why jagganath rathyatra has been celebrated in india

आखिर क्यों निकाली जाती है #JagannathRathYatra, जानें इससे जुड़ा रहस्य

  • Updated on 7/4/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भगवान जगन्नाथ (Lord Jagganath) यानी की भगवान श्री कृष्ण (Lord Krishna) की रथयात्रा आज से शुरू होने जा रही है। हर साल भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है। इस दिन सभी श्रद्धालु दूर-दूर से यहां आते हैं। रथयात्रा (Rathyatra) को मद्देनजर रखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतेजाम किए गए हैं यहां तक की इस यात्रा से जुड़ी सभी तैयारियों को समय से पहले ही पूरा कर लिया गया है। हिंदू धर्म (Hindu Religion) में मान्यता के मुताबिक भगवान विष्णु के 8वें अवतार यानी की जगन्नाथ (श्री कृष्ण) की इस दिन पूजा अर्चना कि जाती है और साथ ही इनकी रथयात्रा निकाली जाती है।

10 दिनों तक मनाए जानें वाला यह पर्व आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को जगन्नाथपुरी में आरंभ होती है और दशमी तिथि को यह समाप्त हो जाती है। रथयात्रा में सवार भगवान जगन्नाथ के साथ उनके बड़े भाई बलराम और छोटी बहन सुभद्रा भी मौजूद रहती हैं। रथयात्रा में जहां सबसे आगे ताल ध्वज पर श्री बलराम (Balram) रहते हैं वहीं, उसके पीछे पद्म ध्वज रथ पर माता सुभद्रा (Subhadra) व सुदर्शन चक्र और अंत में गरुण ध्वज पर श्री जगन्नाथ जी (Lord Jagganath) सबसे पीछे चलते हैं।

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हिंदू धर्म (Hindu Religion) के मुताबिक इस रथयात्रा का पौराणिक कथाओं से गहरा संबंध हैं इसलिए इस रथयात्रा (Rathyatra) का उल्लेख स्कंद पुराण,नारद पुराण, पद्म पुराण, बह्म पुराण आदि में भी किया गया है। और इसका एक मात्र कारण यही है कि इस यात्रा को हिंदू धर्म में काफी महत्व है और इसे धुमधाम से मनाया जाता है। बता दें कि, रथयात्रा को लेकर एक इतिहास भी जुड़ा है जिसे बहुत कम ही लोग जानते हैं, तो चलिए जानते हैं आखिर क्या है इसका इतिहास।

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आखिर क्यों निकाली जाती है रथयात्रा

हिंदू धर्म से जुड़ी मान्यता के मुताबिक भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा ओडिशा के पुरी इलाके में निकाला जाता है। पौराणिक कथाओं की मानें तो इस दिन ऐसा कहा जाता है कि भगवान जगन्नाथ जी की बहन सुभद्रा ने नगर देखने की चाह रखते हुए उनसे द्वारका के दर्शन करने की बात कही थी। जिसके बाद भगवान जगन्नाथ ने अपनी बहन का दिल रखने के लिए उन्हें रथ पर बैठाकर पूरे नगर का भ्रमण कराया और तभी से ही वहां पर ये पर्व हर साल मनाया जाता है और इस दिन जगन्नाथ जी की रथयात्रा निकाली जाती है। 

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रथयात्रा के दौरान तीनों प्रतिमाएं अलग-अलग रथों पर होती है सवार

रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा की प्रतिमाएं रखी जाती है। इन सभी प्रतिमाओं को अलग-अलग रथ में बैठाकर नगर का भ्रमण कराया जाता है। बता दें कि, तीनों रथों के लकड़ी का बनाया जाता है जिसको श्रद्धालु खींचकर चलाते हैं। और तीनों अलग-अलग रथ में करीब 42 पहिए होते हैं जिनमें श्री जगन्नाथ जी के रथ में 16 पहिए वहीं बड़े भाई बलराम के रथ में 14 पहिए एवं सुभद्रा के रथ में 12 पहिए लगे होते हैं।

रथयात्रा में शामिल होना या रथ को खींचने से मिलता है 100 यज्ञों के बराबर पुण्य

वहीं ऐसा माना जाता है कि जो भी श्रद्धालु इस रथयात्रा में शामिल होता है या उस रथ को खींचता है उसे 100 यज्ञों के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक रथ यात्रा को निकालकर भगवान जगन्नाथ को प्रसिद्ध गुंडिचा माता मंदिर पहुंचाया जाता हैं। वहां, पहुंचकर यहां भगवान जगन्नाथ विश्राम करते हैं।

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