चाहे वह हरिद्वार, रुड़की, नैनीताल, हल्द्वानी, रामनगर, काशीपुर, टनकपुर, सितारगंज जैसे इलाके हों या फिर पर्वतीय इलाके। अभी तक मुख्यमंत्री सहित किसी भी मंत्री को कुछ नजर नहीं आया।

साफ है कि हैलीकाप्टर यात्रा में कुछ न नजर आने के पीछे कुछ कारण तो हैं ही। मसलन,  राजधानी देहरादून से सटे डोईवाला, रायपुर विधानसभा क्षेत्रों, पछवादून के इलाकों में लगातार अवैध खनन जारी है। पर रोके, तो कौन रोके और क्यों रोके? कांग्रेस के शासनकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत पर खनन माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगता था। लगाने वाले वह लोग थे जो आज सत्ता में हैं।

सत्ता में आते ही भाजपा के नेताओं की आंखें बंद हो गई। अवैध खनन बदस्तूर जारी है। सुनिश्चित तौर पर कोई दबाव और प्रभाव तो सरकार और अधिकारियों पर जरूर काम करता है जो सरकार चाहे  कांग्रेस की हो या फिर भाजपा की। अवैध खनन के माफिया अपना काम धड़ल्ले से जारी रखते हैं।

नई टिहरी से मिली जानकारी के मुताबिक तहसील कंडीसौड़ में मोटर मार्गों के निर्माण कार्य में लगी जेसीबी मशीनें कई जगहों पर धड़ल्ले से अवैध खनन में लगी हुई हैं। मोटर मार्गों का निर्माण कार्य तो एक बहाना है। इससे जहां हर साल सरकार कोकरोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा  है, वहीं अवैध खनन के चलते पर्यावरण और हरे पेड़ों को भी हानि पहुंच रही है।

मोटर मार्गों के निर्माण कार्य में बिना नंबर की ट्रैक्टर-ट्राली और जेसीबी मशीनों का उपयोग कियाजा रहा है। इससे सरकार को राजस्व की हानि हो रही है। अवैध खनन का ताजा मामला पटवारी क्षेत्र बयाड़गांव का है। इस क्षेत्र में उनियाल गांव और नागराजाधार मोटर मार्ग से भेंटी गांव के पास लगभग पचास-साठ मीटरसड़क काटकर जेबीसी मशीन से अवैध खनन किया जा रहा है। 

नगुन-सुवाखोली मार्ग पर विकोलगांव के पास भी ऐसा ही हो रहा है। जेसीबी मशीनें धड़ल्ले से अवैध खनन में लगी हुई हैं। ऐसा नहीं है कि अधिकारियों को प्राकृतिक संपदा की इस लूट के बारे में मालूम नहीं है। बस, वे अपनी आंखें मूंदे हुए हैं। अगर किसी ओर से कोई दबाव पड़ता है, तो छोटे खनन माफियाओं पर मामूली कार्रवाई करके खानापूर्ति कर ली जाती है। 

इस संबंध में तहसील प्रशासन हर बार की तरह सारा ठीकरा ठेकेदारों के सिर पर फोड़कर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करता है।  अवैध खनन के बारे में पूछे जाने पर एसडीएम सीएस चौहान का कहना है कि अवैध खनन का मामला उनकी संज्ञान में नहीं था। मामले की जांच करवाकर दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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